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6 नव॰ 2026, 8:52 pm (7 मिनट पहले)· 1

मैराथन से पहले स्मार्टवॉच की सेटिंग्स में करें ये जरूरी बदलाव, नहीं होगी दौड़ने में परेशानी

मैराथन या हाफ-मैराथन में हिस्सा लेने जा रहे हैं तो दौड़ने से पहले अपनी स्मार्टवॉच की सेटिंग्स में कुछ आसान बदलाव कर लें। इससे जीपीएस ट्रैकिंग सटीक रहेगी और दौड़ के दौरान किसी तरह की तकनीकी रुकावट से बचा जा सकेगा।

मैराथन या हाफ-मैराथन में दौड़ने से पहले अपनी स्मार्टवॉच को सही तरीके से तैयार करना बहुत जरूरी है ताकि दौड़ के दौरान किसी तरह की तकनीकी बाधा या परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए आपको किसी बेहद महंगी या प्रीमियम जीपीएस स्मार्टवॉच की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आपके पास जो भी साधारण या पुरानी स्मार्टवॉच उपलब्ध है, उसे कुछ खास सेटिंग्स के जरिए रेस के लिए पूरी तरह तैयार किया जा सकता है। दौड़ शुरू होने से ठीक पहले या शुरुआती क्षणों में होने वाली छोटी-सी गलती पूरे रेस के अनुभव को खराब कर सकती है, लेकिन कुछ आसान तरीकों से इन समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है। इन सेटिंग्स को ठीक करने में केवल कुछ ही मिनटों का समय लगता है, लेकिन ये मैराथन के दिन आपके लिए बेहद मददगार साबित हो सकती हैं।

जीपीएस का सिग्नल पहले ही कर लें लॉक

दौड़ शुरू होने से ठीक पहले सैकड़ों धावकों की भीड़ में खड़े होकर अपनी घड़ी के जीपीएस सिग्नल का इंतजार करना तनाव को काफी बढ़ा देता है। ऊंची इमारतों और भीड़भाड़ वाले शुरुआती इलाकों में जीपीएस सिग्नल मिलने में दिक्कत आती है, जिससे पहले कुछ किलोमीटर की गति की सही जानकारी नहीं मिल पाती है। इस समस्या से बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप दौड़ शुरू होने से लगभग 10 से 15 मिनट पहले खुले आसमान के नीचे जाएं और अपनी रनिंग एक्टिविटी को चालू कर दें। यदि आपकी घड़ी में मल्टी-बैंड या डुअल-फ्रीक्वेंसी जीपीएस का विकल्प मौजूद है, तो उसे एक्टिविटी सेटिंग्स में जाकर जरूर ऑन कर लें क्योंकि यह घनी आबादी वाले इलाकों में बहुत बेहतर काम करता है। हालांकि, सिग्नल मिलने के बाद भी घड़ी में स्टार्ट बटन तब तक न दबाएं जब तक कि वास्तव में रेस शुरू न हो जाए।

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दौड़ के लिए बनाएं एक सरल और उपयोगी डेटा स्क्रीन

प्रशिक्षण के दौरान कई तरह के डेटा स्क्रीन देखना फायदेमंद होता है, लेकिन मैराथन प्रतियोगिता के दौरान यह स्थिति को उलझनभरा बना सकता है। स्क्रीन पर जरूरत से ज्यादा आंकड़े देखने से अनावश्यक तनाव होता है और शुरुआती दौर में किसी गलत आंकड़े पर नजर पड़ने से पूरा पेस बिगड़ सकता है। इसके बजाय अपनी घड़ी में केवल तीन या चार जरूरी फील्ड वाली एक समर्पित रेस स्क्रीन सेट करें, जैसे कि लैप पेस या औसत लैप पेस, कुल दूरी या लैप की दूरी, दिल की धड़कन और कुल बीता हुआ समय। कैडेंस, पावर और वर्टिकल ऑसिलेशन जैसे अन्य तमाम आंकड़ों को देखने से बचें क्योंकि इन्हें आप रेस के बाद कूल-डाउन के दौरान भी आराम से देख सकते हैं।

