यदि आप रोजाना की आलू, गोभी, भिंडी और परवल जैसी पारंपरिक सब्जियों से बोर हो चुके हैं, तो इस बार अपने किचन में कुछ नया और पारंपरिक आजमाने का समय आ गया है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में इन दिनों कमलगट्टे की चटपटी घुघनी का चलन काफी बढ़ गया है, जो स्वाद के मामले में मटर की घुघनी को भी पीछे छोड़ देती है। ताजे और हरे कमलगट्टों से तैयार होने वाली यह अनूठी रेसिपी सरसों के तेल और चुनिंदा मसालों के मेल से और भी ज्यादा जायकेदार बन जाती है। इसे आप सुबह के नाश्ते में चाय के साथ या फिर दोपहर व रात के खाने में रोटी और पराठों के साथ आसानी से परोस सकते हैं।
बलिया के स्थानीय बाजारों में आसानी से मिलते हैं ताजे कमलगट्टे
बलिया के केवटलिया चौबे निवासी मंटू कुमार शहर में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं और उन्होंने हाल ही में अपने घर पर इस पारंपरिक व्यंजन को तैयार किया है। उनके अनुसार, इस मौसम में ताजे कमलगट्टे बलिया के शहीद पार्क के आसपास के बाजारों में बहुत ही आसानी से मिल जाते हैं। मंटू का कहना है कि उनकी दादी हमेशा से इस बात पर जोर देती थीं कि कमलगट्टे की घुघनी न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी काफी गुणकारी मानी जाती है। पारंपरिक नुस्खों के अनुसार तैयार यह व्यंजन ग्रामीण इलाकों की खासियत को शहरी रसोई तक ले आता है।
स्वादिष्ट घुघनी तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री
इस लजीज और पारंपरिक डिश को बनाने के लिए आपको कुछ बुनियादी सामग्रियों की आवश्यकता होगी जो आपकी रसोई में पहले से ही मौजूद हो सकती हैं। रेसिपी के लिए मुख्य तौर पर एक कप ताजे कमलगट्टे, एक चम्मच अदरक, लहसुन और मिर्च का पिसा हुआ पेस्ट, एक छोटी चम्मच जीरा, आधा चम्मच हल्दी पाउडर और एक बारीक कटा हुआ प्याज चाहिए होता है। इसके अलावा एक चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, स्वादानुसार नमक, थोड़ा सा गरम मसाला और दो से तीन बड़े चम्मच सरसों का तेल लगेगा। यदि आप इस व्यंजन को और अधिक भारी या पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो इसमें अपनी पसंद के अनुसार एक या दो कटे हुए आलू भी शामिल कर सकते हैं।
कमलगट्टे की चटपटी घुघनी बनाने की आसान और सरल विधि
इस जायकेदार घुघनी को बनाने की प्रक्रिया बेहद सीधी और स्पष्ट है जिसे कोई भी आसानी से फॉलो कर सकता है। सबसे पहले ताजे कमलगट्टों को अच्छी तरह छीलकर उनके अंदर से बीज निकालने होते हैं, और फिर उनका कड़वा हिस्सा पूरी तरह हटाकर उन्हें साफ पानी से धो लेना चाहिए। इसके बाद एक कड़ाही में सरसों का तेल डालकर उसे अच्छे से गर्म करें और इन बीजों को तब तक भूनें जब तक वे हल्के सुनहरे रंग के न हो जाएं। भुने हुए कमलगट्टे इस डिश को एक अलग ही क्रंच और टेक्सचर देते हैं, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट लगते हैं।
मसालों और तड़के से बढ़ता है इस पारंपरिक डिश का असली स्वाद
बीजों को भूनने के बाद उसी बचे हुए तेल में जीरा, तेजपत्ता, लौंग और काली मिर्च का छौंक लगाया जाता है। इसके बाद कड़ाही में बारीक कटा हुआ प्याज डालकर उसे सुनहरा भूरा होने तक पकाया जाता है और साथ ही अदरक, लहसुन व मिर्च का पेस्ट भी मिलाया जाता है। अब इसमें धनिया, हल्दी, लाल मिर्च और नमक जैसे पिसे हुए मसाले डालकर धीमी आंच पर लगभग पांच से दस मिनट तक अच्छी तरह पकाना पड़ता है ताकि मसाले तेल छोड़ दें। अंत में इसमें गरम मसाला और ताजा हरा धनिया डालकर इसे सजाया जाता है, जिससे इसकी महक और स्वाद दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं। अब यह पारंपरिक कमलगट्टे की घुघनी पूरी तरह खाने के लिए तैयार है जो आपके रोज के भोजन के अनुभव को बिल्कुल बदल देगी।

















