जब भी शेयर बाजार डगमगाता है, मुद्राएं कमजोर पड़ती हैं या दुनिया में तनाव बढ़ता है, निवेशकों का एक बड़ा तबका अपनी पूंजी को ऐसी जगह ले जाना चाहता है जहां वह सुरक्षित महसूस करे। ऐसे हर मौके पर एक ही नाम सबसे आगे आता है, सोना। पिछले दो साल का प्रदर्शन इस भरोसे की सबसे बड़ी गवाही है।
भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक विवाद और महंगाई के दबाव के बीच 2024 का साल सोने के लिए ऐतिहासिक रहा। इस एक ही साल में सोने ने 40 बार नया रिकॉर्ड स्तर छुआ। इसकी औसत कीमत करीब 2,380 डॉलर प्रति औंस रही, जो पिछले साल के मुकाबले 23 प्रतिशत ज्यादा थी। तेजी यहीं नहीं रुकी। अक्टूबर 2025 में सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचकर अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर आ गया, यानी एक साल में 60 प्रतिशत का उछाल।
ताजा भाव क्या कह रहे हैं
लाइव बाजार आंकड़ों के मुताबिक इस समय सोना 4,132 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 4,068 डॉलर से 1.55 प्रतिशत ऊपर है। बीते 52 हफ्तों में इसका दायरा 3,264 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि इसका RSI इस वक्त 43 पर है। कीमतों में यह उठापटक बताती है कि निवेशक अब भी सोने को एक भरोसेमंद ठिकाना मान रहे हैं।
केंद्रीय बैंकों की जबरदस्त खरीदारी
सोना कितना सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसका सबसे साफ सबूत केंद्रीय बैंकों के रवैये से मिलता है। रूस और यूक्रेन के बीच टकराव शुरू होने के बाद इन बैंकों की सोना खरीदारी आसमान छूने लगी। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े बताते हैं कि 2014 से 2016 के बीच केंद्रीय बैंक हर साल औसतन करीब 525 टन सोना खरीदते थे। यही आंकड़ा 2022 में उछलकर 1,136 टन पर पहुंच गया और उसके बाद के सालों में भी ऊंचा बना रहा।
डर की मनोवैज्ञानिक जड़
जब बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, तो निवेशक सहज ही उन संपत्तियों की ओर खिंचते हैं जिन्हें वे छू सकते हैं और जिनकी कीमत पर भरोसा कर सकते हैं। सोना ठीक यही सुकून देता है। यह डर के समय मन को यह तसल्ली देता है कि आपकी कमाई किसी ठोस चीज में सुरक्षित है।
महंगाई के खिलाफ ढाल
सोने की सबसे बड़ी खूबियों में से एक यह है कि तेज महंगाई के दौर में भी यह अपनी कीमत बनाए रखता है। जब केंद्रीय बैंकों के दखल से या फिर कमजोर अर्थव्यवस्था की वजह से मुद्रा का अवमूल्यन होता है, तो लोगों के पैसे की कीमत घटने लगती है। सोने के साथ ऐसा नहीं होता। इसे कृत्रिम तरीके से सस्ता नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसकी कीमत इसकी सीमित आपूर्ति और लगातार बनी रहने वाली ऊंची मांग से जुड़ी होती है।
सदियों से हर सरहद पर भरोसेमंद
आधुनिक मुद्राओं के आने से भी बहुत पहले सोना अपनी चमक, दुर्लभता और टिकाऊपन की वजह से हर सीमा, हर संस्कृति और हर राजनीतिक व्यवस्था में सराहा जाता था। यही स्वीकार्यता आज भी कायम है। रूस का यूक्रेन पर हमला हो, उसके बाद खड़ा हुआ आपूर्ति श्रृंखला का संकट हो या हाल के व्यापारिक तनाव, इन सबके बीच भी सोने की मांग बनी रही और यह एक बेहद तरल यानी आसानी से बिकने वाली संपत्ति साबित हुआ।
सिर्फ निवेश नहीं, उद्योग की जरूरत भी
सोना केवल एक आकर्षक निवेश साधन नहीं है, बल्कि कई औद्योगिक और तकनीकी कामों की रीढ़ भी है। इसकी बिजली सुचालकता, आसानी से ढलने का गुण और जंग न लगने की खासियत इसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा समेत कई हाई-टेक क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी बना देती है। इसके अलावा गहनों में इसका इस्तेमाल, खासकर एशिया में, इसकी कीमत को और मजबूती देता है। असल दुनिया के ये उपयोग यह पक्का करते हैं कि दूसरी आर्थिक ताकतें चाहे जो भी हों, सोने की एक ठोस कीमत हमेशा बनी रहेगी।
बाकी धातुओं से अलग क्यों
अनिश्चितता के दौर में सोना दूसरी कीमती धातुओं के बीच भी एक बेहद भरोसेमंद संपत्ति के रूप में अलग खड़ा दिखता है। निवेश साधन और औद्योगिक संसाधन, दोनों भूमिकाओं में इसकी बहुमुखी उपयोगिता इसका सबसे बड़ा कारण है। जो निवेशक अपने हाथ में असली संपत्ति रखना चाहते हैं और अपने पोर्टफोलियो को तरल बनाए रखना चाहते हैं, वे मन की शांति के लिए हमेशा सोने की ओर लौटते हैं। कीमती धातुओं की ब्रोकरेज फर्म फर्स्ट नेशनल बुलियन इंक. के संस्थापक, अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉन कावुओटो का मानना है कि यही खूबियां सोने को हर संकट में निवेशकों का पहला भरोसा बनाती हैं।













