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ब्राउज़र एक्सटेंशन में सेंध लगाकर दिए जा रहे नकली क्रोम सुरक्षा अपडेट, मालवेयर डाउनलोड होने का खतरागाइड
13 अग॰ 2026, 10:56 pm (2 घंटे पहले)· 2

ब्राउज़र एक्सटेंशन में सेंध लगाकर दिए जा रहे नकली क्रोम सुरक्षा अपडेट, मालवेयर डाउनलोड होने का खतरा

हैकरों द्वारा ब्राउज़र एक्सटेंशन में सेंध लगाकर क्रोम, ब्रेव और ओपेरा यूज़र्स को नकली अपडेट के पॉप-अप दिखाए जा रहे हैं। इन भ्रामक अलर्ट के जरिए कंप्यूटर में खतरनाक मालवेयर स्क्रिप्ट डाउनलोड कराई जा रही है।

इंटरनेट ब्राउज़र का इस्तेमाल करने वाले कंप्यूटर यूज़र्स के लिए एक गंभीर साइबर सुरक्षा चेतावनी जारी की गई है। लोकप्रिय वेब ब्राउज़र्स में हैकरों द्वारा नकली सुरक्षा अपडेट का झांसा देकर खतरनाक मालवेयर फ़ाइलें डाउनलोड कराई जा रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह मालवेयर सीधे ब्राउज़र के कोड में सेंध लगाने के बजाय यूज़र्स द्वारा इंस्टॉल किए गए ब्राउज़र एक्सटेंशन का सहारा ले रहा है। ये प्रभावित एक्सटेंशन इंटरनेट सर्फिंग के दौरान स्क्रीन पर असली दिखने वाले भ्रामक पॉप-अप दिखा रहे हैं। यह साइबर हमला गूगल क्रोम, ब्रेव और ओपेरा जैसे लोकप्रिय क्रोमियम आधारित ब्राउज़र्स के यूज़र्स को निशाना बना रहा है, जिससे यूज़र्स के व्यक्तिगत डेटा और कंप्यूटर सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

नकली सुरक्षा अपडेट और पॉप-अप अलर्ट का पूरा जाल

इस साइबर हमले में यूज़र्स को ठगने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव और धोखेबाज़ डिज़ाइनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पीड़ित यूज़र्स जब इंटरनेट पर किसी वेबसाइट को खोलते हैं, तो उनकी स्क्रीन पर अचानक एक नया विंडो या अलर्ट बॉक्स खुलकर सामने आ जाता है। इन नकली विज्ञापनों में आधिकारिक ब्रांडिंग, लोगो, कॉपीराइट नोटिस और गोपनीयता नीति के लिंक शामिल होते हैं, जिससे पहली नजर में कोई भी यूज़र इन्हें असली क्रोम सिक्योरिटी अपडेट समझ बैठता है।

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हैकर यूज़र्स को डराकर फ़ाइल डाउनलोड कराने के लिए मुख्य रूप से दो तरह के तरीके अपना रहे हैं

  • वेबसाइट एक्सेस ब्लॉक होने की चेतावनी: पहले तरीके में यूज़र को मैसेज दिखाया जाता है कि पुराना वर्जन होने के कारण उनकी वेबसाइटों तक पहुंच अस्थायी रूप से रोक दी गई है। इंटरनेट का उपयोग जारी रखने के लिए तुरंत नया अपडेट डाउनलोड करना अनिवार्य बताया जाता है।
  • डेटा मिटने और ब्राउज़र बंद होने की धमकी: दूसरे और अधिक आक्रामक तरीके में एक समय सीमा दी जाती है। चेतावनी में कहा जाता है कि तय तारीख के बाद क्रोम काम करना बंद कर देगा और इसे पूरी तरह री-इंस्टॉल करना पड़ेगा। ऐसा न करने पर सहेजे गए बुकमार्क्स, ब्राउज़िंग हिस्ट्री और सेव किए गए पासवर्ड्स हमेशा के लिए डिलीट हो जाएंगे।

जब कोई यूज़र डरकर स्क्रीन पर दिख रहे अपडेट बटन पर क्लिक करता है, तो असली सॉफ्टवेयर पैच के बजाय उनके कंप्यूटर पर एक संदिग्ध VBS या EXE फ़ॉर्मेट की स्क्रिप्ट फ़ाइल डाउनलोड हो जाती है।

सुरक्षा जांच और एंटीवायरस को कैसे चकमा देते हैं एक्सटेंशन

यह साइबर हमला इसलिए अधिक खतरनाक साबित हो रहा है क्योंकि यह एंटीवायरस सॉफ्टवेयर और सामान्य सिस्टम स्कैन की पकड़ में आसानी से नहीं आता। इसका कारण यह है कि मूल ब्राउज़र सॉफ्टवेयर पूरी तरह सुरक्षित रहता है और उसमें कोई तकनीकी खराबी नहीं होती। इसके बजाय, यूज़र द्वारा इंस्टॉल किया गया एक्सटेंशन दूरस्थ सर्वर से संपर्क साधकर इंटरनेट इस्तेमाल के दौरान दुर्भावनापूर्ण कोड खींचता है।

