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केले के तने की राख से तैयार होने वाला असमिया खार भोजन की शुरुआत में क्यों परोसा जाता हैखानपान
11 अक्तू॰ 2026, 8:35 pm (18 दिन पहले)· 1

केले के तने की राख से तैयार होने वाला असमिया खार भोजन की शुरुआत में क्यों परोसा जाता है

असम के पारंपरिक भोजन में खास पहचान रखने वाला खार केले के छिलके और तने की राख से बनने वाले क्षारीय पानी से तैयार होता है, जिसे अक्सर भोजन की शुरुआत में परोसा जाता है।

पूर्वोत्तर भारत की रसोई परंपराओं में ऐसी कई विधियां शामिल हैं जो आम तौर पर फेंक दी जाने वाली सामग्रियों को भी विशिष्ट स्वाद में ढाल देती हैं। असमिया खानपान की पहचान माना जाने वाला खार इसी पाक कला का सबसे अनूठा उदाहरण है। यह न केवल थाली का एक जरूरी हिस्सा है, बल्कि इसे तैयार करने में केले के छिलकों या तने को जलाकर हासिल की गई राख के क्षारीय पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे पूरे देश के अन्य क्षेत्रीय व्यंजनों से बिल्कुल अलग बनाता है।

कोला खार तैयार करने की अनोखी घरेलू विधि

असम में खार शब्द केवल पकी हुई थाली की डिश के लिए ही नहीं, बल्कि उस मुख्य क्षारीय घटक के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाता है जिससे यह बनती है। इस सामग्री को पारंपरिक रूप से कोला खार कहा जाता है। इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले केले के सूखे छिलकों अथवा केले के पौधे के भीतरी तने को सुखाकर जलाया जाता है। इसके बाद जलने से बची राख में साफ पानी डाला जाता है और फिर कपड़े या छलनी से बूंद-बूंद करके इस पानी को छाना जाता है। इस छने हुए प्राकृतिक क्षारीय तरल में एक खास तीखापन और सौंधापन होता है, जो आगे चलकर व्यंजनों का आधार बनता है।

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कच्चे पपीते से लेकर दाल और सब्जियों तक के रूप

असमिया रसोई में खार किसी एक बंधी-बंधाई रेसिपी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अलग-अलग घरों में इसे कई तरह से पकाया जाता है। इसका सबसे लोकप्रिय और प्रामाणिक रूप कच्चे पपीते के साथ बनाया जाता है। पपीते को बारीक टुकड़ों में काटकर पहले पकाया जाता है और उसके बाद उसमें तय मात्रा में तैयार कोला खार मिलाया जाता है। पपीते के अलावा इसमें स्थानीय दालें, मौसमी सब्जियां और कुछ खास जगहों पर मछली का उपयोग भी किया जाता है। इस व्यंजन में मसालों की भरमार नहीं होती; केवल थोड़ा सा सरसों का तेल, नमक और बेहद सीमित मसाले ही इसमें डाले जाते हैं, ताकि क्षारीय अर्क का मूल स्वाद खुलकर सामने आ सके।

पारंपरिक भोजन की शुरुआत में परोसने का रिवाज

असम के अधिकांश परिवारों में दोपहर या रात के पारंपरिक भोजन की शुरुआत खार परोसकर करने की लंबी परंपरा रही है। भोजन की थाली में इसे सबसे पहले खाया जाता है, जिसके बाद ही सादे उबले चावल, दाल, सूखी या रसेदार सब्जियां और अन्य पकवान क्रमबद्ध तरीके से आते हैं। हालांकि विभिन्न परिवारों और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार थाली में इसे परोसने का क्रम थोड़ा बदल भी सकता है, लेकिन थाली में इसका स्थान हमेशा प्रमुख रहता है। सामान्य करी या तरीदार सब्जियों की तुलना में इसका स्वाद और बनावट बिल्कुल अनोखी होती है, जो इसे जानने वालों के लिए एक यादगार खानपान अनुभव बनाती है।

सवाल-जवाब

खार बनाने में मुख्य रूप से किस अनोखी सामग्री का उपयोग होता है?
इसे बनाने में केले के छिलकों या केले के पौधे के तने को जलाकर तैयार की गई राख के छने हुए क्षारीय पानी का उपयोग किया जाता है।
कोला खार किसे कहा जाता है?
केले के छिलके या तने की राख में पानी डालकर जो क्षारीय तरल छाना जाता है, उसे पारंपरिक रूप से कोला खार कहते हैं।
खार में सामान्यतः कौन सी मुख्य सब्जियां या चीजें डाली जाती हैं?
यह मुख्य रूप से कच्चे पपीते से बनाया जाता है, हालांकि इसमें दाल, सब्जियां और कुछ स्थानीय तरीकों में मछली भी डाली जाती है।
असम में पारंपरिक भोजन के दौरान खार कब खाया जाता है?
असमिया परिवारों में पारंपरिक भोजन की शुरुआत अक्सर चावल के साथ खार परोसकर करने का रिवाज है।
क्या खार में बहुत ज्यादा मसालों का इस्तेमाल होता है?
नहीं, इसमें आमतौर पर सरसों का तेल, नमक और बेहद सीमित मसालों का ही प्रयोग किया जाता है।
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