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दिल्ली के एसआरसीसी में पीएम मोदी ने बदलाव के विरोधियों को दिया 'नाराज़ फूफा' का तंजभारत
5 सित॰ 2026, 10:22 pm (28 मिनट पहले)· 2

दिल्ली के एसआरसीसी में पीएम मोदी ने बदलाव के विरोधियों को दिया 'नाराज़ फूफा' का तंज

श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास परियोजनाओं का विरोध करने वालों को मजाकिया अंदाज में 'नाराज़ फूफा' बताया और स्टैचू, हाई-स्पीड ट्रेन, यूपीआई तथा नए संसद भवन का उदाहरण दिया.

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी एसआरसीसी के छात्रों के बीच पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में देश की तरक्की, युवाओं की भूमिका और बदलाव से चिढ़ने वाले लोगों पर खुलकर बात रखी. भाषण के दौरान उन्होंने विकास कार्यों में अड़ंगा लगाने वालों को एक दिलचस्प नाम दे डाला, 'नाराज़ फूफा'.

कैंपस की यादें और एसआरसीसी का माहौल

मोदी ने कहा कि आजकल छात्रों की दिनचर्या पूरी तरह 'एसआरसीसी मोड' में ढली हुई है. कैंटीन में चाय की चुस्कियों के बीच दोस्तों के साथ लंबी गपशप, कोल्ड कॉफी की मेज पर घंटों चलने वाली बहसें, परीक्षा नजदीक आते ही नोट्स जुटाने और प्रिंटआउट निकलवाने के लिए मची भागदौड़, ये सारे लम्हे आगे चलकर जिंदगी भर की खूबसूरत यादें बन जाते हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि क्रॉसरोड्स और बिजनेस कॉन्क्लेव जैसे बड़े आयोजनों में छात्रों की मेहनत भी उनकी कॉलेज जिंदगी का एक अहम हिस्सा रहती है. लेकिन जैसे ही ये छात्र कैंपस की चारदीवारी से बाहर कदम रखेंगे, उनका सामना एक बिल्कुल अलग और चुनौतीपूर्ण दुनिया से होगा, जहां हर कदम पर नए तरह के लोग मिलेंगे.

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दो तरह के लोग, दो तरह की सोच

प्रधानमंत्री ने समझाया कि असली दुनिया में छात्रों को हर तरह के इंसान मिलेंगे. एक तबका ऐसा होता है, जो अपनी सकारात्मक सोच और मेहनत से समाज की ऊर्जा को देश की ताकत में बदलने में जुटा रहता है. वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें कोई भी नई पहल शुरू होते ही उसका विरोध करने की आदत सी पड़ जाती है. इन्हीं लोगों के लिए मोदी ने मजाकिया लहजे में 'नाराज़ फूफा' शब्द गढ़ा और कहा कि इनका पसंदीदा शगल हर चीज पर ऐतराज जताना है. उनका तकिया-कलाम भी एक ही रहता है, "इसकी जरूरत क्या है?"

स्टैचू से लेकर संसद भवन तक, हर योजना पर सवाल

अपनी बात को पुख्ता करने के लिए प्रधानमंत्री ने कई बड़ी मिसालें गिनाईं. उन्होंने बताया कि जब देश में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा खड़ी करने की योजना बनी थी, तब इन्हीं आलोचकों ने उसकी उपयोगिता पर सवाल दागे थे. इसके कुछ समय बाद हाई-स्पीड ट्रेन का प्रोजेक्ट सामने आया तो भी यही पुराना सवाल दोहराया गया. डिजिटल लेनदेन को आसान बनाने वाली यूपीआई व्यवस्था पर काम शुरू हुआ, तब भी कुछ लोगों ने इसकी जरूरत पर उंगली उठाई. यहां तक कि नए संसद भवन के निर्माण का ऐलान होते ही उसकी आवश्यकता को लेकर भी हंगामा खड़ा किया गया.

