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भाद्रपद माह की हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर जानें पूजा के शुभ मुहूर्त, भद्रा काल का समय और अर्घ्य की पूरी विधित्योहार
25 अग॰ 2026, 1:10 pm (55 दिन पहले)· 2

भाद्रपद माह की हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर जानें पूजा के शुभ मुहूर्त, भद्रा काल का समय और अर्घ्य की पूरी विधि

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा। जानें पूजा का शुभ समय, भद्रा काल की अवधि और चंद्रोदय का समय।

सनातन धर्म की परंपराओं में भगवान श्री गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता का स्थान प्राप्त है। किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से पूर्व बप्पा का आह्वान किया जाता है ताकि हर कार्य बिना किसी विघ्न-बाधा के सफलतापूर्वक पूर्ण हो सके। अपने जीवन के संकटों का निवारण करने और गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमपूर्वक रखते हैं। पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने में संकष्टी चतुर्थी पड़ती है, परंतु भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि का अपना विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस विशेष तिथि को हेरंब संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखकर संध्याकाल में विघ्नहर्ता गणेश जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं तथा रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने व्रत को पूर्ण करते हैं।

तिथि और व्रत की सही तारीख

धार्मिक पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 31 अगस्त को प्रातः काल 8 बजकर 50 मिनट पर हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 1 सितंबर को प्रातः काल 7 बजकर 41 मिनट पर होगा। शास्त्रों के नियम के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन चतुर्थी तिथि में चंद्रमा का उदय होता है। चंद्रोदय का यह विशेष संयोग 31 अगस्त की रात को ही बन रहा है, इसलिए हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त को ही रखा जाएगा।

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पूजा के शुभ मुहूर्त और शाम के नियम

हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर भगवान श्री गणेश की पूजा के लिए इस वर्ष दो विशेष शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं। श्रद्धालु प्रातः काल अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी मुहूर्त में बप्पा का पूजन कर सकते हैं। प्रथम शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर प्रातः 7 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। यदि कोई श्रद्धालु इस समय पूजा न कर पाए तो उनके लिए दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, शाम के समय घर में सुख-समृद्धि के लिए मुख्य द्वार या पूजा स्थान पर दीप प्रज्वलित करने का शुभ समय शाम 6 बजकर 44 मिनट रहेगा।

भद्रा काल का समय और इसके धार्मिक नियम

हेरंब संकष्टी चतुर्थी वाले दिन पूजा के समय भद्रा का साया भी रहने वाला है। 31 अगस्त की सुबह 5 बजकर 58 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 50 मिनट तक भद्रा काल रहेगा। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर ही माना जा रहा है। जब भद्रा पृथ्वी पर निवास करती है, तो उस दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य, नया व्यवसाय आरंभ करना अथवा शुभ अनुष्ठान करना वर्जित और अशुभ माना जाता है। इसलिए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही कोई भी नया या शुभ कार्य संपन्न करें।

चंद्रोदय का समय और व्रत पारण की विधि

संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। 31 अगस्त की रात को चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 29 मिनट पर रहेगा। रात्रि में चंद्रमा के निकलने के पश्चात श्रद्धालु गणेश जी की विधिवत पूजा करेंगे और फिर अर्घ्य देकर अपने व्रत को पूर्ण करेंगे। पारण के नियमों की बात करें तो जो श्रद्धालु चंद्रमा को अर्घ्य समर्पित करने के तुरंत बाद व्रत खोलते हैं, वे 31 अगस्त की रात को ही पारण कर सकते हैं। वहीं जो लोग परंपरा के अनुसार अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करते हैं, वे 1 सितंबर को सूर्योदय के पश्चात प्रातः 5 बजकर 59 मिनट से अपना उपवास खोल सकते हैं।

हेरंब संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूरे मनोयोग से साधना करने पर जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को अपने प्रत्येक कार्य में सफलता की प्राप्ति होती है। इस पावन अवसर पर रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत का पूरी निष्ठा से पालन करने पर कुंडली में मौजूद चंद्र दोष शांत होता है और मानसिक तनाव एवं कष्टों से मुक्ति मिलती है।

सवाल-जवाब

हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत किस दिन रखा जाएगा?
हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा, क्योंकि इस दिन रात में चंद्रोदय की तिथि मिल रही है।
31 अगस्त को गणेश पूजा के लिए कौन से शुभ मुहूर्त हैं?
पूजा के लिए पहला शुभ समय सुबह 5:58 से 7:34 बजे तक है और दूसरा मुहूर्त सुबह 9:10 से 10:46 बजे तक रहेगा।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी पर भद्रा का समय कब से कब तक है?
31 अगस्त को सुबह 5:58 बजे से सुबह 8:50 बजे तक भद्रा काल रहेगा, जिस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
चंद्रोदय किस समय होगा और व्रत पारण की क्या विधि है?
चंद्रोदय रात 8:29 बजे होगा। श्रद्धालु रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोल सकते हैं या फिर अगले दिन 1 सितंबर को सुबह 5:59 बजे के बाद पारण कर सकते हैं।
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