सीआरपीएफ में डिप्टी कमांडेंट के पद पर तैनात मनोज कुमार यादव इस हफ्ते टीवी के मशहूर क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति के 18वें सीजन में हॉट सीट पर बैठे नजर आए और अपनी सूझबूझ से दर्शकों का दिल जीत लिया। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से ताल्लुक रखने वाले मनोज फिलहाल हरियाणा के गुरुग्राम स्थित सीआरपीएफ इंटेलिजेंस स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
50 लाख रुपये तक का सफर
शो में मनोज ने अपनी सभी लाइफलाइन का सहारा लेते हुए लगातार 14 सवालों के सही जवाब दिए और इस तरह 50 लाख रुपये की बड़ी रकम अपने नाम कर ली। इस पूरे सफर के दौरान उन्होंने मेजबान अमिताभ बच्चन से अपनी निजी जिंदगी की कई बातें साझा कीं और ड्यूटी के दौरान पेश आए कुछ रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसों का भी जिक्र किया।
1 करोड़ रुपये वाले सवाल ने बढ़ाई मुश्किल
50 लाख रुपये की रकम जीतने के बाद बारी आई 1 करोड़ रुपये वाले 15वें सवाल की। अमिताभ बच्चन ने पूछा कि किस खोजकर्ता और अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को उस जलडमरूमध्य का नाम रखने का श्रेय जाता है, जिसके नाम पर आगे चलकर मशहूर गोल्डन गेट ब्रिज बना। चार विकल्प दिए गए थे, जेम्स ब्लेन, जॉन फ्रेमोंट, विनफील्ड स्कॉट और लीलैंड स्टैनफोर्ड। मनोज को इस सवाल का भरोसेमंद जवाब नहीं सूझा, इसलिए उन्होंने जोखिम मोल लेने के बजाय जीती हुई 50 लाख रुपये की रकम के साथ ही खेल को यहीं समेटने का समझदारी भरा रास्ता चुना।
गेम से बाहर होने के बाद निकला अंदाजा भी गलत
क्विट करने के बाद अमिताभ बच्चन के आग्रह पर मनोज ने अपनी तरफ से एक अंदाजा भी लगाया और विनफील्ड स्कॉट का नाम लिया, लेकिन यह जवाब सही साबित नहीं हुआ। असल में सही जवाब जॉन फ्रेमोंट था। जॉन सी फ्रेमोंट साल 1856 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार रह चुके थे और उन्होंने ही 1846 में सैन फ्रांसिस्को की इस जलसंधि को गोल्डन गेट नाम दिया था, क्योंकि यह जगह उन्हें इस्तांबुल के गोल्डन हॉर्न बंदरगाह की याद दिलाती थी। इसी जगह पर बरसों बाद 1937 में ऐतिहासिक गोल्डन गेट ब्रिज बनकर तैयार हुआ।
कोबरा बटालियन की सर्वाइवल ट्रेनिंग, सांप तक बन जाते हैं भोजन
बातचीत के दौरान अमिताभ बच्चन ने कोबरा बटालियन में दी जाने वाली सर्वाइवल ट्रेनिंग को लेकर भी सवाल किया। मनोज ने समझाया कि घने जंगलों में विपरीत हालात के बीच जिंदा बचे रहने के लिए जवानों को बेहद कठोर ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई बार हालात इतने चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं कि जवानों को अपनी भूख मिटाने के लिए सांप जैसे जीव भी खाने पड़ जाते हैं। दरअसल यह पूरी कवायद ट्रेनिंग का ही अहम हिस्सा है, जिसका मकसद जवानों को इस काबिल बनाना है कि जरूरत पड़ने पर वे बिना किसी खाने पीने के इंतजाम के भी युद्धक्षेत्र में डटे रह सकें।
झारखंड के जंगल में मुठभेड़, आंख में धंसा गोली का टुकड़ा
मनोज ने शो में झारखंड के घने जंगलों में हुई एक जानलेवा मुठभेड़ का किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि उनकी टुकड़ी आम नागरिक गाड़ियों की आड़ में छिपकर दुश्मनों के अड्डे तक पहुंची थी। जैसे ही उन्होंने विरोधियों को आत्मसमर्पण करने को कहा, दूसरी तरफ से लगातार गोलीबारी शुरू हो गई। इसी मुठभेड़ के दौरान गोली का एक टुकड़ा मनोज की दाईं आंख के रेटिना में जा धंसा। हादसा इतना गंभीर था कि इससे उनकी आंख की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती थी। मनोज ने कहा कि देश की सेवा में इस तरह की चोट झेलना उनके लिए किसी गर्व से कम नहीं है।


















