सार्वजनिक जीवन के अपने पुराने सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नवसारी में आयोजित एक विशाल जनसभा में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल से जुड़ा एक बेहद मार्मिक प्रसंग देश के सामने रखा। उन्होंने उस वाकये का जिक्र किया जब उन्होंने एक साधारण आदिवासी परिवार की नन्हीं बेटी का हाथ पकड़कर उसे पहली बार शिक्षा के मंदिर तक पहुँचाया था और कैसे लंबा वक्त गुजरने के बाद वही बच्ची नर्स की वर्दी में उनके सामने खड़ी नजर आई।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने याद किया कि मुख्यमंत्री पद संभालने के शुरुआती दौर में वह कन्या केलवाणी अभियान के तहत सुदूर ग्रामीण इलाकों का दौरा किया करते थे। उनका मकसद बेटियों को स्कूल भेजने के लिए माता-पिता को मनाना था। उस कठिन दौर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि जून महीने की चौवालीस डिग्री वाली चिलचिलाती धूप में वह गाँवों की खाक छानते थे। उन दिनों कई बस्तियों में बिजली की सुविधा चौबीस घंटे नहीं हुआ करती थी और कमरों में पंखे तक नहीं चलते थे। वह खुद उन छोटी बालिकाओं की उंगली थामकर उन्हें पाठशाला तक छोड़कर आते थे और उनके अभिभावकों से पढ़ाई लिखाई के महत्व पर जोर देते थे।
उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि उस दौर में इन शुरुआती प्रयासों को न तो अखबारों के पन्नों पर बड़ी सुर्खियां मिलती थीं और न ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इसकी कोई खास चर्चा होती थी। हालांकि, जब वह बहुत समय बाद उन इलाकों में दोबारा पहुँचे, तो वही नन्हीं बच्चियां अब बड़ी हो चुकी थीं। वे पुरानी यादें ताजा करने के लिए अपने बचपन की तस्वीरें लेकर उनके पास पहुँचती हैं और बताती हैं कि आप ही वह शख्स हैं जो कभी हाथ पकड़कर स्कूल ले गए थे और आज हम नर्स बनकर अपने पैरों पर खड़ी हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने इस प्रकार के क्षणों को अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी कमाई बताया और कहा कि ये पल साल-दर-साल बीतते समय की गिनती से कहीं ज्यादा दिली सुकून देते हैं। किसी गरीब या वनवासी परिवार की बेटी का इतने वर्षों के अंतराल के बाद इस मुकाम पर मिलना उनके लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने रेखांकित किया कि निस्वार्थ भाव से किया गया जनसेवा का कार्य अक्सर कई वर्षों के बाद सुखद परिणाम लेकर आता है। जनता का स्नेह और आशीर्वाद ही उनके भीतर नई ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार, सत्ता और राजनीति का मूल उद्देश्य केवल और केवल आम नागरिकों की बेहतरी के लिए काम करना होना चाहिए।





















