झारखंड का देवघर जिला केवल अपनी आध्यात्मिक पहचान और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह अपनी समृद्ध और विविधतापूर्ण खान-पान संस्कृति के लिए भी काफी मशहूर है। इस पवित्र नगरी की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक आप यहां के स्थानीय व्यंजनों का स्वाद न चख लें। विशेष रूप से जब लोग देवघर के पास स्थित जसीडीह पहुंचते हैं, तो वहां की एक खास डिश उनका ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। जसीडीह में वर्षों पुरानी ऐसी दुकानें मौजूद हैं जहां की स्पेशल पापड़ी चाट लोगों की जुबान पर चढ़ी हुई है। यहां के लोग शाम के समय सामान्य आलू टिक्की खाने के बजाय इस खास पापड़ी चाट को खाना ज्यादा पसंद करते हैं। यही कारण है कि जैसे ही सूरज ढलता है और शाम की शुरुआत होती है, इन दुकानों पर ग्राहकों का तांता लग जाता है। स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पड़ोसी जिलों और देश के अन्य राज्यों से आने वाले लोग भी इस स्वाद का आनंद लेने के लिए यहां खिंचे चले आते हैं।
सावन के पावन महीने में बंगाल के श्रद्धालुओं की पहली पसंद
श्रावण मास यानी सावन के पवित्र महीने में इन पारंपरिक दुकानों की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु जब बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जल अर्पण कर लेते हैं और अपनी पूजा-अर्चना पूरी कर लेते हैं, तो वे सीधे जसीडीह की इन प्रसिद्ध दुकानों की तरफ रुख करते हैं। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों से आने वाले कांवरियों और पर्यटकों के लिए यह जगह एक अनिवार्य पड़ाव बन चुकी है। वे हर साल देवघर की अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान यहां आकर पापड़ी चाट खाना नहीं भूलते। कई श्रद्धालु तो ऐसे हैं जो सालों से इस परंपरा का पालन कर रहे हैं कि बाबा के दर्शन के बाद उन्हें जसीडीह की इस चाट का स्वाद जरूर लेना है। इतने वर्षों के निरंतर प्रेम और भरोसे के कारण ही यह स्वादिष्ट चाट अब जसीडीह की एक अनूठी पहचान बन चुकी है।
प्रकाश राउत की 45 वर्षों की विरासत
जसीडीह में इस स्वाद की विरासत को सहेजने वाले प्रमुख दुकानदारों में से एक प्रकाश राउत हैं। उन्होंने अपनी दुकान के सफर के बारे में साझा करते हुए बताया कि उनकी यह दुकान पिछले 45 वर्षों से लगातार लोगों को अपनी सेवाएं दे रही है। इस दुकान की नींव वर्ष 1980-81 में उनके आदरणीय पिता द्वारा रखी गई थी। वर्तमान में प्रकाश राउत अपनी दूसरी पीढ़ी के रूप में इस पारिवारिक विरासत और स्वाद को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब उनके पिता ने इस दुकान की शुरुआत की थी, तब एक प्लेट चाट की कीमत महज 5 रुपये हुआ करती थी। हालांकि समय के साथ-साथ महंगाई बढ़ी और कई चीजें बदलीं, लेकिन दुकान ने अपने स्वाद और शुद्धता के साथ कभी समझौता नहीं किया। आज भी यहां ग्राहकों को वही पुराना और पारंपरिक स्वाद परोसा जाता है।
