कानपुर के निवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है क्योंकि लंबे समय से प्रतीक्षित सरैंया रेलवे ओवरब्रिज को यातायात के लिए खोल दिया गया है। इस आधुनिक परियोजना के शुरू होने से शहरवासियों को रोजाना लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से बड़ी निजात मिलने की पूरी उम्मीद है।
150 करोड़ की लागत से हुआ तैयार
इस महत्वपूर्ण पुल के निर्माण पर कुल 150 करोड़ रुपये की लागत आई है। गंगा बैराज की तरफ से आने वाले वाहन अब इस ओवरब्रिज का इस्तेमाल करके सीधे कानपुर शहर के भीतर प्रवेश कर सकेंगे। इससे उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ जैसे पड़ोसी शहरों से कानपुर आने-जाने वाले यात्रियों का सफर काफी सुगम और समय बचाने वाला हो गया है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि रेलवे क्रॉसिंग बंद होने की स्थिति में अब चालकों को घंटों तक ट्रैफिक में फंसे रहने की मजबूरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
गंगा बैराज से आजाद मार्ग तक का मार्ग
यह नया आरओबी गंगा बैराज और शुक्लागंज मार्ग पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर से गुजरता है। इस पुल की शुरुआत सरैंया गांव की तरफ से होती है और यह रेलवे लाइन को पार करते हुए मरहला चौराहे से आगे बढ़ते हुए आजाद मार्ग की तरफ नीचे उतरता है। इस व्यवस्था के लागू होने से शुक्लागंज और आजाद मार्ग की ओर से आने वाले तमाम वाहन बिना किसी रुकावट के रेलवे क्रॉसिंग को बायपास करते हुए सीधे गंगा बैराज की तरफ पहुंच सकेंगे।
चार लेन और आधुनिक डिजाइन
यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए इस ओवरब्रिज को चार लेन का विस्तृत रूप दिया गया है। इस पूरे पुल की कुल लंबाई करीब 1.13 किलोमीटर मापी गई है। पुल के दोनों किनारों पर साढ़े सात चौड़ी सड़क का निर्माण किया गया है ताकि गाड़ियां बिना किसी बाधा के निकल सकें। चूंकि इस रास्ते पर कुल पांच मोड़ बनाए गए हैं, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहन चालकों को 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा में ही वाहन चलाने की सख्त सलाह दी गई है।
योजना से लेकर निर्माण तक का सफर
इस बड़े प्रोजेक्ट की रूपरेखा साल 2016 में ही तैयार कर ली गई थी। उस वक्त शुरुआती योजना के तहत पुल की लंबाई 785 मीटर तय की गई थी और इसकी अनुमानित लागत करीब 78 करोड़ रुपये तय की गई थी। इसके बाद साल 2020 में इस परियोजना को औपचारिक मंजूरी मिली और जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू हुआ। हालांकि बाद में बढ़ती जरूरतों और लागत के चलते बजट बढ़कर 150 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
डिजाइन में बदलाव और देरी के कारण
इस प्रोजेक्ट को मूल रूप से जून 2023 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन बाद में इलाके में बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को भांपते हुए अधिकारियों ने पुल की मूल डिजाइन में संशोधन करने का बड़ा फैसला लिया। पहले इस पुल को मरहला चौराहे पर ही उतारने की योजना बनाई गई थी, लेकिन वहां संभावित ट्रैफिक जाम को देखते हुए पुल के छोर को चौराहे से करीब 350 मीटर आगे बढ़ाकर आजाद मार्ग की तरफ सिफ्ट कर दिया गया। इस बदलाव की वजह से पुल की कुल लंबाई बढ़कर लगभग 1129 मीटर तक पहुंच गई। डिजाइन में बार-बार बदलाव, बजट संबंधी स्वीकृतियों और निर्माण एजेंसियों से जुड़ी दिक्कतों के कारण काम में वक्त लगा। सितंबर 2024 में संशोधित कार्ययोजना के तहत निर्माण में फिर तेजी लाई गई और अप्रैल 2025 में बचे हुए काम को पूरा करने की जिम्मेदारी एक अन्य निर्माण एजेंसी को सौंपी गई।
फाटक बंद होने की पुरानी समस्या से मुक्ति
सरैंया रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रैफिक की समस्या बहुत पुरानी और गंभीर रही है। कानपुर और लखनऊ के व्यस्त रेलमार्ग पर लगातार ट्रेनों की आवाजाही होने के कारण इस रेलवे फाटक को दिनभर में औसतन 80 बार बंद करना पड़ता था। एक बार फाटक गिरने पर वाहनों को लगभग 10 से 15 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, जिसके चलते क्रॉसिंग के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती थीं। कई बार तो स्थिति ऐसी बनती थी कि वाहन चालकों को आधे-आधे घंटे तक जाम की जंजीरों में बंधे रहना पड़ता था। अब इस नए ओवरब्रिज के शुरू हो जाने से उस रास्ते पर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम हो गया है।
जाजमऊ पुल की मरम्मत को मिलेगी गति
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के निदेशक पंकज यादव ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सरैंया आरओबी के शुरू होने से व्यस्त जाजमऊ गंगा पुल पर वाहनों का अतिरिक्त लोड काफी कम हो जाएगा। अब तक लखनऊ और कानपुर के बीच आवागमन करने वाले अधिकांश भारी और हल्के वाहन जाजमऊ पुल का ही इस्तेमाल करते थे। अब वैकल्पिक मार्ग मिलने से जाजमऊ पुल पर दबाव घटेगा और उसकी जरूरी मरम्मत का काम भी तेजी से पूरा कराया जा सकेगा।
रोडवेज बसों के संचालन की तैयारी
प्रशासन की तरफ से लखनऊ और रायबरेली रूट पर चलने वाली रोडवेज बसों का संचालन भी आगामी दीपावली के पर्व के ठीक बाद इसी नए रास्ते से सुनिश्चित करने की पूरी तैयारी की जा रही है। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक महेश कुमार के अनुसार इस बाबत जिला प्रशासन के तमाम जिम्मेदार अधिकारियों के साथ आवश्यक बातचीत पूरी हो चुकी है, जिससे आने वाले समय में यात्रियों को और अधिक बेहतर परिवहन सुविधाएं मिल सकेंगी।
















