गुजरात के अहमदाबाद शहर के भीतर एक ऐसी अवैध गतिविधि का खुलासा हुआ है जिसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। दरियापुर इलाके में स्थित मनपसंद जिमखाना क्लब के अंदर गोवा के कैसीनो की तर्ज पर एक हाई-प्रोफाइल जुआघर संचालित किया जा रहा था। इस पूरे सिंडिकेट को चलाने के लिए अपराधी बेहद शातिर तरीके अपना रहे थे और गुप्त कोडवर्ड का इस्तेमाल करते हुए नेटवर्क को छिपाए हुए थे। वित्तीय लेन-देन के पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा था ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके।
छापेमारी में 187 जुआरी दबोचे गए
गांधीनगर स्टेट मॉनिटरिंग सेल यानी SMC की एक विशेष टीम ने इस क्लब पर औचक कार्रवाई करते हुए मुख्य संचालकों समेत कुल 187 जुआरियों को रंगे हाथों धर दबोचा। शुरुआती जांच में यह बात सामने निकलकर आई है कि इस गैरकानूनी धंधे के मुख्य सरगना गोविंद उर्फ गामा पटेल और किरीटसिंह चावड़ा थे। ये दोनों जुआ खेलने के शौकीनों को टेबल उपलब्ध कराते थे जिसके बदले प्रति टेबल 15,000 से 30,000 रुपये तक की भारी भरकम राशि किराये के रूप में वसूली जाती थी। क्लब की सदस्यता हासिल करने के लिए भी 2,000 रुपये लिए जाते थे। पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश करने के लिए चार पुलिस बसों और एक AMTS बस का इस्तेमाल किया।
जांच में यह भी पता चला है कि इस क्लब में मनोरंजन के नाम पर जुए का बड़ा कारोबार चल रहा था। आयोजकों ने कुल 22 टेबल किराए पर दे रखे थे जहां दिन और रात की शिफ्ट के हिसाब से जुआरियों की महफिल सजती थी। गोविंद उर्फ गामा पटेल ने किरीटसिंह मफा सिंह चावड़ा के साथ मिलकर इस पूरे साम्राज्य को खड़ा किया था और क्लब के सदस्यों को विशेष एंट्री दी जाती थी।
आंगड़िया पेढ़ियों और यूपीआई के जरिए करोड़ों का लेनदेन
इस हाई-प्रोफाइल जुआघर में पैसों के हेरफेर के लिए पारंपरिक आंगड़िया सेवाओं का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा था। माधुपुरा और कालूपुर इलाकों की कई प्रसिद्ध आंगड़िया पेढ़ियां जैसे कि पी.एम. एवं आर.के. रमेश कांती आंगड़िया, एच.आर. आंगड़िया और पी.एम. आंगड़िया इस अवैध कारोबार के वित्तीय पहिये चला रही थीं। इसके अलावा आधुनिक यूपीआई ट्रांजैक्शन का भी सहारा लिया जाता था। मूलुभा और किशोर मारवाड़ी जैसे लोग इन आंगड़िया नेटवर्क के जरिए टेबल का किराया और हार-जीत का हिसाब किताब चुकता करते थे। पुलिस दस्तावेजों के मुताबिक चिराग पटेल, अजीत शाह और आनंद ठाकोर के नाम पर इन वित्तीय माध्यमों से भारी मात्रा में नकदी का आदान-प्रदान किया जा रहा था।
साल 2021 में भी हो चुकी है इसी क्लब पर बड़ी कार्रवाई
दिलचस्प बात यह है कि मनपसंद जिमखाना क्लब का आपराधिक इतिहास पुराना रहा है। ठीक इसी जगह पर वर्ष 2021 में भी स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने छापा मारा था, उस समय भी 183 जुआरियों को गिरफ्तार किया गया था और लगभग 85 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया था। उस पुरानी घटना के बाद स्थानीय थाने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे जिसके चलते दरियापुर के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक, उप-निरीक्षक समेत कुल 12 पुलिसकर्मियों को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया था।



