प्रकाश राउत की दुकान पर ग्राहकों के लिए भेलपूरी, विभिन्न प्रकार के चाट और कई अन्य स्वादिष्ट स्नैक्स उपलब्ध रहते हैं, लेकिन जो लोकप्रियता और मांग पापड़ी चाट की है, उसका मुकाबला कोई अन्य व्यंजन नहीं कर सकता। आज के समय में केवल 40 रुपये की किफायती कीमत पर मिलने वाली यह पापड़ी चाट अपनी लाजवाब क्वालिटी के कारण लोगों के दिलों पर राज कर रही है। वर्षों पुराने कई नियमित ग्राहक आज भी इस दुकान पर आते हैं और अब वे अपने बच्चों और अगली पीढ़ी को भी इस ऐतिहासिक स्वाद से रूबरू कराने के लिए साथ लेकर आते हैं।
रमेश जी की दुकान और चार दशकों का अनुभव
जसीडीह की गलियों में स्वाद का एक और बड़ा केंद्र रमेश जी की दुकान है। रमेश जी पिछले लगभग 40 वर्षों से लगातार अपने हाथों से स्वादिष्ट पापड़ी चाट तैयार कर रहे हैं। उनका मानना है कि उनकी दुकान की असली पहचान और शान यह अनोखी पापड़ी चाट ही है। जिले के कोने-कोने से लोग इस स्वाद को तलाशते हुए उनकी दुकान तक पहुंचते हैं और देवघर आने वाले बाहरी पर्यटक भी कम से कम एक बार यहां का स्वाद जरूर चखते हैं। जब उनसे इस लोकप्रियता के पीछे के रहस्य के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि स्वाद का सबसे बड़ा जादू ताजी सामग्रियों का चयन, मसालों का सही संतुलन और चाट बनाने का उनका चार दशकों का लंबा अनुभव है। यही वजह है कि जो कोई भी ग्राहक एक बार उनकी दुकान की चाट का जायका ले लेता है, वह दोबारा यहां आना कभी नहीं भूलता।
इस अनोखी पापड़ी चाट की पारंपरिक रेसिपी
यदि जसीडीह की इस प्रसिद्ध और मुंह में पानी ला देने वाली पापड़ी चाट की बनाने की विधि पर नजर डालें, तो इसकी रेसिपी बेहद सरल होने के बावजूद बेहद खास है। इसे बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले उबले हुए आलुओं को छोटे-छोटे चौकोर टुकड़ों में काटा जाता है। इसके बाद ताजे और रसीले टमाटरों को बहुत बारीक काटकर आलू के साथ मिलाया जाता है। इस मिश्रण में साधारण नमक, भुना हुआ जीरा पाउडर, ताजा नींबू का रस, बारीक भुजिया, दो-तीन अलग-अलग प्रकार के कुरकुरे नमकीन मिक्सचर और दुकानदारों के अपने गुप्त खास मसालों को डालकर अच्छी तरह से मिलाया जाता है।
इसके बाद परोसने की बारी आती है। एक साफ प्लेट में सबसे पहले कुरकुरी और ताजी पापड़ी को करीने से सजाया जाता है। इन पापड़ियों के ऊपर स्वाद के अनुसार मीठी चटनी डाली जाती है। फिर तैयार किए गए मसालेदार आलू और टमाटर के चटपटे मिश्रण को पापड़ी के ऊपर फैलाया जाता है। अंत में सजावट और कुरकुरेपन को बढ़ाने के लिए ऊपर से ढेर सारी भुजिया और चुटकी भर खास मसाले बुरके जाते हैं। इसका खट्टा, मीठा और हल्का तीखा स्वाद आपस में इस तरह घुलमिल जाता है कि यह इस पापड़ी चाट को बाजार में मिलने वाली अन्य साधारण चाट से पूरी तरह अलग और बेहतरीन बना देता है।
एक पहचान जो स्ट्रीट फूड से कहीं बढ़कर है
आज जसीडीह की यह पापड़ी चाट महज एक सामान्य स्ट्रीट फूड नहीं रह गई है, बल्कि इसने देवघर और जसीडीह आने वाले हजारों-लाखों श्रद्धालुओं तथा सैलानियों के दिलों में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना ली है। बाबा धाम की पवित्र यात्रा पर आने वाले लोगों के लिए इस चाट का स्वाद लेना अब उनकी यात्रा का एक अनिवार्य और यादगार हिस्सा बन चुका है। दशकों पुराना अटूट भरोसा, बेहतरीन स्वाद और शुद्धता की परंपरा ही इन दुकानों को आज के आधुनिक दौर में भी लोगों की पहली पसंद बनाए हुए है।











