ताशकंद में हुई उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए मुकाम पर ले जाने की रूपरेखा तैयार की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य एशिया के साथ भारत के संबंधों में उज्बेकिस्तान की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों राष्ट्रों की प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा में उल्लेखनीय समानताएं हैं। ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ व्यापक चर्चा के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में दोनों देश रक्षा क्षेत्र में आपसी साझेदारी को और मजबूत करेंगे, जिसमें रक्षा उपकरणों का संयुक्त उत्पादन और विकास भी शामिल होगा।
यूरेनियम आपूर्ति और परमाणु ऊर्जा सहयोग
दोनों देश शांतिपूर्ण और असैन्य उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसके तहत उज्बेकिस्तान से यूरेनियम की निरंतर और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस व्यवस्था तैयार की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि युवा शक्ति, तकनीकी नवाचार और समावेशी विकास दोनों देशों की नीतियों के केंद्र में हैं, जहां ‘यांगी उज्बेकिस्तान’ और ‘विकसित भारत 2047’ का विजन एक साझा भविष्य की नींव रखता है। ताशकंद में गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए उज्बेकिस्तान के नेतृत्व और वहां की जनता का आभार जताते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी इस चौथी उज्बेकिस्तान यात्रा को दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया। पिछले एक दशक के दौरान राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ हुई 10 से अधिक मुलाकातों का जिक्र करते हुए उन्होंने उनके नेतृत्व कौशल और भारत के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और रक्षा साझेदारी
सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देशों ने आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए शून्य सहनशीलता यानी जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। रक्षा उद्योगों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के साथ-साथ संयुक्त रूप से साजो-सामान तैयार करने और विकसित करने की योजना पर भी सहमति बनी है, जो दोनों देशों के बीच गहरे आपसी विश्वास को दर्शाती है। रणनीतिक साझेदारी के 15 साल पूरे होने के अवसर पर दोनों पक्षों ने इस रिश्ते को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत करने का निर्णय लिया है।
व्यापारिक लक्ष्य और बुनियादी ढांचे का विकास
दोनों देशों के बीच वर्तमान आर्थिक संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और आपसी व्यापार का आंकड़ा 1 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुका है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाजार तक पहुंच, बेहतर कनेक्टिविटी, बैंकिंग तंत्र और भुगतान प्रणालियों को अधिक सुगम बनाया जाएगा। इसके अलावा बुनियादी ढांचे के विकास में आपसी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को सीधा लाभ मिल सके। पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में हुए नए समझौते इस द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करेंगे। दोनों सरकारों की मंशा इस साझेदारी को केवल केंद्रीय राजधानियों तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि विभिन्न राज्यों और शहरों को भी आपस में जोड़कर शहरी प्रबंधन, शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र मेंसशक्त सहभागिता स्थापित करने की है।





