वेब स्टोर पर मौजूद ये ऐड-ऑन शुरुआती सुरक्षा जांच पास कर लेते हैं, जिससे यूज़र्स इन पर भरोसा कर लेते हैं। लेकिन एक्टिव होने के बाद ये दूरस्थ कमांड सर्वर से मालवेयर लोड करते हैं। जब तक यूज़र डाउनलोड की गई स्क्रिप्ट फ़ाइल को अपने सिस्टम पर खोलकर रन नहीं करता, तब तक कंप्यूटर का सुरक्षा तंत्र इस खतरे को पहचान नहीं पाता।

जांच के दौरान विभिन्न क्रोमियम ब्राउज़र्स में कई खतरनाक एक्सटेंशन की पहचान की गई है

  • गूगल क्रोम ऐड-ऑन: क्रोम ब्राउज़र में इनेबल राइट क्लिक एंड कॉपी स्मार्ट अनलॉक + ओसीआर नाम का एक्सटेंशन इसका मुख्य जरिया पाया गया। क्रोम वेब स्टोर पर फीचर टैग पाने वाले इस टूल को 70,000 से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके थे। विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य उपयोगिता उपकरण भी इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।
  • ब्रेव ब्राउज़र एक्सटेंशन: ब्रेव का उपयोग करने वाले यूज़र्स ने क्विकलेंस (सर्च स्क्रीन विद गूगल लेंस) नामक एक्सटेंशन से इसी तरह के अलर्ट मिलने की शिकायत की थी। मामला सामने आने के बाद इस प्रभावित ऐड-ऑन को आधिकारिक वेब स्टोर से हटा दिया गया है।
  • ओपेरा ब्राउज़र में मामले: ओपेरा इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स ने भी इसी तरह के फर्जी पॉप-अप दिखने की पुष्टि की है, जिससे यह साफ होता है कि यह खतरा पूरे क्रोमियम आर्किटेक्चर पर असर डाल रहा है।

कंप्यूटर को सुरक्षित रखने और एक्सटेंशन हटाने के जरूरी कदम

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने सभी यूज़र्स को सलाह दी है कि वे इंटरनेट चलाते समय आने वाले किसी भी अचानक अपडेट संदेश पर भरोसा न करें। असली ब्राउज़र कभी भी किसी थर्ड-पार्टी वेबसाइट या पॉप-अप खिड़की के जरिए सॉफ्टवेयर अपडेट डाउनलोड करने के लिए नहीं कहता। अपने ब्राउज़र को सुरक्षित रखने के लिए इन जरूरी निर्देशों का पालन करें

  • फर्जी अलर्ट पर क्लिक करने से बचें: यदि आपकी स्क्रीन पर तुरंत अपडेट करने या सर्विस बंद होने की चेतावनी देने वाला कोई अलर्ट दिखाई दे, तो उस पर क्लिक न करें और न ही कोई फ़ाइल डाउनलोड करें। उस टैब को तुरंत बंद कर दें।
  • आधिकारिक सेटिंग्स से करें असली अपडेट: ब्राउज़र का वास्तविक अपडेट हमेशा आधिकारिक मेन्यू से ही होता है। गूगल क्रोम में सबसे ऊपर दाएं कोने में दिए गए तीन वर्टिकल डॉट्स पर क्लिक करें, फिर सेटिंग्स में जाएं और अबाउट क्रोम विकल्प चुनें। यहां ब्राउज़र खुद आधिकारिक सर्वर से कनेक्ट होकर असली अपडेट जांचेगा।
  • एक्सटेंशन की नियमित जांच करें: अपने ब्राउज़र में इंस्टॉल किए गए सभी टूल्स की समय-समय पर समीक्षा करें। इसके लिए एक्सटेंशन आइकॉन पर क्लिक करके मैनेज एक्सटेंशन में जाएं। वहां एक्टिव टूल्स की परमिशन जांचें और जिन ऐप्स की आवश्यकता न हो, उन्हें तुरंत अनइंस्टॉल कर दें।
  • संदिग्ध विज्ञापनों को रोकने का तरीका: अगर बार-बार फर्जी अलर्ट आ रहे हैं, तो हाल ही में जोड़े गए राइट-क्लिक अनलॉकर, स्क्रीन सर्च या वीडियो डाउनलोडर जैसे यूटिलिटी टूल्स को एक-एक करके हटाकर देखें कि समस्या किस टूल के कारण हो रही है।

