इंटरनेट ब्राउज़र का इस्तेमाल करने वाले कंप्यूटर यूज़र्स के लिए एक गंभीर साइबर सुरक्षा चेतावनी जारी की गई है। लोकप्रिय वेब ब्राउज़र्स में हैकरों द्वारा नकली सुरक्षा अपडेट का झांसा देकर खतरनाक मालवेयर फ़ाइलें डाउनलोड कराई जा रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह मालवेयर सीधे ब्राउज़र के कोड में सेंध लगाने के बजाय यूज़र्स द्वारा इंस्टॉल किए गए ब्राउज़र एक्सटेंशन का सहारा ले रहा है। ये प्रभावित एक्सटेंशन इंटरनेट सर्फिंग के दौरान स्क्रीन पर असली दिखने वाले भ्रामक पॉप-अप दिखा रहे हैं। यह साइबर हमला गूगल क्रोम, ब्रेव और ओपेरा जैसे लोकप्रिय क्रोमियम आधारित ब्राउज़र्स के यूज़र्स को निशाना बना रहा है, जिससे यूज़र्स के व्यक्तिगत डेटा और कंप्यूटर सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
नकली सुरक्षा अपडेट और पॉप-अप अलर्ट का पूरा जाल
इस साइबर हमले में यूज़र्स को ठगने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव और धोखेबाज़ डिज़ाइनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पीड़ित यूज़र्स जब इंटरनेट पर किसी वेबसाइट को खोलते हैं, तो उनकी स्क्रीन पर अचानक एक नया विंडो या अलर्ट बॉक्स खुलकर सामने आ जाता है। इन नकली विज्ञापनों में आधिकारिक ब्रांडिंग, लोगो, कॉपीराइट नोटिस और गोपनीयता नीति के लिंक शामिल होते हैं, जिससे पहली नजर में कोई भी यूज़र इन्हें असली क्रोम सिक्योरिटी अपडेट समझ बैठता है।
हैकर यूज़र्स को डराकर फ़ाइल डाउनलोड कराने के लिए मुख्य रूप से दो तरह के तरीके अपना रहे हैं
- वेबसाइट एक्सेस ब्लॉक होने की चेतावनी: पहले तरीके में यूज़र को मैसेज दिखाया जाता है कि पुराना वर्जन होने के कारण उनकी वेबसाइटों तक पहुंच अस्थायी रूप से रोक दी गई है। इंटरनेट का उपयोग जारी रखने के लिए तुरंत नया अपडेट डाउनलोड करना अनिवार्य बताया जाता है।
- डेटा मिटने और ब्राउज़र बंद होने की धमकी: दूसरे और अधिक आक्रामक तरीके में एक समय सीमा दी जाती है। चेतावनी में कहा जाता है कि तय तारीख के बाद क्रोम काम करना बंद कर देगा और इसे पूरी तरह री-इंस्टॉल करना पड़ेगा। ऐसा न करने पर सहेजे गए बुकमार्क्स, ब्राउज़िंग हिस्ट्री और सेव किए गए पासवर्ड्स हमेशा के लिए डिलीट हो जाएंगे।
जब कोई यूज़र डरकर स्क्रीन पर दिख रहे अपडेट बटन पर क्लिक करता है, तो असली सॉफ्टवेयर पैच के बजाय उनके कंप्यूटर पर एक संदिग्ध VBS या EXE फ़ॉर्मेट की स्क्रिप्ट फ़ाइल डाउनलोड हो जाती है।
सुरक्षा जांच और एंटीवायरस को कैसे चकमा देते हैं एक्सटेंशन
यह साइबर हमला इसलिए अधिक खतरनाक साबित हो रहा है क्योंकि यह एंटीवायरस सॉफ्टवेयर और सामान्य सिस्टम स्कैन की पकड़ में आसानी से नहीं आता। इसका कारण यह है कि मूल ब्राउज़र सॉफ्टवेयर पूरी तरह सुरक्षित रहता है और उसमें कोई तकनीकी खराबी नहीं होती। इसके बजाय, यूज़र द्वारा इंस्टॉल किया गया एक्सटेंशन दूरस्थ सर्वर से संपर्क साधकर इंटरनेट इस्तेमाल के दौरान दुर्भावनापूर्ण कोड खींचता है।
