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पाली का मशहूर गुलाब हलवा: दिवाली पर विदेशों तक पहुंची मांग, दुबई और अमेरिका तक हो रही सप्लाईखानपान
21 अक्तू॰ 2026, 3:24 pm (8 दिन पहले)· 0

पाली का मशहूर गुलाब हलवा: दिवाली पर विदेशों तक पहुंची मांग, दुबई और अमेरिका तक हो रही सप्लाई

पाली का पारंपरिक गुलाब हलवा दिवाली के मौके पर बेहद लोकप्रिय हो गया है। अमेरिका, लंदन और दुबई में रहने वाले प्रवासी भारतीय अपने रिश्तेदारों के जरिए इस खास मिठाई को मंगवा रहे हैं।

त्योहारों का सीजन शुरू होते ही घरों में उमंग के साथ पारंपरिक पकवानों और मिठाइयों की खुशबू फैलने लगती है। जब बात राजस्थान के पाली की आती है, तो स्थानीय लोगों के लिए चैन सिंह के गुलाब हलवे के बिना हर जश्न अधूरा माना जाता है। रोशनी के इस बड़े पर्व के नजदीक आते ही इस लोकप्रिय हलवे के लिए दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। स्थानीय स्तर पर पसंद की जाने वाली यह खास मिठास अब देश की सीमाओं को लांघकर सात समंदर पार तक अपनी धाक जमा चुकी है।

विदेशों तक फैली इस पारंपरिक स्वाद की ख्याति

इस बार के उत्सवों में एक बेहद खास बात यह देखने को मिल रही है कि पाली का यह प्रसिद्ध गुलाब हलवा विदेशों में रहने वाले लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। दुबई, लंदन और अमेरिका जैसे दूरदराज देशों में बसे प्रवासी भारतीय इस अनोखे स्वाद को अपने घर मंगवाने के लिए बेताब हैं। वहां रहने वाले लोग अपने परिजनों, दोस्तों और रिश्तेदारों के माध्यम से इस मिठाई को विशेष तौर पर मंगवा रहे हैं। यह जायका विदेश में बैठे भारतीयों को उनकी अपनी जड़ों और पारंपरिक त्योहारों की यादों से मजबूती से जोड़ रहा है。

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आखिर क्यों खास है यह मैरून रंग की मिठाई

पाली के इस गुलाब हलवे की अपनी कुछ अनोखी विशेषताएं हैं, जो इसे अन्य साधारण मिठाइयों से बिल्कुल अलग करती हैं। इसकी सोंधी खुशबू, बेहतरीन स्वाद और इसका अनूठा मैरून रंग लोगों को दीवाना बना देता है। विदेशों में रहने वाले बहुत से भारतीय त्योहारों के दिनों में अपने देश के पारंपरिक खानपान को बहुत मिस करते हैं। ऐसे में यह हलवा उन्हें अपनी मातृभूमि के ठेठ स्वाद का अहसास कराता है, जिसके चलते एनआरआई वर्ग में इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है。

करीब छह दशक पुराना है इसका दिलचस्प इतिहास

इस लजीज व्यंजन का इतिहास लगभग 60 साल पुराना है और इसके पीछे एक रोचक कहानी जुड़ी हुई है। करीब छह दशक पहले पाली के भीतरी बाजार इलाके में जैन मार्केट के नजदीक मूलचंद कास्टिया की मिठाई की दुकान पर इसकी शुरुआत हुई थी। शुरुआती दौर में उस दुकान पर केवल रबड़ी बनाने का काम किया जाता था। उसी दुकान पर काम करने वाले गुलाब पुरी ने एक दिन बचे हुए दूध में चीनी मिलाई और उसे मंदी आंच पर काफी देर तक पकाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वह दूध गाढ़ा होकर मावे की शक्ल लेने लगा और पकते-पकते उसका रंग बेहद खूबसूरत मैरून हो गया। जब इस नए मिश्रण को ठंडा करके चखा गया, तो इसका जायका सामान्य मिठाइयों से एकदम हटकर निकला। इस मिठाई को तैयार करने वाले गुलाब पुरी के नाम के साथ-साथ इसके लाजवाब रंग और महक के कारण इसे गुलाब हलवा पुकारा जाने लगा। आज यह पारंपरिक व्यंजन पाली शहर की पहचान बन चुका है और हर साल त्योहारों के दिनों में इसकी बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाती है।

सवाल-जवाब

पाली का कौन सा हलवा सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है?
पाली का चैन सिंह का गुलाब हलवा अपनी खास महक और स्वाद के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।
इस गुलाब हलवे की मांग किन देशों में बढ़ रही है?
दुबई, लंदन और अमेरिका में रहने वाले प्रवासी भारतीय इस गुलाब हलवे को सबसे ज्यादा मंगवा रहे हैं।
पाली के गुलाब हलवा का इतिहास कितना पुराना है?
इस अनूठी मिठाई का इतिहास करीब 60 साल पुराना है जिसकी शुरुआत भीतरी बाजार से हुई थी।
इस हलवे की खोज किसने की थी?
इस मिठाई की शुरुआत मूलचंद कास्टिया की दुकान पर काम करने वाले गुलाब पुरी ने की थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·8 दिन पहले

छह दशक पहले बचे हुए दूध से बनी एक गलती आज सात समंदर पार धूम मचा रही है, यह देखकर बहुत मज़ा आया।

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·8 दिन पहले

अमर भाई, एकदम सही कहा आपने! जब मैं पिछली बार पाली गया था, चैन सिंह की दुकान पर लंबी कतार देखकर ही अंदाजा हो गया था कि इस मैरून हलवे का जादू सचमुच सात समंदर पार तक असर दिखा रहा है।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·8 दिन पहले

पाली का यह गुलाब हलवा सच में लाजवाब है, बचपन की यादें ताज़ा हो गईं।

Amit Patel@amit-patel·8 दिन पहले

संदीप जी, चैन सिंह की दुकान के बाहर की वह लंबी लाइन मुझे भी याद आ गई, वहां का मैरून रंग और सोंधी खुशबू वाकई बेजोड़ है।

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