ऐप्पल की आगामी सितंबर इवेंट को लेकर तकनीकी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कंपनी ने अपनी इस विशेष पेशकश की घोषणा पिछले हफ्ते की थी जिसका शीर्षक सरप्राइज एंड शाइन रखा गया था। प्रशांत समय के अनुसार यह कार्यक्रम 9 सितंबर को सुबह 10 बजे यानी पूर्वी समय के अनुसार दोपहर 1 बजे आयोजित किया जाएगा। जो दर्शक इस लाइव प्रसारण से जुड़ेंगे, वे आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स के अनावरण की उम्मीद कर सकते हैं। इसके साथ ही विश्लेषकों के कयासों और पुरानी अफवाहों के सच साबित होने पर पहली बार किसी फोल्डेबल ऐप्पल डिवाइस की झलक भी देखने को मिल सकती है।
रणनीति में बदलाव और बजट मॉडल का भविष्य
बाजार में चल रही चर्चाओं और लीक्स के आधार पर कंपनी इस बार अपने महंगे प्रीमियम उत्पादों पर पूरा ध्यान केंद्रित करने जा रही है। ऐसी संभावना है कि मानक बेस मॉडल आईफोन 18 की घोषणा को फिलहाल टाल दिया जाए। इस किफायती मॉडल के साल 2027 के वसंत ऋतु में बाजार में उतरने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही एक आईफोन 18ई और दूसरी पीढ़ी का आईफोन एयर भी पेश किया जा सकता है। रणनीतिक रूप से यह बदलाव मेमोरी की चल रही कमी के कारण हो सकता है जिसने तकनीकी उपकरणों के निर्माण को महंगा बना दिया है। इस आर्थिक दबाव से ऐप्पल भी अछूता नहीं रहा है। जून के महीने में टिम कुक ने इस बात को स्वीकार किया था कि उत्पादन लागत को संतुलित करने के लिए कंपनी को अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ानी होंगी।
राजस्व संतुलन और प्रीमियम उत्पादों पर जोर
आइडीडीसी की डेटा और एनालिटिक्स मामलों की सीनियर डायरेक्टर नबिला पोपल का मानना है कि कंपनी शरद ऋतु में तीन प्रीमियम मॉडल पेश करने की योजना बना रही है। उनके अनुसार मध्यम और बजट श्रेणी के उपकरण बाद में वसंत के मौसम में उतारे जाएंगे। पोपल का कहना है कि यह एक बेहतरीन कारोबारी फैसला है क्योंकि इससे कंपनी अपने राजस्व को साल की दो अलग-अलग तिमाहियों में बांट सकती है। आमतौर पर चौथी तिमाही काफी मजबूत होती है जबकि अगली साल की शुरुआती वसंत तिमाही कमजोर मानी जाती है। इसके अलावा ऐप्पल का पोर्टफोलियो काफी बड़ा हो चुका है और प्रो तथा प्रो मैक्स सीरीज उन ग्राहकों को अधिक आकर्षित करती है जो नया फोन खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार रहते हैं।
बढ़ती लागत और प्रीमियम उपकरणों का चलन
जब मोबाइल कलपुर्जे महंगे हो जाते हैं तो कंपनियों के पास तीन ही रास्ते बचते हैं। या तो वे खुद उस बढ़े हुए खर्च को सहन करें, या फिर ग्राहकों पर कीमतें डाल दें, या फिर ऐप्पल की तरह इस स्थिति का पूरा लाभ उठाएं। सस्ते मॉडलों के लॉन्च को आगे खिसकाकर कंपनी अपने बड़े और महंगे उत्पादों के प्रति बाजार में उत्साह पैदा कर सकती है। जब ग्राहक इन प्रीमियम फोनों के लिए अधिक भुगतान करेंगे तो यह उतना अजीब नहीं लगेगा जितना कि किसी सस्ते फोन की कीमत अचानक बढ़ा देना होता है। पोपल इसे उपकरणों के प्रीमियमकरण की प्रक्रिया मानती है जिसके जरिए कंपनी अपने महंगे उत्पादों के प्रति उत्सुकता बढ़ाना चाहती है।
ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन का दृष्टिकोण
ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के मुख्य अर्थशास्त्री शॉन डुब्रावाक का मानना है कि इस तरह की बढ़ती कीमतों का असर अंततः उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। उनका कहना है कि तकनीक के क्षेत्र में मिलने वाले घटते दामों के लाभ हमेशा से ग्राहकों तक पहुंचते रहे हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि इस बार भी ऐसा ही होगा। हालांकि बाजारों को इस स्थिति में पूरी तरह से ढलने में थोड़ा वक्त लग सकता है। इसका मतलब यह है कि आधुनिक तकनीक की शुरुआत हमेशा ऊंचे दामों से होती है लेकिन बाद में उत्पादन क्षमता और आपसी प्रतिस्पर्धा के कारण दाम खुद-ब-खुद नीचे आ जाते हैं.
