ज्यादातर घरों में अभी भी वाई-फाई 6 चल रहा है, हालांकि दुकानों की शेल्फ पर वाई-फाई 6ई और वाई-फाई 7 वाले डिवाइस अब आम हो चुके हैं, और आजकल जो भी राउटर या मेश सिस्टम खरीदने लायक हैं, वे सभी वाई-फाई 7 सपोर्ट करते हैं। वाई-फाई 8 को लेकर अभी जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह स्टैंडर्ड अभी फाइनल भी नहीं हुआ है, लेकिन इसकी झलक अभी से मिलनी शुरू हो गई है कि आने वाले दिनों में क्या बदलने वाला है। इसका मतलब यह भी है कि वाई-फाई 8 को लेकर फैसला अभी टाला जा सकता है, लेकिन अगले कुछ सालों में जब दुकानों में इसकी ब्रांडिंग दिखने लगे, तब तक यह जानना फायदेमंद रहेगा कि आखिर बदलेगा क्या।
स्पीड नहीं, अब भरोसे पर फोकस
वाई-फाई की पिछली हर पीढ़ी तेज स्पीड के दम पर बेची जाती रही है, लेकिन वाई-फाई 8 का पूरा ध्यान भरोसेमंद कनेक्शन, स्थिरता और कम लेटेंसी पर है, न कि सिर्फ रॉ स्पीड पर। यह बदलाव इसलिए मायने रखता है क्योंकि वाई-फाई से जुड़ी ज्यादातर रोजमर्रा की झुंझलाहट का स्पीड के आंकड़ों से कम और इस बात से ज्यादा नाता है कि लिविंग रूम से बेडरूम जाते वक्त लैपटॉप का सिग्नल गायब हो जाता है, या बीच बातचीत में वीडियो कॉल कुछ सेकंड के लिए अटक जाती है। इसका सबसे बड़ा वादा है सीमलेस रोमिंग, यानी घर या दफ्तर में इधर से उधर मूव करने पर भी डिवाइस का कनेक्शन बना रहे, कॉल न कटे और डेड जोन की दिक्कत काफी हद तक कम हो जाए।
टेक्निकल नाम और पुराने डिवाइस से कम्पैटिबिलिटी
आईईईई यानी IEEE की पुरानी नामकरण व्यवस्था में वाई-फाई 8 को IEEE 802.11bn कहा गया है, जबकि वाई-फाई 7 को IEEE 802.11be और वाई-फाई 6 को IEEE 802.11ax नाम दिया गया था। यही संस्था, यानी इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स, इन नए स्टैंडर्ड्स को तैयार करती है और इनके नामकरण में जमकर शॉर्ट फॉर्म का इस्तेमाल करती है। पिछली हर पीढ़ी की तरह वाई-फाई 8 भी बैकवर्ड कम्पैटिबल होगा, यानी अगर कोई वाई-फाई 8 राउटर खरीदता है तो वह पुराने वाई-फाई 6 या वाई-फाई 7 डिवाइस के साथ भी ठीक से काम करता रहेगा। लेकिन नए फीचर्स और परफॉर्मेंस का पूरा फायदा उठाने के लिए डिवाइस भी अपग्रेड करने होंगे, यानी सिर्फ नया राउटर या मेश सिस्टम ही नहीं, बल्कि नए स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और दूसरे गैजेट भी वाई-फाई 8 सपोर्ट वाले चाहिए होंगे।
अल्ट्रा हाई रिलायबिलिटी की तैयारी कैसे होगी
वाई-फाई 8 की सबसे बड़ी खासियत का नाम है अल्ट्रा हाई रिलायबिलिटी, यानी UHR। वाई-फाई 7 का पूरा फोकस एक्सट्रीमली हाई थ्रूपुट यानी EHT पर था, क्योंकि उस वक्त स्पीड ही सबसे बड़ी दिक्कत मानी जाती थी। अब जब स्पीड ज्यादातर काम के लिए पहले से ही काफी अच्छी हो चुकी है, तो ध्यान इस बात पर शिफ्ट हो गया है कि सिर्फ तेज नहीं बल्कि भरोसेमंद कनेक्शन कैसे मिले। इसके लिए कई फीचर्स तैयार किए जा रहे हैं, और यह सब मिलकर किसी एक बड़े बदलाव की बजाय ओवरऑल अल्ट्रा हाई रिलायबिलिटी देने वाले हैं।
- मल्टी-एक्सेस पॉइंट कोऑर्डिनेशन (MAPC): इसमें ऐसे फीचर्स शामिल हैं जो अलग अलग एक्सेस पॉइंट्स को एक दूसरे में दखल देने के बजाय आपस में तालमेल बिठाने में मदद करते हैं, जिससे परफॉर्मेंस बेहतर होगी, कवरेज बढ़ेगी और पावर की खपत भी कम होगी, खासकर उन घरों में जहां एक से ज्यादा एक्सेस पॉइंट या पूरा मेश सिस्टम लगा है।
- सीमलेस रोमिंग डोमेन (SRD): इसका मकसद उस लेटेंसी और डेटा लॉस को कम करना है जो डिवाइस के एक एक्सेस पॉइंट से दूसरे पर स्विच होने के दौरान होता है, यही वजह है जिसके चलते वीडियो अक्सर बफर होते हैं या घर में इधर उधर घूमते वक्त कॉल कट जाती है।