सवाल-जवाब

ब्राउज़र अपडेट से जुड़ा यह फर्जीवाड़ा क्या है?
हैकर प्रभावित ब्राउज़र एक्सटेंशन के जरिए वेब सर्फिंग के दौरान फर्जी सुरक्षा अपडेट के पॉप-अप दिखाते हैं। ये विज्ञापनों की तरह दिखते हैं और यूज़र से संदिग्ध VBS या EXE फ़ाइल डाउनलोड करवाते हैं।
एंटीवायरस सॉफ्टवेयर इन हमलों को क्यों नहीं पकड़ पाता?
मुख्य ब्राउज़र सॉफ्टवेयर में कोई खराबी नहीं होती, बल्कि इंस्टॉल किए गए एक्सटेंशन बाहरी सर्वर से कोड खींचते हैं। जब तक यूज़र डाउनलोड की गई फ़ाइल को खुद रन नहीं करता, एंटीवायरस खतरे को डिटेक्ट नहीं कर पाता।
किन ब्राउज़र एक्सटेंशन में यह समस्या पाई गई है?
गूगल क्रोम के 'इनेबल राइट क्लिक एंड कॉपी स्मार्ट अनलॉक + ओसीआर' और ब्रेव के 'क्विकलेंस (सर्च स्क्रीन विद गूगल लेंस)' जैसे उपयोगिता टूल्स में यह दिक्कत देखी गई है।
गूगल क्रोम का असली अपडेट कैसे चेक करें?
क्रोम में ऊपर दाएं कोने पर तीन डॉट्स पर क्लिक करें, सेटिंग्स में जाएं और 'अबाउट क्रोम' पर क्लिक करें। ब्राउज़र खुद आधिकारिक सर्वर से कनेक्ट होकर असली अपडेट इंस्टॉल करेगा।
अगर बार-बार फर्जी अपडेट अलर्ट आ रहे हों तो क्या करना चाहिए?
ब्राउज़र में एक्सटेंशन आइकॉन पर क्लिक करके 'मैनेज एक्सटेंशन' में जाएं और अनचाहे या नए इंस्टॉल किए गए यूटिलिटी एक्सटेंशन को तुरंत अनइंस्टॉल कर दें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Amit Patel@amit-patel·8 मिनट पहले

यह घटना दिखाती है कि किस तरह सप्लाई चेन और थर्ड-पार्टी एक्सटेंशन साइबर अपराधियों के लिए आसान रास्ता बनते जा रहे हैं। तकनीकी स्तर पर ब्राउज़र सुरक्षित होने के बावजूद, एक्सटेंशन के जरिए होने वाले ऐसे हमले डिजिटल सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं। भविष्य में वेब स्टोर की सुरक्षा नीतियों और एक्सटेंशन ऑडिटिंग को और अधिक सख्त करना अनिवार्य होगा, अन्यथा व्यक्तिगत डेटा और वित्तीय जानकारी की चोरी के मामलों में भारी उछाल आ सकता है।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·8 मिनट पहले

अंक ज्योतिष और आध्यात्मिक ऊर्जा के दृष्टिकोण से, यह समय डिजिटल प्रणालियों में भारी अस्थिरता और भ्रम का है। जैसे किसी व्यक्ति की कुंडली में छिपे शत्रु भीतर से नुकसान पहुँचाते हैं, वैसे ही यह हमला थर्ड-पार्टी एक्सटेंशन के रूप में चुपचाप सेंध लगा रहा है। यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने अपनी आंतरिक व्यवस्था और ऊर्जा संतुलन को दुरुस्त नहीं किया, तो आने वाले दिनों में डेटा और गोपनीयता का संकट और गहरा सकता है, जिससे यूज़र्स की मानसिक शांति भी प्रभावित होगी।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·1 घंटे पहले

संदीپ यादव के खेल संवाददाता के दृष्टिकोण से, डिजिटल सुरक्षा का यह संकट अब सीधे तौर पर वैश्विक खेल आयोजनों के डिजिटल प्रसारण और लाइव स्ट्रीमिंग को प्रभावित कर सकता है। जब प्रशंसक ऑनलाइन मैच देखने या रैंकिंग देखने के लिए ब्राउज़र का उपयोग करते हैं, तो ऐसे मालवेयर हमले उनके सिस्टम को भारी जोखिम में डालते हैं। आने वाले समय में खेल प्रशंसकों को आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करते समय अत्यधिक सतर्क रहना होगा, क्योंकि हैकर्स बड़े टूर्नामेंट्स के दौरान लाइव ट्रैफिक का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

Li Wei@li-wei·1 घंटे पहले

ली वेई के रूप में, मेरा मानना है कि यह वैश्विक साइबर संकट केवल व्यक्तिगत उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के लिए भी एक गंभीर चुनौती है। चीन सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में जब सरकारी और कॉर्पोरेट नेटवर्क ब्राउज़र एक्सटेंशन के माध्यम से ऐसे हमलों की चपेट में आते हैं, तो यह आपूर्ति श्रृंखला और डिजिटल बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाता है। आने वाले दिनों में सीमा पार डेटा सुरक्षा और नीतिगत स्तर पर सख्त नियमों की आवश्यकता होगी, अन्यथा यह डिजिटल सेंधमारी वैश्विक व्यापार और कूटनीतिक संचार को भी बाधित कर सकती है।

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