पश्चिम बर्दवान में सूने मकान को चोरों ने तीसरी बार बनाया निशाना, भगवान के गहने और नकदी पारकर्नाटक संगीत के दिग्गज मुथुस्वामी दीक्षितार के सम्मान में 250 रुपये का विशेष सिक्का पेशवक्री बुध का गोचर: अगले 10 दिनों में 5 राशियों को रहना होगा बेहद सतर्कगुरुग्राम के होटल में हॉट टब के अंदर मृत मिले ब्रिटेन में कार्यरत 35 वर्षीय इंजीनियर प्रांजिल पाठकइकेया कालसुप ब्लूटूथ स्पीकर का विस्तृत परीक्षण और प्रदर्शन विश्लेषणकुंभ राशि पर 212 दिन शनि का कड़ा इम्तिहान, इन 4 अहम बातों की अनदेखी पड़ सकती है भारीभीड़भाड़ और जाम से निपटने के लिए जयपुर में छोटे वाहन पर गश्त करते दिखे ट्रैफिक पुलिसकर्मीजाखम बांध के पानी और बीहड़ जंगल को पार कर वोट डालने पहुंचे कर्मी गांव के लोगत्योहारी खरीदारी को लेकर बाजारों में सुरक्षा चक्रव्यूह, निगरानी वैन और ड्रोन से रखी जा रही नजरबोस्टन में जुटे उद्यमी और निवेशक, 4 नवंबर को सोवा पावर स्टेशन पर होगा स्टार्टअप सम्मेलन
घर पर तैयार करें मुंबई का मशहूर आइस हलवा, इस दिवाली मेहमानों को परोसें कुछ खासखानपान
3 नव॰ 2026, 9:25 pm (1 मिनट पहले)· 0

घर पर तैयार करें मुंबई का मशहूर आइस हलवा, इस दिवाली मेहमानों को परोसें कुछ खास

पारंपरिक बेसन लड्डू और काजू कतली से अलग इस दिवाली घर पर बनाएं मुंबई का पेपर हलवा। कॉर्नफ्लोर, दूध, चीनी और सूखे मेवों से बनी यह पतली परत वाली मिठाई स्वाद में बेहद लाजवाब होती है।

दिवाली के पावन अवसर पर हर घर में पकवानों और मिठास की महक फैल जाती है। अक्सर लोग इस त्योहार में बेसन के लड्डू, गुलाब जामुन, बर्फी और काजू कतली जैसी पारंपरिक मिठाइयों पर ही भरोसा जताते हैं। हालांकि, यदि आप इस बार आने वाले अतिथियों के सामने कुछ नया और विशिष्ट परोसना चाहते हैं, तो मुंबई की पहचान बन चुका प्रसिद्ध आइस हलवा एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यह मिठाई अपनी अत्यंत महीन, शीशे जैसी पारदर्शी बनावट और मुंह में घुल जाने वाले स्वाद के लिए पहचानी जाती है। रसोई में मौजूद बेहद बुनियादी सामग्री से इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।

माहिम हलवा और पेपर हलवा के रूप में भी है पहचान

इस अनूठी मिठाई को माहिम हलवा तथा पेपर हलवा के नाम से भी पुकारा जाता है। मुंबई की पारंपरिक हलवाई संस्कृति में इसका स्थान बहुत पुराना और सम्मानित है। इसका नाम आइस हलवा इसलिए पड़ा क्योंकि इसे बर्फ की महीन चादर की तरह बेहद पतला बेला या फैलाया जाता है। कागज जैसी पतली परत के कारण कई लोग इसे पेपर हलवा भी कहते हैं।

ये भी पढ़ें

मुंबई के माहिम इलाके से इस व्यंजन का गहरा ऐतिहासिक नाता रहा है। वहां मौजूद प्राचीन मिष्ठान प्रतिष्ठानों की वजह से यह माहिम हलवा के नाम से दूर-दूर तक लोकप्रिय हुआ। इसे तैयार करने के लिए मुख्य रूप से दूध, चीनी, शुद्ध घी और कॉर्नफ्लोर की जरूरत होती है। सजावट और स्वाद में इजाफा करने के लिए इसमें कतरे हुए बादाम और पिस्ते का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा ऐच्छिक तौर पर खाने वाला नारंगी या पीला रंग भी डाला जा सकता है।

कड़ाही में मिश्रण पकाने की सही विधि

घर पर इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक खुले बर्तन में कॉर्नफ्लोर और पानी को एक साथ डालकर चिकना घोल तैयार कर लें। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इस घोल में किसी भी प्रकार की गांठ न रहे। इसके बाद उसी बर्तन में दूध और चीनी डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह फेंटें। पारंपरिक पीला या नारंगी रंग देने के लिए इसी चरण पर थोड़ा सा खाद्य रंग मिलाया जा सकता है।

इसके उपरांत एक भारी तले वाली कड़ाही को चूल्हे पर चढ़ाएं और तैयार किया गया सारा मिश्रण उसमें डाल दें। आंच को धीमा से मध्यम रखते हुए करछुल से लगातार चलाते रहें। थोड़ी देर में घोल गाढ़ा होने लगता है। इस अवस्था में थोड़ा-थोड़ा करके शुद्ध घी मिलाते जाएं। मिश्रण को बिना रुके चलाना अनिवार्य है, ताकि वह कड़ाही के तले में चिपकने न पाए और उसमें गुठलियां न पड़ें।

थाली पर फैलाना और परोसने की तैयारी

जब हलवे का यह घोल चमकदार और पारदर्शी दिखने लगे तथा कड़ाही के किनारों को आसानी से छोड़ने लगे, तब इसमें सुगंध के लिए इलायची पाउडर डालकर भली-भांति मिला दें। इसके तुरंत बाद आंच बंद कर दें। पहले से तैयार एक चिकनी थाली या बटर पेपर पर हल्का सा घी लगाएं और उस पर पके हुए गर्म मिश्रण को समान रूप से बहुत पतली परत में फैला दें।

परत के ऊपर बारीक कटे हुए बादाम और पिस्ता डालकर चम्मच या हल्के हाथों से दबा दें ताकि वे हलवे में अच्छी तरह जम जाएं। पूरे मिश्रण को सामान्य तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने के लिए छोड़ दें। जब हलवा कड़क होकर अच्छी तरह जम जाए, तब इसे चाकू से चौकोर अथवा अपनी पसंद के टुकड़ों में काट लें। इस तरह मुंबई शैली का स्वादिष्ट और कुरकुरा आइस हलवा परोसने के लिए तैयार हो जाता है।

सवाल-जवाब

आइस हलवा को पेपर हलवा या माहिम हलवा क्यों कहा जाता है?
कागज जैसी पतली परत के कारण इसे पेपर हलवा और मुंबई के माहिम इलाके की दुकानों से पहचान मिलने के कारण इसे माहिम हलवा कहा जाता है।
इसे बनाने के लिए किन मुख्य सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
इसे बनाने में मुख्य रूप से कॉर्नफ्लोर, पानी, दूध, चीनी, घी, इलायची पाउडर और सूखे मेवों का इस्तेमाल किया जाता है।
मिश्रण को कड़ाही में लगातार चलाना क्यों जरूरी है?
लगातार चलाने से मिश्रण कड़ाही के तले में चिपकता नहीं है और उसमें गांठें नहीं पड़ती हैं।
हलवे को थाली पर कब फैलाना चाहिए?
जब मिश्रण चमकदार और पारदर्शी होकर कड़ाही छोड़ने लगे, तब आंच बंद कर इसे तुरंत घी लगी थाली या बटर पेपर पर फैलाना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp