राजनाथ सिंह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को दी जन्मदिन की शुभकामनाएंमूलांक 7 राशिफल 19 जुलाई 2026: केतु का असर, आज हर काम में जांच-परख जरूरीमानसून में गेंदा की बंपर पैदावार के लिए अपनाएं ये तरीका, एक्सपर्ट ने बताई सही किस्म और देखभाल की टिप्सजीवन के हर संकट में साथ नहीं छोड़ते ये तीन साथी, चाणक्य नीति में मिला राज़शादी तोड़ने से इनकार करने पर आशिक ने वैष्णवी की चाकू से हत्या की, कुछ घंटों बाद खुद फांसी लगाईदेशां के 14 साल के सफर के बाद अब फ्रांस की कमान संभालेंगे जिनेदिन जिदानरायबरेली में धान की रोपाई के बीच भूरा फुदका कीट का हमला, समय पर सतर्क न हुए तो होगा भारी नुकसानमूलांक 1 राशिफल 19 जुलाई 2026: रिश्तों में खुलापन जरूरी, ऑफिस में मिल सकती है नई जिम्मेदारीऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार राजौरी में पाकिस्तान ने तोड़ा संघर्षविराम, भारतीय जवानों ने घुसपैठ नाकाम कीमूलांक 4 राशिफल 19 जुलाई 2026: स्पष्ट बात रखें, गलतफहमी से बचें
विंध्याचल की तलहटी में वह मंदिर, जहां अर्जुन ने मांगा था विजय का वरदानधर्म
5 घंटे पहले· 1

विंध्याचल की तलहटी में वह मंदिर, जहां अर्जुन ने मांगा था विजय का वरदान

गुप्त नवरात्रि में खरगोन के आशापुर धाम में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां मान्यता है कि महाभारत काल में अर्जुन ने तपस्या कर मां आशापुरी से युद्ध जीतने का आशीर्वाद पाया था।

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में विंध्याचल पर्वत की तलहटी पर बसा आशापुर धाम इन दिनों गुप्त नवरात्रि की रौनक से जगमगा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ एक शक्तिपीठ भर नहीं, बल्कि आस्था और इतिहास का संगम है, क्योंकि यहां की मां आशापुरी को महाभारत काल से भी जोड़कर देखा जाता है। कहा जाता है कि पांडव पुत्र अर्जुन ने इसी जगह तपस्या करके देवी का वरदान पाया था, और यही कहानी हर साल हजारों भक्तों को यहां खींच लाती है।

सुबह से लग रही श्रद्धालुओं की कतार

गुप्त नवरात्रि शुरू होते ही मंदिर परिसर सुबह से ही भक्तों से भर जाता है। मध्य प्रदेश के अलावा आसपास के कई राज्यों से भी लोग यहां मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। मंदिर में इन दिनों विशेष पूजा, अभिषेक और श्रृंगार के साथ कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान लगातार चल रहे हैं, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आता है।

ये भी पढ़ें

ध्वज पूजन से नवचंडी यज्ञ तक

पुजारियों के मुताबिक इस बार गुप्त नवरात्रि की शुरुआत ध्वज पूजन, मंडप और घट स्थापना तथा विशेष अभिषेक की रस्मों के साथ हुई। इन रस्मों के तुरंत बाद नवचंडी यज्ञ का आयोजन शुरू कर दिया गया, जो हर दिन सुबह 8:30 बजे से लेकर शाम 5 बजे होने वाली आरती तक लगातार जारी रहता है। बड़ी तादाद में भक्त रोजाना इस यज्ञ में शामिल होकर मां का आशीर्वाद हासिल कर रहे हैं।

द्वापर युग से जुड़ी मंदिर की कहानी

त्रिलोक यादव, जो मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हैं, उनके मुताबिक आशापुर गांव का यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है। मान्यता है कि मां आशापुरी द्वापर युग से ही यहां विराजमान हैं, हालांकि शुरुआती दौर में वे एक छोटी सी गुफा में विराजती थीं। लगभग 800 साल पहले, यानी 12वीं सदी में, मंदिर का पहली बार जीर्णोद्धार कराया गया था, जबकि साल 2012 में गांव वालों के सहयोग से इसका भव्य पुनर्निर्माण किया गया। इसी पुनर्निर्माण के बाद से यह स्थान क्षेत्र के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में गिना जाने लगा।

अर्जुन की तपस्या और पांडवों से रिश्ता

प्रचलित कथाओं के मुताबिक महाभारत के दौर में अर्जुन ने इसी जगह घोर तपस्या करके मां आशापुरी से युद्ध जीतने का वरदान हासिल किया था, और इसी वजह से इस मंदिर की गिनती पांडवों से जुड़े तीर्थ स्थलों में होती है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि प्रसिद्ध योद्धा आल्हा और ऊदल ने भी कभी इसी स्थान पर तप किया था। श्रद्धालुओं का गहरा विश्वास है कि जो कोई भी सच्चे दिल से मां के दरबार में हाजिरी लगाता है, उसकी हर मनोकामना जरूर पूरी होती है।

राजघरानों की कुलदेवी के रूप में पूजा

राजा मांधाता और पृथ्वीराज चौहान के वंशजों में आज भी मां आशापुरी को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है, और ये परिवार समय-समय पर यहां आकर दर्शन-पूजन करते हैं। इतना ही नहीं, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे कई राज्यों में फैले विभिन्न गोत्रों के परिवार भी मां आशापुरी को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। यही वजह है कि घर में शादी-ब्याह या कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले ये परिवार यहां आकर मां का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते।

सवाल-जवाब

आशापुर धाम मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के आशापुर गांव में विंध्याचल पर्वत की तलहटी में स्थित है।
मान्यता के अनुसार यहां किसने तपस्या की थी?
महाभारत काल में पांडव पुत्र अर्जुन ने इसी स्थान पर तपस्या कर मां आशापुरी से युद्ध में विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया था।
मंदिर का पहला जीर्णोद्धार कब हुआ था?
करीब 800 वर्ष पहले, 12वीं शताब्दी में मंदिर का पहला जीर्णोद्धार कराया गया था।
मंदिर का हालिया भव्य पुनर्निर्माण कब हुआ?
वर्ष 2012 में जनसहयोग से मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण किया गया था।
गुप्त नवरात्रि में मंदिर में कौन से अनुष्ठान हो रहे हैं?
ध्वज पूजन, मंडप स्थापना, घट स्थापना और अभिषेक के साथ शुरुआत हुई और अब प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे आरती तक नवचंडी यज्ञ चल रहा है।
मां आशापुरी को किसकी कुलदेवी माना जाता है?
मां आशापुरी को राजा मांधाता और पृथ्वीराज चौहान की कुलदेवी माना जाता है।
किन राज्यों के लोग मां आशापुरी को अपनी कुलदेवी मानते हैं?
मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों के कई गोत्रों के लोग उन्हें अपनी कुलदेवी मानते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR