ऑगमेंटेड रियलिटी की दुनिया में पैर जमाने की कोशिशों के बीच स्नैप ने अपने नए स्पेक्स पेश किए हैं, जिनकी डिलीवरी इस साल पतझड़ के मौसम में खरीदारों के लिए शुरू होने वाली है। ऑगमेंटेड वर्ल्ड एक्सपो तकनीकी सम्मेलन में पहली बार सामने आए ये चश्मे अपने आकार, भारी बनावट और बेहद महंगे होने के कारण चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। सम्मेलन के दौरान जब स्नैप के सीईओ इवान स्पीगल ने इन्हें पहना, तो उनके कानों पर इनके भारी खिंचाव को लेकर ऑनलाइन काफी टिप्पणियां की गईं और लोगों ने इसके आरामदेह होने पर सवाल उठाए। इसके जवाब में इवान स्पीगल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने कान की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि उनका कान दिखता ही ऐसा है। इन तमाम बातों के बावजूद कंपनी और उसके मुख्य कार्यकारी का कहना है कि इन ग्लासेस का असली मकसद कंप्यूटिंग को इंसानों के ज्यादा करीब और स्वाभाविक बनाना है।
मनोरंजन, खरीदारी और भाषा अनुवाद की सुविधाएं
स्नैप के इन नए स्पेक्स में बिल्ट इन डिस्प्ले स्क्रीन दी गई है, जिस पर यूट्यूब और एचबीओ मैक्स जैसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से सीधे वीडियो देखे जा सकते हैं। डिजिटल शॉपिंग के शौकीनों के लिए इसमें शॉपीफाई का सपोर्ट जोड़ा गया है, जहां खरीदार किसी भी उत्पाद का थ्री डी मॉडल अपनी आंखों के सामने कमरे में रखकर देख सकते हैं और वहीं से सीधे भुगतान करके उसे खरीद सकते हैं। काम और पढ़ाई के दौरान खुले मैदान या पार्क में बैठकर विचार मंथन करने के लिए इसमें डिजिटल व्हाइटबोर्ड पर लिखने और नोट्स बनाने की सुविधा भी मौजूद है।
इन चश्मों की एक और अहम खूबी वास्तविक समय में अलग-अलग भाषाओं का अनुवाद करना है। जब कोई व्यक्ति आपके सामने किसी दूसरी भाषा में बात कर रहा होता है, तो चश्मा उसकी आवाज सुनकर उसका अनुवाद इनबिल्ट स्पीकर्स के जरिए सुनाता है और साथ ही डिस्प्ले पर ट्रांसक्रिप्ट के रूप में दिखाता भी है। इसके अलावा कंपनी ने ट्रिपएडवाइजर के साथ भी साझेदारी की है, जिससे यात्रा के दौरान विदेशी समीक्षाएं, स्थानीय बोलचाल के मुहावरे और विदेशी मुद्रा की कीमतों का तुरंत अनुवाद किया जा सकता है। हालांकि इस तरह के रियल टाइम अनुवाद सिस्टम हमेशा पूरी तरह सटीक नहीं होते और कभी-कभी इनमें गलतियां देखने को मिलती हैं।
खेलकूद और वर्चुअल गेमिंग का अनुभव
खेल के शौकीनों के लिए स्नैप ने एनबीए और डब्ल्यूएनबीए के साथ मिलकर एक इंटरैक्टिव बास्केटबॉल अनुभव तैयार किया है। यह सिस्टम असली दुनिया के बास्केटबॉल कोर्ट और बॉल के साथ तालमेल बिठाकर काम करता है। स्पेक्स पहनने वाले खिलाड़ी को डिस्प्ले पर सीधे विजुअल गाइड और ड्रिल्स के संकेत दिखाई देते हैं, जिससे खेल का अभ्यास बेहतर किया जा सकता है। इसी तरह के इंटरैक्टिव फीचर्स फुटबॉल और गोल्फ जैसे खेलों के लिए भी विकसित किए गए हैं।
मनोरंजन के दायरे को बढ़ाते हुए एचबीओ मैक्स के सहयोग से इसमें वर्चुअल हैरी पॉटर अनुभव भी जोड़ा गया है। इसमें चश्मा पहनने वाला व्यक्ति जैसे ही अपनी छड़ी घुमाता है, कमरे का पूरा माहौल जादुई आभासी सामानों से भर जाता है और हॉगवॉर्ट्स का स्वीकृति पत्र तक स्क्रीन पर देखा जा सकता है। इसके अलावा, यदि आपके किसी साथी के पास भी यह चश्मा है, तो दोनों लोग मिलकर शतरंज, पिंग पोंग, बैटलशिप और डोमिनोज जैसे क्लासिक डिजिटल खेल आपस में खेल सकते हैं। वहीं जो लोग कागजी किताबें पढ़ने के शौकीन हैं, वे असली किताब पढ़ते समय इन ग्लासेस की मदद से महत्वपूर्ण अनुच्छेदों को हाइलाइट करके सहेज सकते हैं या जहां उन्होंने पढ़ना छोड़ा था, वहां डिजिटल बुकमार्क लगा सकते हैं।
कारोबारी उपयोग और प्राइवेसी से जुड़े पहलू
स्नैप इन स्पेक्स को सिर्फ आम उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे कंपनियों और वर्कप्लेस के लिए भी एक उपयोगी उपकरण के रूप में पेश कर रहा है। इसके लिए कंपनी ने सेल्सफोर्स, अमेज़न और एनवीडिया के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियां की हैं। इस तकनीकी तालमेल की मदद से कर्मचारी अपने सामने तैरते हुए स्क्रीन पर जरूरी कोड या तकनीकी विनिर्देश देख सकते हैं, किसी मशीनरी के कलपुर्जे खोज सकते हैं या गोदाम में रखे सामान के स्टॉक की स्थिति जांच सकते हैं। उल्लेखनीय है कि गूगल ने भी अपने गूगल ग्लास का एक एंटरप्राइज वर्जन तैयार किया था, जिसे साल 2023 में आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया था।
कैमरा लगे चश्मों को लेकर बाजार में अक्सर निजता से जुड़ी चिंताएं उठती रही हैं, जैसा कि रे बैन मेटा ग्लासेस के मामले में देखने को मिला था। स्नैप इन चिंताओं से खुद को पूरी तरह अलग रखना चाहता है। यह स्थिति अपने आप में दिलचस्प है क्योंकि स्नैपचैट स्टोरीज के लिए हैंड्स फ्री वीडियो रिकॉर्डिंग की शुरुआत स्नैप के शुरुआती स्पेक्टेकल्स से ही लोकप्रिय हुई थी। कंपनी ने अपने नए चश्मे में एक एलईडी इंडिकेटर लाइट दी है, जो कैमरा सक्रिय होने पर जल उठती है ताकि सामने वाले को पता चल सके कि वीडियो बन रहा है या तस्वीर ली जा रही है। कंपनी के प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि ये स्पेक्स दुनिया को समझने के लिए रिकॉर्डिंग नहीं करते और इनमें लोगों की पहचान करने के लिए चेहरे की पहचान यानी फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाता है। मेटा ने अपने स्मार्ट ग्लासेस के ऐप में फेशियल रिकॉग्निशन फीचर का परीक्षण किया था, लेकिन बाद में उस कोड को हटा दिया गया था।
नया स्पेक्स इंटेलिजेंस एआई और खरीदने से पहले आजमाने का मौका
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दौड़ में बने रहने के लिए कंपनी ने स्पेक्स इंटेलिजेंस नाम से एक नई एआई सेवा भी शुरू की है। यह नया ऐप आईफोन और मैक कंप्यूटर के साथ-साथ स्पेक्स पर भी चलेगा, यानी इसका इस्तेमाल करने के लिए चश्मा खरीदना अनिवार्य नहीं है। कंपनी इसे एक ऐसा एआई मानती है जो उपयोगकर्ता के दैनिक जीवन का डेटा इकट्ठा करके उनके अगले कदमों का पहले से अनुमान लगाने की कोशिश करता है। यह सेवा कैलेंडर, ईमेल और लोकेशन की जानकारी के साथ तालमेल बैठाती है, जिससे होटल खोजने, यात्रा की योजना बनाने या जरूरी सवालों के जवाब हासिल करने में मदद मिलती है।
यह एआई सेवा यूजर के डेटा को काम, परिवार और लक्ष्यों जैसे कोनों में बांटकर संगठित करती है। यह आपकी प्राथमिकताओं, रिश्तों और दिनचर्या को समझती है, जिसका सीधा मतलब यह है कि जीवन का एक समग्र खाका तैयार करने के लिए इसे बहुत बड़े पैमाने पर निजी डेटा की आवश्यकता होगी। जो लोग इसे खरीदने से पहले व्यक्तिगत रूप से पहनकर आजमाना चाहते हैं, वे एक अक्टूबर से लॉस एंजिल्स के वेस्टफील्ड सेंचुरी सिटी शॉपिंग सेंटर में जाकर स्पेक्स फर्स्ट लुक डेमो का अनुभव ले सकते हैं।
हालांकि इन तमाम आधुनिक खूबियों के बीच भारी कीमत और भारी वजन सबसे बड़ा सवाल बने हुए हैं। कंपनी चाहती है कि लोग इसे पहनकर खेलें, लेकिन तेजी से भागते समय या फुटबॉल की ओर नीचे देखते समय इतना भारी चश्मा चेहरे पर कैसे टिका रहेगा, यह व्यावहारिक रूप से मुश्किल लगता है। साथ ही इसके एक चश्मे की कीमत इतनी ज्यादा है कि उतने पैसे में कोई व्यक्ति अपने तीन दोस्तों के लिए प्लेस्टेशन 5 खरीद सकता है। ऐसे में यह देखना बाकी है कि आम खरीदार इसे किस तरह अपनाते हैं।

















