फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास के सबसे बड़े मुकाबले, यानी 2030 वर्ल्ड कप के फाइनल की मेज़बानी को लेकर मोरक्को और स्पेन के बीच खींचतान तेज हो गई है, और दोनों देश इसे अपने यहां कराने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
एक फाइनल, तीन मेज़बान, फैसला अब भी अटका
2030 का फीफा वर्ल्ड कप मोरक्को, पुर्तगाल और स्पेन मिलकर संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे, लेकिन फीफा ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि टूर्नामेंट का फाइनल किस देश में खेला जाएगा। यही अनिश्चितता पिछले कुछ महीनों से पर्दे के पीछे चल रही रस्साकशी की वजह बनी है, क्योंकि स्पेन और मोरक्को दोनों ही फुटबॉल के सबसे बड़े मंच को अपने यहां देखना चाहते हैं।
मोरक्को की 12 अरब डॉलर की चाल
मोरक्को ने अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए कासाब्लांका के बाहर करीब 12 अरब डॉलर की लागत से 115,000 सीटों वाला बिल्कुल नया स्टेडियम बनाना शुरू किया है। पूरा होने पर हसन द्वितीय स्टेडियम दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल स्टेडियम बन जाएगा, और इसका निर्माण अगले साल के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। मोरक्को ने इसी स्टेडियम को 2030 वर्ल्ड कप फाइनल के लिए अपनी पहली पसंद के तौर पर पेश किया है, जिसका सीधा मुकाबला स्पेन के दो ऐतिहासिक स्टेडियमों से होगा।
स्पेन के पास दो शानदार विकल्प
स्पेन की ओर से मैड्रिड का सैंटियागो बर्नब्यू स्टेडियम मैदान में है, जो रियल मैड्रिड का घरेलू मैदान है और बड़े नवीनीकरण के बाद अब करीब 83,000 दर्शकों की क्षमता रखता है। यह नवीनीकरण 2024 के आखिर में पूरा हुआ था। स्पेन का दूसरा विकल्प बार्सिलोना का कैंप नाउ स्टेडियम है, जिसकी क्षमता बढ़ाकर 105,000 सीटों तक ले जाने का काम चल रहा है। कैंप नाउ का कुछ हिस्सा दर्शकों के लिए खुल चुका है, लेकिन पूरा नवीनीकरण अब भी तय समय से पीछे चल रहा है।
स्पेन ने चली पहली चाल
यह जंग जनवरी में तब शुरू हुई जब स्पेनिश फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष रफाएल लूजान ने पत्रकारों से कहा कि 2030 वर्ल्ड कप का फाइनल स्पेन में ही होगा। उन्होंने दलील दी कि बड़े टूर्नामेंट आयोजित करने का स्पेन का लंबा और भरोसेमंद अनुभव उसे स्वाभाविक दावेदार बनाता है। साथ ही उन्होंने मोरक्को में हुए अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के दौरान सामने आई आयोजन संबंधी खामियों का हवाला देकर स्पेन के पक्ष को और मजबूत करने की कोशिश की। लूजान ने कहा, "स्पेन ही 2030 वर्ल्ड कप का नेतृत्व करेगा और वहीं टूर्नामेंट का फाइनल खेला जाएगा।" उन्होंने आगे यह भी कहा कि अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के कुछ मुकाबलों के दौरान बने हालात ने विश्व फुटबॉल की छवि को नुकसान पहुंचाया है।
जिस घटना का हवाला बार-बार दे रहा स्पेन
लूजान का इशारा जनवरी में रबात में सेनेगल और मोरक्को के बीच हुए अफ्रीका कप ऑफ नेशंस मुकाबले की ओर था, जहां दर्शकों की अफरातफरी, बॉल बॉयज़ को लेकर विवाद और खिलाड़ियों के मैदान से थोड़ी देर के लिए हटने जैसी घटनाएं हुई थीं। यह मैच हाल ही में बने 69,500 दर्शक क्षमता वाले प्रिंस मौले अब्दुल्ला स्टेडियम में खेला गया था।
मोरक्को चुप, कहा अभी कुछ तय नहीं
मोरक्को ने स्पेन के इन दावों पर खुलकर कोई जवाब नहीं दिया है। रॉयल मोरक्कन फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष फूजी लेकजा का कहना है कि फाइनल की मेज़बानी का फैसला फीफा और तीनों मेज़बान देश आपस में मिलकर ही करेंगे, और अभी तक किसी स्टेडियम को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। सरकारी टेलीविजन से बातचीत में उन्होंने कहा, "मुकाबलों के बंटवारे को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे सभी फैसले पूरी तरह तीनों मेज़बान देशों और फीफा के बीच आपसी सलाह मशविरे से ही होंगे। अफ्रीकी फुटबॉल जगत के शीर्ष अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मोरक्को पर्दे के पीछे फाइनल को कासाब्लांका लाने के लिए सक्रिय रूप से लॉबीइंग कर रहा है, और आने वाले महीनों में यह होड़ और तेज होने की उम्मीद है।
मोरक्को जीता तो क्या बदलेगा
अगर मोरक्को यह होड़ जीत जाता है, तो कासाब्लांका वर्ल्ड कप फाइनल की मेज़बानी करने वाला अफ्रीका का महज दूसरा शहर बन जाएगा। इससे पहले यह मौका 2010 में जोहानिसबर्ग को मिला था, जिस टूर्नामेंट में स्पेन ने अपना एकमात्र वर्ल्ड कप खिताब जीता था। वहीं स्पेन ने आखिरी बार 1982 में वर्ल्ड कप फाइनल की मेज़बानी की थी, जब इटली ने मैड्रिड के सैंटियागो बर्नब्यू स्टेडियम में वेस्ट जर्मनी को 3-1 से हराया था।


