फोल्डेबल फोन का बढ़ता बाजार और विकल्प
फोल्डेबल स्मार्टफोन के मामले में यह बात फिलहाल लागू होती नहीं दिख रही है क्योंकि इनके दाम पहले से कहीं ज्यादा ऊंचे चल रहे हैं। सैमसंग ने अपने साल 2026 के गैलेक्सी जेड फोल्डेबल फोन रेंज की कीमतों में इजाफा किया है। ऐसा ही रुख गूगल के नए पिक्सेल 11 प्रो फोल्ड और मोटोरोला के रेज़र 2026 मॉडल में भी देखने को मिला है। चर्चा है कि ऐप्पल का फोल्डेबल आईफोन करीब 2,000 डॉलर की भारी-भरकम कीमत के साथ आ सकता है। इन भारी खर्चों से निपटने के लिए कंपनी अब वित्तपोषण और एक्सचेंज योजनाओं का सहारा ले रही है। जुलाई के महीने में कंपनी ने एक आईफोन लीजिंग प्रोग्राम की शुरुआत की थी।
लीजिंग योजना और रिफर्बिश फोन का बढ़ता क्रेज
इस नई लीजिंग व्यवस्था के तहत लोग एक तय मासिक शुल्क देकर नए आईफोन किराए पर ले सकते हैं और नया मॉडल आने पर उसे बदल भी सकते हैं। हालांकि डिवाइस के मालिकाना हक को लेकर काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे उपयोगकर्ता अपने फोन के पूर्ण स्वामी नहीं बन पाते हैं। यह कदम कंपनी की उस बड़ी कोशिश का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने सभी उत्पादों को एक सब्सक्रिप्शन सेवा में बदलना चाहती है। पोपल का मानना है कि अधिकांश ग्राहक फोन खरीदने के लिए फाइनेंस या एक्सचेंज प्रोग्राम का ही उपयोग करते हैं और आने वाले समय में लागत कम करने के लिए ऐसी योजनाएं और आक्रामक हो सकती हैं।
सस्ते स्मार्टफोन्स के दौर का अंत
मेमोरी के संकट और लगातार बढ़ रही कीमतों के कारण अब तमाम स्मार्टफोन तैयार करना महंगा होता जा रहा है। कंपनियों के लिए कम कीमत वाले फोन तैयार करना अब उतना फायदेमंद नहीं रह गया है और प्रमुख ब्रांड्स ने इन्हें बनाना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा मानना शुरू कर दिया है। इसके विपरीत इस्तेमाल किए हुए और रिफर्बिश उपकरणों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। नए फोनों की बिक्री धीमी पड़ने के बावजूद पुराने उपकरणों के बाजार में तेजी बनी हुई है। लोग पैसे बचाने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को चुनने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। नबिला पोपल का स्पष्ट तौर पर मानना है कि अब सस्ते स्मार्टफोन्स का दौर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है।


















