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शरद पूर्णिमा पर इंदौर में तैयार होती है दुर्लभ चापड़ा मिठाई, औषधीय गुणों के चलते दूर-दूर से पहुंचते हैं लोगखानपान
28 अक्तू॰ 2026, 6:34 pm (1 दिन पहले)· 0

शरद पूर्णिमा पर इंदौर में तैयार होती है दुर्लभ चापड़ा मिठाई, औषधीय गुणों के चलते दूर-दूर से पहुंचते हैं लोग

इंदौर में शरद पूर्णिमा के पावन मौके पर साल में केवल एक दिन बनने वाली चापड़ा मिठाई तैयार की जाती है, जिसे रात भर ओस में रखने के बाद दूध के साथ खाने से मौसमी बीमारियों से आराम मिलता है।

मध्य प्रदेश की खानपान राजधानी कहे जाने वाले इंदौर शहर में शरद पूर्णिमा का पर्व एक बेहद अनूठी परंपरा के साथ मनाया जाता है। इस खास तिथि पर शहर के मिष्ठान निर्माता एक दुर्लभ और पारंपरिक मिष्ठान तैयार करते हैं, जिसे चापड़ा मिठाई के नाम से जाना जाता है। पूरे बारह महीनों में इस विशेष मिठाई को केवल एक बार, शरद पूर्णिमा के दिन ही पकाया जाता है। तैयारी पूरी होने के बाद सबसे पहले इसे ईश्वर को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है, जिसके बाद ही श्रद्धालु और आम नागरिक इसे प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं।

चाशनी और औषधीय मसालों का अद्भुत मेल

इस अनूठी मिठाई को तैयार करने की विधि सामान्य मिठाइयों से काफी अलग और औषधीय महत्व वाली है। इसे मुख्य रूप से शक्कर की गाढ़ी चाशनी के साथ काली मिर्च, छोटी इलायची और सौंठ के बारीक पाउडर के संतुलित मिश्रण से बनाया जाता है। बनाने की प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात इसे शरद पूर्णिमा की पूरी रात खुले आसमान के नीचे रखा जाता है, ताकि इस पर चंद्रमा की शीतल किरणों और प्राकृतिक ओस का सीधा प्रभाव पड़ सके। चांद की रोशनी और ओस के स्पर्श के बाद ही इसे खाने योग्य और औषधीय रूप से पूर्ण माना जाता है।

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स्वास्थ्य लाभ और मौसमी बीमारियों में राहत

मिष्ठान निर्माताओं और जानकारों के अनुसार चापड़ा केवल एक स्वादिष्ट पकवान नहीं है, बल्कि प्राचीन काल से इसका उपयोग एक गुणकारी औषधि के रूप में किया जाता रहा है। जब चापड़ा मिठाई को रात भर चंद्रमा के नीचे ओस में रखा जाता है, तो ओस की बूंदों के प्रभाव से यह धीरे-धीरे गलने लगती है और प्राकृतिक रूप से तरल छोड़ती है। इसके बाद जब इस मिश्रण को गर्म या सामान्य दूध के साथ मिलाकर सेवन किया जाता है, तो यह शरीर के कई विकारों को दूर करने में सहायक सिद्ध होती है। बदलते मौसम के दौरान होने वाली खांसी, कफ और सर्दी-जुकाम की समस्या में इसका सेवन अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

स्वाद और आस्था के संगम से बना आकर्षण

अपनी अत्यंत सीमित उपलब्धता और विशिष्ट निर्माण विधि के कारण इस मिठाई को लेकर लोगों में भारी उत्सुकता देखने को मिलती है। इस पारंपरिक मिठाई को खरीदने, इसका स्वाद चखने और इसके दर्शन लाभ लेने के लिए मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोग विशेष यात्रा करके इंदौर पहुंचते हैं। आज के आधुनिक दौर में भी चापड़ा मिठाई इंदौर की समृद्ध पारंपरिक खानपान शैली और सांस्कृतिक आस्था के एक मजबूत प्रतीक के तौर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

सवाल-जवाब

चापड़ा मिठाई साल में कितनी बार बनाई जाती है?
यह अनोखी मिठाई पूरे साल में सिर्फ एक बार शरद पूर्णिमा के अवसर पर बनाई जाती है।
चापड़ा मिठाई को किन-किन सामग्रियों से तैयार किया जाता है?
इसे शक्कर की चाशनी, काली मिर्च, इलायची और सौंठ के पाउडर को मिलाकर तैयार किया जाता है।
इसे खाने से पहले रात भर खुले आसमान के नीचे क्यों रखा जाता है?
शरद पूर्णिमा की रात इसे चंद्रमा की रोशनी और ओस में रखा जाता है, जिससे यह ओस में गलकर पानी छोड़ती है और औषधीय रूप ले लेती है।
इस मिठाई का सेवन किस प्रकार किया जाता है और इसके क्या फायदे हैं?
इसे दूध के साथ मिलाकर खाया जाता है, जिससे बदलते मौसम में होने वाली खांसी और सर्दी-जुकाम में राहत मिलती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 घंटे पहले

इंदौर की ये परंपरा वाकई गजब है। एक तो साल में एक ही दिन मिलती है, ऊपर से आयुर्वेद का ऐसा नुस्खा जो मौसम बदलते ही काम आ जाए।

Ravikash Gupta@ravikash·22 घंटे पहले

अर्जुन जी, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। पिछली बार जब मैं इंदौर गया था, तो मैंने भी दोस्तों के साथ ये प्रसाद खाया था, सच में बहुत सुकून मिलता है।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·23 घंटे पहले

इंदौर की ये परंपरा वाकई अनोखी है, साल में सिर्फ एक दिन मिलने वाली इस चापड़ा मिठाई का औषधीय महत्व जानकर अच्छा लगा।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·23 घंटे पहले

राजेश जी, बात तो सही है, पर क्या साल भर में सिर्फ एक ही दिन मिलने वाली इस मिठाई को घर पर बनाने की कोई कोशिश नहीं करता?

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