नोटिफिकेशन्स बंद करें और रेस के लिए बनाएं खास अलर्ट

दौड़ के बीच में किसी जरूरी काम या दफ्तर से आने वाला मैसेज आपके पूरे ध्यान को भटका सकता है, जो मैराथन के दौरान बिल्कुल भी ठीक नहीं है। रेस के दिन से पहले अपनी घड़ी को डू नॉट डिस्टर्ब या एयरप्लेन मोड पर सेट कर लें या फिर एक ऐसे डेडीकेटेड एक्टिविटी मोड को चुनें जो सभी तरह के बाहरी नोटिफिकेशन्स को ब्लॉक कर देता है। ऐसा करने से घड़ी की बैटरी भी बचती है, जो कि चार घंटे या उससे ज्यादा लंबी मैराथन दौड़ के दौरान बेहद जरूरी है। इसके अलावा आप अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ खास अलर्ट भी सेट कर सकते हैं, जैसे कि शुरुआती दौर में तेज दौड़ने से बचने के लिए हाई हार्ट-रेट अलर्ट या फिर समय पर एनर्जी जेल और स्पोर्ट्स ड्रिंक लेने के लिए एक निश्चित समय अंतराल का रिमाइंडर।

मील के पत्थरों पर मैनुअल लैप बटन का करें इस्तेमाल

मैराथन के दौरान यह अक्सर देखा गया है कि दौड़ने वाले व्यक्ति की घड़ी हमेशा आधिकारिक रेस कोर्स की तुलना में ज्यादा दूरी दिखाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि रेस के रास्ते को सबसे छोटे संभव रूट के आधार पर मापा जाता है, जबकि दौड़ते समय आप लोगों से बचकर आगे निकलते हैं और कई जगह घुमावदार रास्ते लेते हैं। घड़ी के इस अंतर को पाटने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप ऑटो-लैप पर निर्भर रहने के बजाय हर मील या किलोमीटर के मार्कर पर खुद मैनुअल लैप बटन दबाएं। इससे आपको जीपीएस के अनुमानित आंकड़ों के बजाय आधिकारिक कोर्स के अनुसार बिल्कुल सटीक पेस डेटा मिलता है और आप अपनी योजना के मुताबिक अपनी स्थिति की सही जांच कर पाते हैं।

दौड़ के दौरान होने वाली हलचल से बचने के लिए स्क्रीन लॉक करें

दौड़ के दौरान बारिश, पसीना आना, किसी साथी से हाथ मिलाना या फिर वाटर स्टेशन से पानी की बोतल उठाते समय टचस्क्रीन पर गलती से हाथ लग सकता है। कई बार ऐसी अनचाही छुअन की वजह से घड़ी की एक्टिविटी गलती से रुक जाती है या सेव हो जाती है, जो कि 18वें किलोमीटर पर आकर किसी बड़े झटके से कम नहीं लगती है। इन सभी समस्याओं से बचने के लिए रेस शुरू होने से पहले अपनी स्मार्टवॉच के स्क्रीन लॉक को जरूर चालू कर लें ताकि किसी भी तरह के अनचाहे स्पर्श से घड़ी की सेटिंग प्रभावित न हो। इसके अलावा बेहतर हार्ट-रेट की रीडिंग के लिए घड़ी को अपनी कलाई की हड्डी से ठीक एक उंगली ऊपर थोड़ा कसकर पहनें और रेस खत्म होने के बाद ऑटो-सेव रिमाइंडर का उपयोग करना न भूलें।

सवाल-जवाब

मैराथन दौड़ से कितनी देर पहले जीपीएस सिग्नल तलाशना चाहिए?
दौड़ शुरू होने से कम से कम 10 से 15 मिनट पहले खुले आसमान के नीचे जाकर जीपीएस सिग्नल की खोज शुरू कर देनी चाहिए।
दौड़ के दौरान घड़ी की स्क्रीन पर कौन से मुख्य आंकड़े देखने चाहिए?
घड़ी की स्क्रीन पर केवल लैप पेस, कुल दूरी, दिल की धड़कन और कुल बीता हुआ समय जैसे तीन-चार जरूरी आंकड़े ही रखने चाहिए।
ऑटो-लैप के बजाय मैनुअल लैप बटन का उपयोग क्यों करना चाहिए?
मैनुअल लैप बटन दबाने से पेस डेटा सैटेलाइट के अनुमान के बजाय आधिकारिक और सटीक रेस कोर्स के अनुसार मिलता है।
टचस्क्रीन लॉक करना मैराथन में क्यों जरूरी है?
बारिश, पसीने या पानी लेते समय हाथ लगने से घड़ी रुक सकती है, जिसे रोकने के लिए स्क्रीन लॉक करना जरूरी है।
बेहतर हार्ट-रेट रीडिंग के लिए घड़ी को कलाई पर कैसे पहनना चाहिए?
हार्ट-रेट की सटीक जानकारी के लिए घड़ी को कलाई की हड्डी से ठीक एक उंगली ऊपर थोड़ा कसकर पहनना चाहिए।
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