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जब नरेंद्र मोदी को मिली वो बच्ची, जिसका हाथ पकड़कर कभी स्कूल ले गए थे मुख्यमंत्रीगुजरात
8 सित॰ 2026, 11:05 pm (57 मिनट पहले)· 2

जब नरेंद्र मोदी को मिली वो बच्ची, जिसका हाथ पकड़कर कभी स्कूल ले गए थे मुख्यमंत्री

गुजरात के नवसारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पुराने दिनों का एक भावुक संस्मरण सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे मुख्यमंत्री काल में स्कूल पहुँचाई गई एक आदिवासी बच्ची आज नर्स बन चुकी है।

सार्वजनिक जीवन के अपने पुराने सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नवसारी में आयोजित एक विशाल जनसभा में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल से जुड़ा एक बेहद मार्मिक प्रसंग देश के सामने रखा। उन्होंने उस वाकये का जिक्र किया जब उन्होंने एक साधारण आदिवासी परिवार की नन्हीं बेटी का हाथ पकड़कर उसे पहली बार शिक्षा के मंदिर तक पहुँचाया था और कैसे लंबा वक्त गुजरने के बाद वही बच्ची नर्स की वर्दी में उनके सामने खड़ी नजर आई।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने याद किया कि मुख्यमंत्री पद संभालने के शुरुआती दौर में वह कन्या केलवाणी अभियान के तहत सुदूर ग्रामीण इलाकों का दौरा किया करते थे। उनका मकसद बेटियों को स्कूल भेजने के लिए माता-पिता को मनाना था। उस कठिन दौर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि जून महीने की चौवालीस डिग्री वाली चिलचिलाती धूप में वह गाँवों की खाक छानते थे। उन दिनों कई बस्तियों में बिजली की सुविधा चौबीस घंटे नहीं हुआ करती थी और कमरों में पंखे तक नहीं चलते थे। वह खुद उन छोटी बालिकाओं की उंगली थामकर उन्हें पाठशाला तक छोड़कर आते थे और उनके अभिभावकों से पढ़ाई लिखाई के महत्व पर जोर देते थे।

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उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि उस दौर में इन शुरुआती प्रयासों को न तो अखबारों के पन्नों पर बड़ी सुर्खियां मिलती थीं और न ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इसकी कोई खास चर्चा होती थी। हालांकि, जब वह बहुत समय बाद उन इलाकों में दोबारा पहुँचे, तो वही नन्हीं बच्चियां अब बड़ी हो चुकी थीं। वे पुरानी यादें ताजा करने के लिए अपने बचपन की तस्वीरें लेकर उनके पास पहुँचती हैं और बताती हैं कि आप ही वह शख्स हैं जो कभी हाथ पकड़कर स्कूल ले गए थे और आज हम नर्स बनकर अपने पैरों पर खड़ी हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने इस प्रकार के क्षणों को अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी कमाई बताया और कहा कि ये पल साल-दर-साल बीतते समय की गिनती से कहीं ज्यादा दिली सुकून देते हैं। किसी गरीब या वनवासी परिवार की बेटी का इतने वर्षों के अंतराल के बाद इस मुकाम पर मिलना उनके लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने रेखांकित किया कि निस्वार्थ भाव से किया गया जनसेवा का कार्य अक्सर कई वर्षों के बाद सुखद परिणाम लेकर आता है। जनता का स्नेह और आशीर्वाद ही उनके भीतर नई ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार, सत्ता और राजनीति का मूल उद्देश्य केवल और केवल आम नागरिकों की बेहतरी के लिए काम करना होना चाहिए।

सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भावुक किस्सा कहाँ सुनाया?
उन्होंने यह संस्मरण गुजरात के नवसारी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए साझा किया।
यह घटना उनके जीवन के किस कार्यकाल से जुड़ी है?
यह घटना उनके गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के शुरुआती वर्षों की है।
जिस बच्ची का जिक्र किया गया, वह अब क्या बन चुकी है?
वर्षों पहले स्कूल जाने के लिए प्रेरित की गई वह आदिवासी बच्ची अब नर्स बन चुकी है और अपनी पढ़ाई के अंतिम वर्ष में है।
उस समय बेटियों को पढ़ाने के लिए कौन सा अभियान चलाया गया था?
उस दौरान गांवों में 'कन्या केलवाणी अभियान' चलाया गया था जिसके तहत बेटियों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जाता था।
प्रधानमंत्री के अनुसार सार्वजनिक जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या होना चाहिए?
उनके अनुसार राजनीति और सार्वजनिक पद का अंतिम उद्देश्य नागरिकों की सेवा करना होना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·26 मिनट पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नवसारी में साझा किया गया यह संस्मरण कन्या केलवाणी अभियान जैसे जमीनी प्रयासों के दीर्घकालिक सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों को रेखांकित करता है। जब दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के बीज बोए जाते हैं, तो उनका परिणाम दशकों बाद एक सशक्त पीढ़ी के रूप में सामने आता है। यह रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे शुरुआती प्रशासनिक और जन-जागरूकता के प्रयास बिना मीडिया कवरेज के भी समाज में एक स्थाई और सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं, जो अंततः नीति निर्माताओं और जनता के बीच के भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 मिनट पहले

इस संस्मरण से यह भी स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक नीतियां किस प्रकार आपराधिक मामलों और सुरक्षा जोखिमों को कम करती हैं। जब दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार होता है, तो बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा होती है और वे अपराध या शोषण का शिकार होने से बचती हैं। इस तरह के दीर्घकालिक सामाजिक सुधार अंततः एक सुरक्षित और न्यायसंगत कानून-व्यवस्था की नींव रखते हैं, जो समाज में अपराध दर को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।

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