केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के सत्ता में लौटने के बाद संगठन के भीतर पुरानी गुटबाजी एक बार फिर सतह पर आ गई है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ के संयोजक अडूर प्रकाश और मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के बीच गहराते मतभेदों ने पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। सरकार और गठबंधन से जुड़े बड़े फैसलों में सलाह न लिए जाने को लेकर उपजा यह विवाद अब अखिल भारतीय कांग्रेस समिति यानी एआईसीसी के पाले में पहुंच गया है, जहां दोनों ही खेमे एक-दूसरे की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
फैसलों पर सलाह न मिलने से नाराज प्रकाश ने खोला मोर्चा
इस पूरे राजनीतिक टकराव की शुरुआत तब हुई जब अडूर प्रकाश ने गठबंधन और राज्य सरकार से जुड़े अहम नीतिगत फैसलों पर विचार-विमर्श न किए जाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी शुरू कर दी। प्रकाश ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम पूरी तरह अपनी मर्जी से उठाया है और उनकी यह आलोचना यूडीएफ संयोजक के तौर पर उनके व्यक्तिगत अनुभवों से उपजी है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात का भी साफ संकेत दिया है कि वे अपने तमाम गिले-शिकवे सीधे तौर पर दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व यानी एआईसीसी के समक्ष औपचारिक रूप से रखेंगे।
सतीशन खेमे के अपने संदेह और केंद्रीय नेताओं पर सवाल
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन का समर्थक गुट अडूर प्रकाश के इस सार्वजनिक विरोध को सामान्य या एक अकेली घटना मानने को बिल्कुल तैयार नहीं है। सतीशन खेमे के नेता आंतरिक चर्चाओं में यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रकाश की इस खुली बयानबाजी के पीछे केंद्रीय आलाकमान के किसी कद्दावर नेता का मौन समर्थन छिपा है। इस राजनीतिक विवाद में केरल के लिए एआईसीसी की महासचिव दीपा दासमुंशी की भूमिका को लेकर भी संदेह व्यक्त किए जा रहे हैं। राज्य में पार्टी का यह आंतरिक टकराव असल में केरल कांग्रेस की दशकों पुरानी गुटीय राजनीति की जड़ों से जुड़ा हुआ है।
केरल कांग्रेस में गुटीय राजनीति की पुरानी परंपरा
केरल में पार्टी संगठन का इतिहास बताता है कि के. करुणाकरण और ए.के. एंटनी के ऐतिहासिक दौर से लेकर ओमन चांडी के कार्यकाल और अब मौजूदा वी.डी. सतीशन के नेतृत्व तक, अंदरूनी गुटबाजी का प्रभाव संगठन के कामकाज पर हमेशा बना रहा है। हाल ही में सत्ता में वापसी के बावजूद यह पुरानी रस्साकशी खत्म होने के बजाय फिर से भड़क उठी है। इस समय अडूर प्रकाश का धड़ा मामले को सुलझाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप की मांग कर रहा है, जबकि मुख्यमंत्री सतीशन का गुट यह परखने में जुटा है कि क्या आलाकमान पूरी मजबूती से मुख्यमंत्री के फैसलों का समर्थन करेगा।
संगठनात्मक फेरबदल और नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में पेच
गुटीय खींचतान का सीधा असर पार्टी संगठन के आवश्यक पुनर्गठन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। एक गुट को पूरा अंदेशा है कि संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। सतीशन सरकार के कार्यभार संभालने और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ के बिजली मंत्री का पद संभालने के चार महीने बीत जाने के बाद भी पार्टी नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय नहीं कर सकी है। यह देरी संगठन के लिए सार्वजनिक असहजता का कारण बन रही है, जिसकी मुख्य वजह दोनों खेमों के बीच आम सहमति का अभाव माना जा रहा है।
विवादों पर के.सी. वेणुगोपाल की नसीहत
राज्य में बढ़ते मतभेदों के बीच एआईसीसी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने स्थिति को नियंत्रित करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के पास अपने आंतरिक मामलों और मतभेदों को सुलझाने के लिए तय व्यवस्था मौजूद है और केंद्रीय नेतृत्व इस टकराव को खत्म करने के लिए खुद आवश्यक पहल करेगा। इसके साथ ही उन्होंने साफ लफ्जों में यह भी कहा कि वे पार्टी के अंदरूनी विवादों को मीडिया या जनता के सामने खुलकर उछालने के सख्त खिलाफ हैं।





















