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छपरा का 40 साल पुराना स्वाद जहां का शुद्ध गुलाब जामुन खाने बिहार ही नहीं उत्तर प्रदेश से भी खिंचे चले आते हैं लोगखानपान
21 जून 2026, 7:12 am (131 दिन पहले)· 4

छपरा का 40 साल पुराना स्वाद जहां का शुद्ध गुलाब जामुन खाने बिहार ही नहीं उत्तर प्रदेश से भी खिंचे चले आते हैं लोग

सारण के इनई पुल बाजार में स्थित एक पारंपरिक दुकान पिछले 40 वर्षों से शुद्ध खोए के गुलाब जामुन परोस रही है, जिसके स्वाद के दीवाने पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश तक में हैं।

बिहार के सारण जिले में स्थित रिविलगंज प्रखंड के इनई पुल बाजार की एक मिठाई की दुकान इन दिनों अपने अनोखे स्वाद के लिए चर्चा में है। शुद्धता और लाजवाब स्वाद के दम पर इस दुकान ने पिछले 40 सालों से अधिक समय से लोगों के दिलों में एक खास जगह बना रखी है। ग्रामीण इलाके में स्थित होने के बावजूद इस दुकान की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि स्थानीय लोगों के अलावा पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी लोग विशेष रूप से यहां का स्वाद चखने आते हैं। इस ऐतिहासिक दुकान का संचालन अब परिवार की दूसरी पीढ़ी कर रही है।

पिता की विरासत को बेटों ने रखा बरकरार

इस मशहूर मिठाई की दुकान की शुरुआत रामेश्वर सिंह ने की थी। उन्होंने जिस ईमानदारी और शुद्धता के साथ इस काम को शुरू किया था, उनके बेटे भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। वर्तमान में रामेश्वर सिंह की इस विरासत को उनके तीन बेटे पंकज सिंह, पवन सिंह और जीवन सिंह मिलकर संभाल रहे हैं। दुकानदारों का मानना है कि पिछले चार दशकों में उन्होंने अपने स्वाद और गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया। यही कारण है कि आज भी हर उम्र के लोग, चाहे बच्चे हों या बुजुर्ग, यहां की मिठाइयों को बेहद चाव से खाते हैं।

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कोयले की आंच और शुद्ध दूध का जादू

इस दुकान की सफलता का सबसे बड़ा रहस्य इसकी निर्माण प्रक्रिया और साफ-सफाई में छिपा है। यहां गुलाब जामुन बनाने के लिए किसी भी तरह की मिलावट का सहारा नहीं लिया जाता। इसके लिए रोजाना उत्तर प्रदेश और आसपास के ग्रामीण इलाकों से शुद्ध दूध मंगवाया जाता है। इसके बाद दूध को कोयले की धीमी आंच पर घंटों तक जलाकर पारंपरिक तरीके से मावा तैयार किया जाता है।

TrendKia से बातचीत के दौरान जीवन सिंह ने बताया कि दुकान में हर दिन एक क्विंटल यानी करीब 100 लीटर दूध का इस्तेमाल किया जाता है। इस दूध से रोजाना ताजे गुलाब जामुन तैयार किए जाते हैं और शाम ढलने तक सारी मिठाइयां बिक जाती हैं।

यात्रियों की पसंदीदा जगह

इनई पुल का रास्ता बिहार और उत्तर प्रदेश को आपस में जोड़ता है। इस मार्ग से गुजरने वाले मुसाफिर अक्सर इस दुकान पर रुकना नहीं भूलते। राहगीर यहां गाड़ी रोककर न सिर्फ गरमा-गरम गुलाब जामुनों का आनंद लेते हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए भी इसे पैक करवाकर ले जाते हैं। बेहद किफायती दाम पर बेहतरीन गुणवत्ता और असली स्वाद देना ही इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत है।

सवाल-जवाब

छपरा की यह मशहूर गुलाब जामुन की दुकान कहाँ स्थित है?
यह दुकान बिहार के सारण (छपरा) जिले के रिविलगंज प्रखंड के अंतर्गत इनई पुल बाजार में स्थित है।
इस दुकान की शुरुआत किसने की थी और अब इसे कौन चला रहा है?
इस प्रसिद्ध दुकान की शुरुआत रामेश्वर सिंह ने की थी। वर्तमान में उनके तीन बेटे पंकज सिंह, पवन सिंह और जीवन सिंह इसे संभाल रहे हैं।
यहाँ गुलाब जामुन बनाने के लिए प्रतिदिन कितने दूध की आवश्यकता होती है?
इस दुकान पर रोजाना गुलाब जामुन तैयार करने के लिए एक क्विंटल यानी लगभग 100 लीटर शुद्ध दूध की खपत होती है।
यहाँ के गुलाब जामुन इतने प्रसिद्ध क्यों हैं?
ये गुलाब जामुन बिना किसी मिलावट के, उत्तर प्रदेश और स्थानीय गांवों से मंगवाए गए शुद्ध दूध से कोयले की आंच पर पारंपरिक तरीके से मावा तैयार कर बनाए जाते हैं।
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