- लो लेटेंसी इंडिकेशन (LLI): इसकी मदद से डिवाइस अपनी लेटेंसी जरूरत बता सकते हैं, जैसे गेमिंग स्ट्रीम को प्राथमिकता चाहिए तो वह बाकी कम जरूरी ट्रैफिक से आगे निकल सकती है। TXOP प्रीएम्पशन और हाई प्रायोरिटी EDCA जैसे फीचर्स के साथ मिलकर यह क्वालिटी ऑफ सर्विस यानी QoS को बेहतर बनाएगा, यानी घर में कोई नेटफ्लिक्स देख रहा हो तो भी काम की वीडियो कॉल नहीं अटकेगी।
- इन-डिवाइस कोएग्जिस्टेंस (IDC): यह इस बात पर काम करता है कि स्मार्टफोन जैसे डिवाइस में ब्लूटूथ, थ्रेड या जिगबी जैसी दूसरी कनेक्टिविटी चुपचाप वाई-फाई की परफॉर्मेंस बिगाड़ देती है, भले ही इस बारे में कम ही बात होती हो। यह फीचर इन रेडियो के बीच होने वाली दखलअंदाजी घटाकर उनमें बेहतर तालमेल बिठाता है।
- एक्सटेंडेड लॉन्ग रेंज (ELR): इसकी मदद से डिवाइस बिना घर में और एक्सेस पॉइंट जोड़े भी दूर से ज्यादा भरोसेमंद तरीके से कनेक्ट रह सकेंगे। डिस्ट्रिब्यूटेड-टोन रिसोर्स यूनिट यानी DRU के साथ मिलकर, जो डिवाइस के सिग्नल को एक चौड़े बैंड में फैला देता है, घर के उन कोनों में भी वाई-फाई सिग्नल ज्यादा स्थिर रहेगा जहां अभी कमजोर सिग्नल की शिकायत रहती है।
वाई-फाई 7 के मुकाबले वाई-फाई 8 कितना अलग
कागज पर देखें तो वाई-फाई 8 की थ्योरेटिकल मैक्सिमम स्पीड वाई-फाई 7 जितनी ही यानी 46 Gbps है, दोनों एक जैसी तीन बैंड यानी 2.4 GHz, 5 GHz और 6 GHz पर काम करते हैं, और मैक्सिमम चैनल विड्थ भी 320 MHz पर बराबर है। इसका मतलब है कि आंकड़ों के हिसाब से ज्यादातर लोगों को वाई-फाई 8, वाई-फाई 7 के मुकाबले कोई बड़ी छलांग नहीं लगेगी। ऊपर बताए गए रिलायबिलिटी वाले फीचर्स से असली फायदा उन लोगों को हो सकता है जो शहर के किसी अपार्टमेंट जैसी भीड़भाड़ वाली और ओवरलैपिंग राउटर वाली जगह पर रहते हैं, लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में भरोसेमंदी असल में कितनी बढ़ेगी, यह अभी साफ नहीं है। जिनका वाई-फाई 7 सेटअप पहले से ठीक चल रहा है, उनके लिए फिलहाल वाई-फाई 8 पर स्विच करने की कोई खास वजह शायद न बने।
वाई-फाई 8 असल में कब आएगा
आमतौर पर किसी नए वाई-फाई स्टैंडर्ड को पूरी तरह बाजार में आने में चार से पांच साल लग जाते हैं, क्योंकि चिपमेकर, राउटर बनाने वाली कंपनियों और डिवाइस निर्माताओं को अपने नए प्रोडक्ट में इसे शामिल करने के लिए समय चाहिए होता है। वाई-फाई 7 को वाई-फाई एलायंस से सर्टिफिकेशन जनवरी 2024 में मिला था, इस हिसाब से वाई-फाई 8 का सर्टिफिकेशन 2028 के आसपास मिलने की उम्मीद की जा सकती है। इसके बावजूद चिपमेकर कंपनियां सर्टिफिकेशन से पहले ही वाई-फाई 8 चिपसेट बनाने लगी हैं, और टीपी-लिंक जैसी राउटर बनाने वाली कंपनी वाई-फाई 8 राउटर और मेश सिस्टम लॉन्च करने का ऐलान भी कर चुकी है, जिसका पहला वर्जन 2026 खत्म होने से पहले आने की बात कही गई है। वाई-फाई 7 के वक्त भी ऐसा ही हुआ था, क्योंकि आईईईई के पास स्टैंडर्ड का वर्किंग ड्राफ्ट पहले से मौजूद रहता है, जिससे कंपनियां आधिकारिक सर्टिफिकेशन से पहले ही अंदाजा लगाकर तैयारी शुरू कर देती हैं।
इंतजार करना ही समझदारी क्यों है
जो लोग वाई-फाई 8 का हार्डवेयर सबसे पहले खरीदेंगे, उन्हें हमेशा की तरह ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी, और ज्यादातर यूजर्स के लिए इसके फायदे भी शायद उतने बड़े महसूस न हों जितनी छलांग वाई-फाई 6 से वाई-फाई 7 में आने पर दिखी थी। इसलिए जिन्हें आज ही अपग्रेड की सख्त जरूरत नहीं है, उनके लिए यही समझदारी होगी कि पहले ऑफिशियल सर्टिफिकेशन का इंतजार करें, और शायद कीमतें थोड़ी नीचे आने तक भी रुक जाएं। अमेरिका में रहने वाले खरीदारों के लिए इस फैसले में एक और अड़चन जुड़ जाती है, वहां एफसीसी यानी FCC का विदेश में बने राउटर पर बैन उनके विकल्प और सीमित कर सकता है, जब वाई-फाई 8 वाले डिवाइस आखिरकार बाजार में आएंगे।











