फिल्म देवरा के लोकप्रिय गीत चुट्टामल्ले को लेकर तैयार किए गए एक फर्जी एआई वीडियो पर मचे हंगामे के बीच अब फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा का अलग दृष्टिकोण सामने आया है। इससे पूर्व जूनियर एनटीआर और यामी गौतम जैसी हस्तियों ने आधुनिक तकनीक के इस तरह के अनुचित उपयोग पर तीखा असंतोष व्यक्त किया था। राम गोपाल वर्मा का मानना है कि ऐसे मामलों में बड़ी हस्तियों की ओर से सार्वजनिक तौर पर आवाज उठाने का उलटा परिणाम निकलता है, क्योंकि इससे उस आपत्तिजनक सामग्री को अप्रत्याशित प्रचार मिल जाता है और वह करोड़ों लोगों तक पहुंच जाती है।
सेलिब्रिटीज की चर्चा से मिलता है अनुचित प्रचार
राम गोपाल वर्मा ने इस मुद्दे पर अपना नजरिया स्पष्ट करते हुए कहा कि जब जाने-माने चेहरे किसी फर्जी अथवा मॉर्फ्ड वीडियो पर जरूरत से ज्यादा बयानबाजी करते हैं, तो वह अनजाने में उस वीडियो के लिए पब्लिसिटी का काम करता है। ऐसी चर्चाओं के चलते आम दर्शकों का ध्यान उस भ्रामक कंटेंट की तरफ तेजी से आकर्षित होता है, जिसके परिणामस्वरूप उस वीडियो को करोड़ों व्यूज हासिल हो जाते हैं। उनका तर्क है कि सारा ध्यान और ऊर्जा उस व्यक्ति की पहचान करने और उसे कानून के कटघरे में लाने पर लगनी चाहिए जिसने वास्तव में यह फर्जी वीडियो तैयार किया है। असली अपराधी की तलाश करने के स्थान पर समाज केवल उस सामग्री के इर्द-गिर्द बहस में उलझ कर रह जाता है।
फर्जी क्लिप सामने आने के बाद जूनियर एनटीआर ने जताया था कड़ा विरोध
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत उस वक्त हुई जब फिल्म देवरा के गीत चुट्टामल्ले का सहारा लेकर एआई की सहायता से एक मॉर्फ्ड और नकली वीडियो ऑनलाइन वायरल कर दिया गया। इस वीडियो क्लिप में अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग करते हुए एक महिला को बेहद आपत्तिजनक और अनुचित रूप में पेश किया गया था। इस हरकत से आहत होकर अभिनेता जूनियर एनटीआर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर अपना भारी आक्रोश प्रकट किया। उन्होंने इस तरह तकनीकी छेड़छाड़ करने वाले तत्वों को बीमार मानसिकता का शिकार करार दिया था।
सख्त कानूनी कार्रवाई और नियम बनाने की पुरजोर मांग
जूनियर एनटीआर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जिस समाज में महिलाओं को देवी स्वरूप मानकर आदर दिया जाता है, वहां एआई का सहारा लेकर उनका अनादर किया जाना अत्यंत लज्जाजनक है। उन्होंने ऐसे असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कठोर कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी। साथ ही उन्होंने इंटरनेट यूजर्स से आग्रह किया कि वे इस प्रकार के किसी भी फर्जी वीडियो को बिल्कुल भी लाइक अथवा फॉरवर्ड न करें। उन्होंने सचेत किया कि जो घटना आज किसी अन्य के साथ घटी है, वह कल किसी और के साथ भी दोहराई जा सकती है। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि एआई तकनीक के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कानूनी नियम बनाए जाने चाहिए।

