वेब स्टोर पर मौजूद ये ऐड-ऑन शुरुआती सुरक्षा जांच पास कर लेते हैं, जिससे यूज़र्स इन पर भरोसा कर लेते हैं। लेकिन एक्टिव होने के बाद ये दूरस्थ कमांड सर्वर से मालवेयर लोड करते हैं। जब तक यूज़र डाउनलोड की गई स्क्रिप्ट फ़ाइल को अपने सिस्टम पर खोलकर रन नहीं करता, तब तक कंप्यूटर का सुरक्षा तंत्र इस खतरे को पहचान नहीं पाता।
जांच के दौरान विभिन्न क्रोमियम ब्राउज़र्स में कई खतरनाक एक्सटेंशन की पहचान की गई है
- गूगल क्रोम ऐड-ऑन: क्रोम ब्राउज़र में इनेबल राइट क्लिक एंड कॉपी स्मार्ट अनलॉक + ओसीआर नाम का एक्सटेंशन इसका मुख्य जरिया पाया गया। क्रोम वेब स्टोर पर फीचर टैग पाने वाले इस टूल को 70,000 से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके थे। विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य उपयोगिता उपकरण भी इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।
- ब्रेव ब्राउज़र एक्सटेंशन: ब्रेव का उपयोग करने वाले यूज़र्स ने क्विकलेंस (सर्च स्क्रीन विद गूगल लेंस) नामक एक्सटेंशन से इसी तरह के अलर्ट मिलने की शिकायत की थी। मामला सामने आने के बाद इस प्रभावित ऐड-ऑन को आधिकारिक वेब स्टोर से हटा दिया गया है।
- ओपेरा ब्राउज़र में मामले: ओपेरा इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स ने भी इसी तरह के फर्जी पॉप-अप दिखने की पुष्टि की है, जिससे यह साफ होता है कि यह खतरा पूरे क्रोमियम आर्किटेक्चर पर असर डाल रहा है।
कंप्यूटर को सुरक्षित रखने और एक्सटेंशन हटाने के जरूरी कदम
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने सभी यूज़र्स को सलाह दी है कि वे इंटरनेट चलाते समय आने वाले किसी भी अचानक अपडेट संदेश पर भरोसा न करें। असली ब्राउज़र कभी भी किसी थर्ड-पार्टी वेबसाइट या पॉप-अप खिड़की के जरिए सॉफ्टवेयर अपडेट डाउनलोड करने के लिए नहीं कहता। अपने ब्राउज़र को सुरक्षित रखने के लिए इन जरूरी निर्देशों का पालन करें
- फर्जी अलर्ट पर क्लिक करने से बचें: यदि आपकी स्क्रीन पर तुरंत अपडेट करने या सर्विस बंद होने की चेतावनी देने वाला कोई अलर्ट दिखाई दे, तो उस पर क्लिक न करें और न ही कोई फ़ाइल डाउनलोड करें। उस टैब को तुरंत बंद कर दें।
- आधिकारिक सेटिंग्स से करें असली अपडेट: ब्राउज़र का वास्तविक अपडेट हमेशा आधिकारिक मेन्यू से ही होता है। गूगल क्रोम में सबसे ऊपर दाएं कोने में दिए गए तीन वर्टिकल डॉट्स पर क्लिक करें, फिर सेटिंग्स में जाएं और अबाउट क्रोम विकल्प चुनें। यहां ब्राउज़र खुद आधिकारिक सर्वर से कनेक्ट होकर असली अपडेट जांचेगा।
- एक्सटेंशन की नियमित जांच करें: अपने ब्राउज़र में इंस्टॉल किए गए सभी टूल्स की समय-समय पर समीक्षा करें। इसके लिए एक्सटेंशन आइकॉन पर क्लिक करके मैनेज एक्सटेंशन में जाएं। वहां एक्टिव टूल्स की परमिशन जांचें और जिन ऐप्स की आवश्यकता न हो, उन्हें तुरंत अनइंस्टॉल कर दें।
- संदिग्ध विज्ञापनों को रोकने का तरीका: अगर बार-बार फर्जी अलर्ट आ रहे हैं, तो हाल ही में जोड़े गए राइट-क्लिक अनलॉकर, स्क्रीन सर्च या वीडियो डाउनलोडर जैसे यूटिलिटी टूल्स को एक-एक करके हटाकर देखें कि समस्या किस टूल के कारण हो रही है।






















