बरसात के दिनों में अनार के बागों पर एक खास किस्म के कीट का साया गहरा जाता है, जिसे फल छेदक तितली कहा जाता है. यह कीट सीधे फल के अंदर घुसकर उसे भीतर से खोखला कर देता है, जिससे किसानों की मेहनत और कमाई दोनों पर असर पड़ता है. कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह के मुताबिक, मादा तितली अनार की फूल कलियों और नन्हे फलों पर अंडे देती है और इन्हीं अंडों से निकलने वाली इल्लियां फल में छेद बनाकर अंदर पहुंच जाती हैं, जहां वे गूदे और बीजों को खाना शुरू कर देती हैं. अगर समय रहते इस कीट पर काबू न पाया जाए तो फल सड़ने लगते हैं और इसका सीधा असर उत्पादन के साथ-साथ फल की गुणवत्ता पर भी पड़ता है.
फल पर छेद दिखते ही समझ जाएं खतरे का संकेत
अनार की फसल पर तितली के हमले को पहचानना किसानों के लिए मुश्किल नहीं है, बस थोड़ी बारीकी से फल का मुआयना करना पड़ता है. जिस फल पर यह कीट हमला करता है, उसकी सतह पर एक बारीक सा छेद नजर आने लगता है और कई बार इस छेद के ठीक आसपास कीट का मल भी चिपका दिखाई दे जाता है. एक बार इल्ली फल के अंदर पहुंच जाए, तो वह वहीं बैठकर गूदे और बीजों को लगातार खाती रहती है, जिससे फल भीतर से खराब होना शुरू हो जाता है. आगे चलकर इसी जगह से फफूंद और जीवाणुओं का संक्रमण भी फैलने लगता है, नतीजा यह होता है कि फल पूरी तरह सड़ जाता है और कई बार पकने से पहले ही पेड़ से टूटकर गिर जाता है.
फूल आने से लेकर फल बनने तक निगरानी जरूरी
अनार के बाग में जिस समय फूल आना शुरू होता है, उसी वक्त से लेकर फल बनने की शुरुआती अवस्था तक बागवानों को खास चौकसी बरतनी चाहिए. हफ्ते में कई बार पौधों और लगे हुए फलों का बारीकी से निरीक्षण करना जरूरी माना जाता है. जिन फलों पर छेद या सड़न के निशान मिलें, उन्हें फौरन तोड़कर बाग से दूर ले जाकर नष्ट कर दिया जाना चाहिए, ताकि कीट दूसरे फलों तक न फैले. इसके साथ ही पेड़ के नीचे गिरे हुए संक्रमित फलों को भी बाग में पड़ा नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि वे भी संक्रमण की जड़ बन सकते हैं. बाग की नियमित सफाई, खरपतवार पर नियंत्रण और संक्रमित फलों को समय रहते हटाते रहना, इन तीनों आदतों को अपनाकर किसान कीट के प्रकोप को काफी हद तक बढ़ने से रोक सकते हैं.
साफ मौसम में करें कीटनाशक का छिड़काव
जब बाग में तितली का प्रकोप ज्यादा नजर आने लगे, तो किसान कीटनाशक के इस्तेमाल का सहारा ले सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह के मुताबिक, पौधों और फलों को बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड को एक मिलीलीटर प्रति तीन लीटर पानी के अनुपात में घोलकर मौसम साफ रहने वाले दिन छिड़काव किया जा सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि हर कीट पर एक जैसी दवा असर नहीं करती, इसलिए दवा खरीदने से पहले किसानों को यह जरूर जांच लेना चाहिए कि अनार में इस खास कीट के लिए फिलहाल किस दवा की सिफारिश की जा रही है और लेबल पर दी गई मात्रा क्या है.
नीम से जुड़े उपाय भी घटा सकते हैं कीट का प्रकोप
जो किसान अपने बाग में रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल कम से कम रखना चाहते हैं, उनके लिए जैविक और एकीकृत कीट प्रबंधन का रास्ता भी खुला है. नीम पर आधारित उत्पादों को तय मात्रा में अनार के बाग में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा नीम की पत्तियों या बीजों से बनाया गया अर्क भी शुरुआती अवस्था में कीट पर नियंत्रण पाने में मददगार साबित हो सकता है. वहीं जो मित्र कीट तितली के अंडों को नष्ट कर देते हैं, उनका उपयोग भी जैविक नियंत्रण का एक भरोसेमंद तरीका माना जाता है.
फल को थैली से ढकना भी कारगर तरीका
फल को थैली से ढकना यानी फल आवरण विधि भी तितली से बचाव में काफी कारगर मानी जाती है. जैसे ही फल पर्याप्त आकार ले ले, उसे सांस लेने लायक कागज या कपड़े की थैली से ढक दिया जाए, तो तितली के उस फल पर अंडे देने की गुंजाइश काफी कम हो जाती है. इसके साथ किसानों को बाग में मौजूद वयस्क तितलियों पर भी नजर रखनी चाहिए, जिसके लिए प्रकाश प्रपंच जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं. वहीं अगर बाग में कोई संक्रमित फल दिख जाए, तो उसे बिना देर किए तुरंत हटा देना चाहिए, ताकि कीट का असर आगे न बढ़े.
अच्छी पैदावार के लिए अपनाएं संतुलित कीट प्रबंधन
कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह का कहना है कि अनार की खेती में बेहतर उत्पादन और अच्छी क्वालिटी पाने के लिए किसानों को अकेले रासायनिक कीटनाशकों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए. बाग की साफ-सफाई, नियमित निगरानी, संक्रमित फलों को समय पर हटाना, फल आवरण विधि, नीम पर आधारित जैविक उपाय और जरूरत पड़ने पर मित्र कीटों का इस्तेमाल, इन सबको एक साथ अपनाया जाए तो नतीजे बेहतर मिलते हैं. इसके अलावा पौधों को संतुलित पोषण देना, सही समय पर सिंचाई करना और वक्त रहते छंटाई करना भी अनार की अच्छी पैदावार के लिए उतना ही जरूरी है.


