शहीदों के स्मारक को भी नहीं बख्शा

मोदी ने आगे कहा कि देश की रक्षा में अपनी जान न्योछावर करने वाले जवानों और सैन्य नायकों की स्मृति में जब राष्ट्रीय युद्ध स्मारक तैयार किया गया, तब भी विरोधियों ने ठीक वही पुराना सवाल दोहरा दिया. प्रधानमंत्री के मुताबिक भारत में ऐसे 'फूफाओं' की कोई कमी नहीं है, फिर भी जो काम देश के हित में जरूरी है, उसे पूरा करने से भारत को कोई ताकत नहीं रोक सकती. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आलोचना चाहे जितनी भी हो, राष्ट्रहित के फैसलों पर देश पीछे नहीं हटता.

अब कुछ ही सालों में पूरे हो रहे बड़े काम

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि आज भारत बिल्कुल नए तेवर और रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि जो बड़ी परियोजनाएं पहले पूरी होने में दशकों लग जाया करती थीं, वे अब चंद वर्षों के भीतर ही साकार होती दिख रही हैं. मोदी ने यह भी कहा कि देश लगातार अपने संकल्पों को सिद्धि में बदलने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे इसी सकारात्मक सोच को अपनाकर देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, क्योंकि युवाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना यह यात्रा अधूरी रहेगी.

सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भाषण कहां दिया?
यह भाषण उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी एसआरसीसी में छात्रों को संबोधित करते हुए दिया.
'नाराज़ फूफा' शब्द से मोदी का क्या मतलब था?
उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जो हर नई विकास परियोजना का शुरुआत में ही विरोध करने लगते हैं और पूछते हैं कि इसकी जरूरत क्या है.
प्रधानमंत्री ने कौन-कौन सी परियोजनाओं का उदाहरण दिया?
उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, हाई-स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट, यूपीआई डिजिटल भुगतान व्यवस्था, नए संसद भवन और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का जिक्र किया.
प्रधानमंत्री ने छात्रों से क्या अपील की?
उन्होंने छात्रों से सकारात्मक सोच अपनाकर देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की.
एसआरसीसी मोड से मोदी का क्या आशय था?
उनका मतलब कॉलेज जीवन के उन पलों से था, जैसे दोस्तों के साथ चाय-चर्चा और परीक्षा के दौरान नोट्स जुटाने की भागदौड़, जो यादगार बन जाते हैं.
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 मिनट पहले

प्रधानमंत्री का यह संबोधन राजनीतिक विमर्श में व्यंग्यात्मक शैली के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करता है। नीतिगत आलोचनाओं को पारिवारिक मुहावरों से जोड़कर देखना सार्वजनिक बहस की दिशा को बदलता है। ऐसे बयानों से विकास योजनाओं पर तार्किक असहमतियों और राजनीतिक विरोध के बीच की बहस नए राजनीतिक ध्रुवीकरण की ओर मुड़ सकती है, जिसका असर आगामी विधायी सत्रों और जन-सरोकार के मुद्दों पर पड़ना तय है।

Rohan Verma@rohan-verma·15 मिनट पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में यह समझना आवश्यक है कि ऐसे लोकप्रिय और हल्के-फुल्के मुहावरे अब चुनावी मैदान और ग्रामीण-शहरी चौपालों पर तीखी बहस का हिस्सा बन रहे हैं। जब प्रधानमंत्री विकास कार्यों के विरोध को 'नाराज़ फूफा' जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों से जोड़ते हैं, तो यह ज़मीनी स्तर पर जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की एक प्रभावी रणनीति बन जाती है। आगामी चुनावों के मद्देनजर, राजनीतिक दल इन प्रतीकों का उपयोग अपने समर्थकों को एकजुट करने और विपक्षी दलों की आपत्तियों को खारिज करने के लिए एक राजनीतिक हथियार के रूप में कर सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय मुद्दों पर होने वाली गंभीर बहस का स्वरूप काफी हद तक बदल रहा है।

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