मेटा की तीसरी पीढ़ी के स्मार्ट ग्लासेस नोवा रोज़मर्रा के इस्तेमाल में कुछ बेहद व्यावहारिक सुधारों के साथ आते हैं, विशेषकर वॉयस कॉलिंग और हार्डवेयर डिज़ाइन के मामले में। एक आपातकालीन अलार्म और गूंजते सायरन के बीच कॉल जारी रहने पर भी दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति को आसपास का भयानक शोर बिल्कुल सुनाई नहीं देता। नए चश्मे में दिया गया छह माइक वाला सिस्टम बाहरी शोर को दबाने और केवल यूजर की आवाज़ को स्पष्ट रखने में बेहद कारगर साबित होता है, जिससे सबसे व्यस्त माहौल में भी बातचीत बिना रुकावट जारी रखी जा सकती है।
कॉम्पैक्ट कैमरा हाउसिंग और सूक्ष्म बनावट
डिज़ाइन के मोर्चे पर मेटा नोवा स्मार्ट ग्लासेस में कैमरा मॉड्यूल को पहले के जेन 2 मॉडल की तुलना में काफी छोटा किया गया है। कैमरे का यह सूक्ष्म हाउसिंग कुछ फीट की दूरी से देखने पर सामान्य रिवेट जैसा प्रतीत होता है। रीस रोजर्स जैसे करीबी लोगों ने जब इसे सामान्य दूरी से देखा, तो पहली नज़र में वे यह पहचान भी नहीं पाए कि चेहरे पर पहना गया चश्मा दरअसल कैमरे से लैस एक स्मार्ट डिवाइस है। यह बदलाव उन यूज़र्स के लिए बड़ा आकर्षण है जो भारी-भरकम और अलग दिखने वाले टेक गैजेट्स की बजाय सामान्य दिखने वाले फ्रेम पसंद करते हैं।
एआई असिस्टेंट की सीमाएं और कमियां
हार्डवेयर और माइक परफॉर्मेंस की मजबूती के उलट चश्मे में मौजूद मेटा का वर्तमान एआई असिस्टेंट अब भी काफी कमजोर बना हुआ है। जब असिस्टेंट से खुद उसी चश्मे के फीचर्स के बारे में पूछा गया, तो वह बुनियादी विवरण तक सही तरीके से नहीं बता पाया। यहां तक कि जब असिस्टेंट को पहने गए विशिष्ट फ्रेम का नाम बताया गया और संदर्भ के लिए मेटा के आधिकारिक प्रोडक्ट पेज की तस्वीर खींचने दी गई, तब भी एआई ने गलत जवाब दिए। किसी भी जटिल या सटीक काम के लिए इस एआई असिस्टेंट पर निर्भर रहना फिलहाल व्यावहारिक नहीं लगता।


















