बॉलीवुड में सलीम खान के सबसे छोटे बेटे सोहेल खान का नाम अक्सर उनके बड़े भाई सलमान खान की चमक तले दब जाता रहा है, लेकिन कुणाल खेमू के रियलिटी शो 'अलायंस' में सोहेल ने अपने बचपन के एक बेहद निजी और तकलीफ़देह अनुभव को सबके सामने रखकर एक बार फिर सुर्खियां बटोर लीं. यह पहला मौका नहीं है जब सोहेल की निजी जिंदगी चर्चा में आई हो, लेकिन बचपन के इस सदमे की बात ने फैंस को भावुक कर दिया.
डायरेक्टर की कुर्सी से हुई कामयाब शुरुआत
एक्टिंग में उतरने से बहुत पहले सोहेल खान ने कैमरे के पीछे रहकर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई थी. 1997 में रिलीज़ हुई एक्शन थ्रिलर 'औज़ार' उनकी बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म थी, जिसमें सलमान खान के साथ संजय कपूर और शिल्पा शेट्टी मुख्य किरदारों में नज़र आए थे. यह फिल्म कमाई के मामले में सम्मानजनक साबित हुई और इसने सोहेल को एक काबिल फिल्ममेकर के तौर पर पहचान दिला दी. इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए सोहेल ने अगले ही साल यानी 1998 में रोमांटिक ड्रामा 'प्यार किया तो डरना क्या' का निर्देशन किया. इस फिल्म की स्टारकास्ट में सलमान खान के अलावा काजोल, अरबाज़ खान और धर्मेंद्र शामिल थे. यह फिल्म उस बरस की सबसे कामयाब फिल्मों में शुमार हुई और नब्बे के दशक की आखिरी फैमिली एंटरटेनर फिल्मों में इसका नाम आज भी लिया जाता है. दो लगातार कामयाब फिल्मों की बदौलत सोहेल की गिनती एक भरोसेमंद निर्देशक में होने लगी थी और इंडस्ट्री को उनसे आगे और बड़ी फिल्मों की उम्मीद बंधने लगी थी. इसी हौसले के साथ सोहेल ने अब कैमरे के सामने आकर एक्टिंग में हाथ आज़माने का फैसला कर लिया.
एक्टर बनते ही बिखर गया जादू
साल 2002 में सोहेल खान एक्टर के रूप में सामने आए, जब वे खुद की लिखी, डायरेक्ट और प्रोड्यूस की हुई रोमांटिक कॉमेडी 'मैंने दिल तुझको दिया' में लीड रोल में दिखे. रिलीज़ से पहले फिल्म को लेकर दर्शकों में एक अलग तरह की जिज्ञासा थी, मगर पर्दे पर आने के बाद क्रिटिक्स की राय बंटी रही और कलेक्शन के मामले में फिल्म कमजोर साबित हुई. एक्टर के तौर पर सोहेल की स्क्रीन प्रजेंस को हमेशा सलमान की स्टार पावर के मुकाबले कमतर आंका गया, और यही तुलना उनकी फिल्मों के कलेक्शन पर भी असर डालती रही. इस झटके के बावजूद सोहेल ने एक्टिंग करना बंद नहीं किया और आगे चलकर 'कृष्णा कॉटेज', 'आर्यन', 'सलाम-ए-इश्क़', 'हीरोज़', 'वीर' और 'ट्यूबलाइट' जैसी फिल्मों का हिस्सा बने. मुश्किल यह रही कि जिस स्तर की स्टारडम उनके भाई सलमान को मिली, वह मुकाम सोहेल बतौर एक्टर कभी छू नहीं पाए और उनकी हर फिल्म का हिसाब-किताब सलमान की सफलता से ही होता रहा.
प्रोड्यूसर के तौर पर भी नहीं चला दांव
एक्टिंग के अलावा सोहेल खान प्रोड्यूसर और फिल्ममेकर के तौर पर भी इंडस्ट्री में सक्रिय बने रहे, लेकिन उनकी प्रोडक्शन वाली फिल्मों को भी वह कामयाबी नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी. निर्देशन में मिली शुरुआती दो हिट फिल्मों के बाद उनका करियर ग्राफ धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकता गया, चाहे वह डायरेक्टर की कुर्सी हो, एक्टर की भूमिका हो या फिर प्रोड्यूसर की जिम्मेदारी. इंडस्ट्री और फैंस के बीच सोहेल की तुलना हमेशा सलमान खान से होती रही, जिसने उनके करियर पर एक अलग तरह का दबाव भी बनाए रखा.
सीमा सजदेह से शादी, दो बेटे और आखिर में तलाक
निजी जिंदगी की बात करें तो सोहेल खान ने लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहने के बाद 1998 में फैशन डिजाइनर और एंटरप्रेन्योर सीमा सजदेह से शादी रचाई. दिलचस्प यह है कि दोनों ने कानूनी तौर पर शादी रजिस्टर कराने से पहले ही भागकर शादी कर ली थी. इस जोड़े के घर 2000 में पहला बेटा निर्वाण खान पैदा हुआ. इसके करीब एक दशक बाद 2011 में सरोगेसी के जरिए दोनों दूसरे बेटे योहान खान के माता-पिता बने. शादी के करीब 24 साल पूरे होने पर 2022 में सोहेल और सीमा ने आपसी सहमति से तलाक के लिए अर्जी दाखिल की और अलग हो गए. तलाक के बाद भी दोनों ने अपने दोनों बेटों की परवरिश साथ मिलकर करने का फैसला बरकरार रखा और परिवार में सौहार्दपूर्ण रिश्ते बनाए रखने की बात कई मौकों पर सामने आती रही है.
'अलायंस' शो में सामने आया बचपन का सदमा
हाल ही में सोहेल खान और सीमा सजदेह रियलिटी शो 'अलायंस' में एक साथ नज़र आए, जहां दोनों ने अपने रिश्ते, बच्चों की परवरिश के तरीके और तलाक के बाद की जिंदगी पर खुलकर बातचीत की. इसी बातचीत के दौरान सोहेल ने बचपन के एक बेहद निजी सदमे का जिक्र छेड़ा, जिसने उन्हें फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया. सोहेल खान ने कहा, "जब मैं छोटा था तो किसी ने मेरा यौन उत्पीड़न किया था और मैंने सालों तक इस बात को अपने अंदर दबाए रखा." उन्होंने आगे बताया कि वयस्क होने पर उन्होंने यह बात अपने पिता सलीम खान को बताई, तो पिता ने हैरानी जताई कि उन्होंने इतने बरसों तक यह दर्द अकेले क्यों सहा. सोहेल के मुताबिक इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी, फिर भी उन्हें यह बात बताने में बरसों तक शर्म महसूस होती रही थी. यही वजह है कि अब वे अपने बच्चों से हमेशा यह कहते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए, वे हर बात उनसे खुलकर साझा करें, ताकि कोई भी दर्द बरसों तक दबा हुआ न रह जाए.




















