एप्पल के नए आईओएस 27 ऑपरेटिंग सिस्टम पर स्विच करने के बाद यूजर्स सिरी एआई और नए एआई फोटो एडिटिंग टूल्स जैसे फीचर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि इस बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट के साथ कई लोगों को एक गंभीर परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है। कई यूजर्स ने पाया है कि उनके आईफोन की बैटरी पहले जितनी देर नहीं टिक रही है और बहुत तेजी से खत्म हो रही है। हालांकि हर यूजर के साथ ऐसा अनुभव नहीं हो रहा है और कुछ डिवाइसों पर आईओएस 26 की तुलना में बैटरी का प्रदर्शन सामान्य बना हुआ है, लेकिन ढेरों उपभोक्ता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि नए अपडेट ने उनके फोन के बैटरी बैकअप को काफी नुकसान पहुंचाया है। इस तरह के ड्रेन के कई तकनीकी कारण हो सकते हैं, लेकिन यूजर्स ने इस समस्या की मुख्य वजह कनेक्टिविटी असिस्ट नाम के एक खास फीचर को माना है।
क्या है कनेक्टिविटी असिस्ट और यह कैसे काम करता है?
एप्पल ने कनेक्टिविटी असिस्ट फीचर को एक बहुत ही उपयोगी मकसद से तैयार किया था। इसका काम यह है कि जब भी आपके वाई-फाई का सिग्नल कमजोर पड़े, यह तुरंत सेलुलर डेटा का सहारा ले ले। कागजी तौर पर यह फीचर उस समय बेहद मददगार साबित होता है जब आप वाई-फाई नेटवर्क के दायरे से बाहर निकल रहे होते हैं। आमतौर पर कमजोर वाई-फाई सिग्नल के कारण इंटरनेट की स्पीड काफी धीमी हो जाती है और कनेक्शन पूरी तरह कटने तक पेज लोड होने में लंबा समय लगता है। कनेक्टिविटी असिस्ट सेलुलर डेटा को बीच में जोड़कर इंटरनेट की रफ्तार धीमी नहीं पड़ने देता और जब यूजर पूरी तरह रेंज से बाहर चला जाता है तो फोन अपने आप पूरी तरह सेलुलर नेटवर्क पर आ जाता है।
तकनीकी रूप से यह सुविधा आईफोन में पूरी तरह नई नहीं है। आईओएस 27 से पहले एप्पल इसे वाई-फाई असिस्ट के नाम से पेश करता था, लेकिन इसके काम करने का तरीका थोड़ा अलग था। आईओएस 26 में मौजूद पुराना वाई-फाई असिस्ट सिर्फ इतना करता था कि जब वाई-फाई बहुत कमजोर हो जाता, तब वह सेलुलर पर स्विच कर देता था। आईओएस 27 में आया नया कनेक्टिविटी असिस्ट एक साथ दोनों नेटवर्क्स का इस्तेमाल करने में सक्षम दिखाई देता है। माना जा रहा है कि एक साथ दोनों कनेक्शन सक्रिय रखने का यह नया तरीका ही फोन की बैटरी को सामान्य से कहीं ज्यादा तेजी से खत्म कर रहा है।
डीएनएस रिक्वेस्ट और एड ब्लॉकर की वजह से बढ़ता लोड
कनेक्टिविटी असिस्ट में एक और बड़ा बदलाव किया गया है जो बैटरी की खपत को और बढ़ा सकता है। पुराने वाई-फाई असिस्ट के उलट, नया कनेक्टिविटी असिस्ट सेलुलर डेटा के जरिए डीएनएस रिक्वेस्ट भेजता है। ऐसा होने पर फोन में पॉप-अप विज्ञापनों को रोकने के लिए लगाए गए एड ब्लॉकर्स के नियम बायपास हो सकते हैं। इस स्थिति को देखते हुए एप्पल खुद भी यह सलाह देता है कि अगर आप किसी एड ब्लॉकर का इस्तेमाल करते हैं तो कनेक्टिविटी असिस्ट को बंद कर दें। जब कोई आईफोन सेलुलर डेटा पर लगातार डीएनएस रिक्वेस्ट भेजता रहता है और एक्टिव एड ब्लॉकर्स को दरकिनार करता है, तो बैकग्राउंड में होने वाली यह लगातार गतिविधि डिवाइस की बैटरी पर भारी दबाव डालती है।
यूजर्स के अनुभव और ओवरहीटिंग से राहत
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट के आर/आईफोन सबरेडिट पर ज़ोटदमाइटी नाम के एक यूजर ने अपना अनुभव साझा किया। यूजर के अनुसार उनके आईफोन 15 प्रो मैक्स की बैटरी हेल्थ 89 प्रतिशत थी, लेकिन आईओएस 27 में अपडेट करने के बाद फोन केवल तीन से चार घंटे ही चल पा रहा था। इसके बाद जब उन्होंने कनेक्टिविटी असिस्ट को बंद किया, तो उनके डिवाइस का बैटरी यूसेज बढ़कर सीधे सात घंटे तक पहुंच गया। उस चर्चा में शामिल कई अन्य आईफोन यूजर्स ने भी इसी तरह के सुधार की पुष्टि की। एक यूजर ने यह भी बताया कि इस फीचर को डिसेबल करने के बाद उनके फोन के गर्म होने की समस्या भी पूरी तरह ठीक हो गई।
आईफोन में कनेक्टिविटी असिस्ट को बंद करने का तरीका
अगर आप भी बैटरी तेजी से खत्म होने से परेशान हैं, तो इसे दो अलग-अलग तरीकों से बंद कर सकते हैं। पहला तरीका किसी खास वाई-फाई नेटवर्क के लिए इसे बंद करने का है
- सबसे पहले आईफोन की सेटिंग्स में जाएं और वाई-फाई विकल्प पर टैप करें।
- अपने कनेक्टेड नेटवर्क के नाम के आगे दिख रहे नीले रंग के इन्फो आइकन (i) पर टैप करें।
- स्क्रीन पर नीचे की तरफ स्क्रॉल करें और यूज़ कनेक्टिविटी असिस्ट के सामने दिए गए टॉगल को बंद कर दें।
इस विकल्प से आप उन जगहों पर तेजी से बैटरी ड्रेन होने से रोक सकते हैं जहां आप चार्जर से दूर रहते हैं, जैसे कोई पसंदीदा कैफे या ऑफिस।
यदि आप पूरे आईफोन पर इस फीचर को पूरी तरह बंद करना चाहते हैं, तो वाई-फाई सेटिंग्स के मुख्य पेज पर वापस जाएं। वहां नीचे स्क्रॉल करके कनेक्टिविटी असिस्ट के सामने दिए गए मुख्य टॉगल को ऑफ कर दें। अगर यह फीचर पहले से चालू था, तो आपको वहीं यह भी दिखाई देगा कि इसने अब तक कुल कितना सेलुलर डेटा इस्तेमाल किया है। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि यह बैकग्राउंड में कितनी बार एक्टिव हुआ है, क्योंकि ज्यादा डेटा खपत का सीधा मतलब ज्यादा बैटरी ड्रेन हो सकता है।


















