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उत्तराखंड के विकास उनियाल की प्रेरणादायक कहानी, मां को खोने के बाद शुरू किया केमिकल-मुक्त अगरबत्ती का कारोबारउत्तराखंड
5 सित॰ 2026, 10:18 pm (47 मिनट पहले)· 2

उत्तराखंड के विकास उनियाल की प्रेरणादायक कहानी, मां को खोने के बाद शुरू किया केमिकल-मुक्त अगरबत्ती का कारोबार

देहरादून के विकास उनियाल ने जहरीले धुएं से मां की मौत के बाद केमिकल-फ्री अगरबत्ती बनाने का कारोबार शुरू किया। आज उनका यह स्टार्टअप विदेशों तक अपनी पहुंच बना चुका है और लोगों को सुरक्षित विकल्प दे रहा है।

उत्तराखंड के देहरादून शहर के रहने वाले विकास उनियाल ने एक व्यक्तिगत त्रासदी को बड़े सामाजिक बदलाव का जरिया बना दिया। उनकी मां को धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान जलाई जाने वाली पारंपरिक अगरबत्तियों और धूपबत्तियों के लगातार संपर्क में रहने के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा था। कोरोना काल के दौरान उनकी तबीयत अचानक काफी बिगड़ गई और जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि वह चौथे स्टेज के ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं। खानपान या जीवनशैली से जुड़ी कोई अन्य वजह न मिलने पर चिकित्सकों ने उनके दैनिक जीवन और घर के वातावरण की गहन पड़ताल की। उस दौरान यह बात सामने आई कि पूजा-पाठ के समय घंटों तक घर में रहने वाले अगरबत्ती के जहरीले धुएं से सांस लेने में जो रसायन शरीर के अंदर गए, उन्होंने खतरनाक बीमारियों को बढ़ावा दिया। तमाम प्रयासों के बावजूद विकास अपनी मां की जान नहीं बचा सके और इस आघात ने उनकी जिंदगी की दिशा पूरी तरह बदल दी।

कानपुर से ली ट्रेनिंग और रखी फर्म की नींव

मां को खोने के बाद इस युवा ने हार मानने के बजाय बाजार में बिकने वाले उत्पादों की असलियत जानने के लिए खुद शोध करने का फैसला किया। अपनी पड़ताल के दौरान उन्हें पता चला कि आम दुकानों पर मिलने वाली अधिकांश अगरबत्तियां खतरनाक रसायनों और कार्बन मोनोऑक्साइड से भरपूर होती हैं। दूसरों के घरों को इस छिपे हुए खतरे से बचाने का संकल्प लेते हुए उन्होंने पूरी तरह से जैविक और प्राकृतिक सामग्री से बनी अगरबत्तियां तैयार करने की ठानी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर के साथ-साथ अपने गृह नगर देहरादून के विशेषज्ञों से विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपनी दिवंगत मां की स्मृति को समर्पित करते हुए 'भावना धूप' नाम से एक लघु उद्यम की स्थापना की।

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स्थानीय लोगों को रोजगार और घर-घर पहुंच

इस सफर की शुरुआत में उन्होंने अपने साथ लगभग १५ स्थानीय नागरिकों को जोड़कर काम आगे बढ़ाया। उनका मूल उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं था, बल्कि ग्राहकों को हानिकारक केमिकल से मुक्त शुद्ध और सुरक्षित उत्पाद मुहैया कराना था ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े। आज देहरादून में स्थित उनके विनिर्माण संयंत्र में बनने वाली 'भावना अगरबत्ती और धूप' न सिर्फ उत्तराखंड के स्थानीय बाजारों में लोकप्रिय हो चुकी है, बल्कि राज्य के प्रत्येक घर में अपनी एक विशेष जगह बना चुकी है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते ग्राहक अब तेजी से इन रासायनिक तत्वों से रहित उत्पादों को अपना रहे हैं।

विदेशों तक फैला कारोबार और किफायती दाम

विकास उनियाल की लगन और अपनी मां के प्रति उनकी सच्ची श्रद्धांजलि आज वैश्विक स्तर पर नए मुकाम हासिल कर रही है। उनके द्वारा तैयार किए गए ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग अब केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में वह अपने इस उद्यम के तहत इंडोनेशिया, चीन और नीदरलैंड जैसे देशों में भी अपने सामान का निर्यात कर रहे हैं। आम ग्राहकों की वित्तीय स्थिति का ध्यान रखते हुए उन्होंने अपने उत्पादों को बेहद किफायती दामों पर बाजार में उतारा है, जहां ये पैकेट ३० रुपये और १०० रुपये की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध हैं। यह पहल आज एक तरफ जहां हजारों परिवारों को जहरीले धुएं से सुरक्षित रख रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर कई लोगों के लिए आजीविका का बड़ा जरिया भी बन गई है.

सवाल-जवाब

विकास उनियाल कौन हैं?
विकास उनियाल देहरादून के रहने वाले एक उद्यमी हैं जिन्होंने अपनी मां के निधन के बाद ऑर्गेनिक अगरबत्ती का कारोबार शुरू किया।
विकास की मां की तबीयत क्यों बिगड़ी थी?
पारंपरिक केमिकल युक्त अगरबत्तियों और धूप के धुएं को लंबे समय तक सांस के जरिए लेने के कारण उनकी सेहत खराब हुई थी।
उन्होंने बिजनेस की ट्रेनिंग कहां से ली थी?
विकास ने इस काम के लिए लखनऊ, कानपुर और देहरादून से बाकायदा प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
उनके स्टार्टअप का क्या नाम है?
उन्होंने अपनी फर्म का नाम 'भावना धूप' रखा है, जो देहरादून में स्थित है।
उनके उत्पाद किन देशों में एक्सपोर्ट होते हैं?
उनके ऑर्गेनिक उत्पाद वर्तमान में इंडोनेशिया, चीन और नीदरलैंड जैसे देशों में भेजे जाते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 मिनट पहले

यह खबर सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा के एक गंभीर और अनछुए पहलू को उजागर करती है। व्यावसायिक उत्पादों में हानिकारक रसायनों का नियमन और जांच आवश्यक है, ताकि इस तरह के जोखिमों से आम जनता को बचाया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·28 मिनट पहले

करन मल्होत्रा की बात को आगे बढ़ाते हुए यह समझना होगा कि पारंपरिक पूजा सामग्रियों में छिपे इन रासायनिक खतरों का दायरा सिर्फ एक घर तक सीमित नहीं है। जब इस तरह के उत्पाद बड़े पैमाने पर बिना किसी कड़े मानक के बाजार में बिकते हैं, तो यह पूरे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक साइलेंट किलर बन जाते हैं। विकास उनियाल की यह पहल दिखाती है कि कैसे व्यक्तिगत त्रासदी से उपजा जन-जागरूकता का यह मॉडल अब नीति निर्माताओं के लिए भी एक बड़ा सबक है। अगर ऐसे घरेलू और दैनिक उपयोग वाले उत्पादों पर गुणवत्ता नियंत्रण और अनिवार्य मानकीकरण लागू कर दिया जाए, तो न केवल अनगिनत जिंदगियां बचाई जा सकती हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर खड़े हो रहे सुरक्षित स्टार्टअप्स को भी एक मजबूत और पारदर्शी व्यापारिक ढांचा मिल सकता है।

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