मणिपुर में एनआरसी की मांग को लेकर दो दिवसीय शटडाउन, इंफाल घाटी में ठप रहा जनजीवनदिल्ली में मशहूर संगीतकार रवि डे का निधन, पांच दिनों तक कमरे में सड़ता रहा शवओडिशा में बाढ़ का तांडव, मोहन चरण माझी सरकार ने 1000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का किया ऐलानहॉकी वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान महामुकाबले का क्रेज, वेगनेर स्टेडियम के सभी 10,000 टिकट सोल्ड आउटश्रीमांत फाउंडेशन ने बाढ़ पीड़ितों के बच्चों के लिए शुरू किया प्रोजेक्ट सारथीडोनाल्ड ट्रंप के बयान पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया, भारतीय चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता वैश्विक स्तर पर स्थापितदिल्ली प्रीमियर लीग में खौफनाक हादसा, स्ट्रेट ड्राइव सीधा चेहरे पर लगने से आईसीयू में पहुंचे अंपायरब बलूचिस्तान के बंजर रेगिस्तान में छिपा है पाकिस्तान की किस्मत बदलने वाला खजाना, 94 फीसदी हिस्से में अब तक नहीं पड़ी किसी की नजरशाहरुख खान के बंगले मन्नत में मिले दो सांप, धामन नस्ल का जीव रेस्क्यूपाकिस्तान जल रहा है, खैबर पख्तूनख्वा से बलूचिस्तान तक सरकारी नियंत्रण खत्म: मौलाना फजलुर रहमान
अहमदाबाद पुलिस ने किया 'बॉस स्कैम' का भंडाफोड़, चीन और पाकिस्तान से जुड़े मिले साइबर ठगी के तारगुजरात
18 अग॰ 2026, 7:15 pm (3 घंटे पहले)· 2

अहमदाबाद पुलिस ने किया 'बॉस स्कैम' का भंडाफोड़, चीन और पाकिस्तान से जुड़े मिले साइबर ठगी के तार

अहमदाबाद पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है जो पाकिस्तान और चीन के ऑपरेटरों को डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराता था। इस मामले में पश्चिम बंगाल से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने एक हाई-प्रोटिफ़ाइल और बड़े पैमाने पर चल रहे 'बॉस स्कैम' साइबर क्राइम नेटवर्क का सनसनीखेज खुलासा किया है। यह सिंडिकेट सीधे तौर पर पाकिस्तान और चीन में बैठे साइबर अपराधियों को अवैध गतिविधियों के लिए जरूरी तकनीकी ढांचा और सेवाएं प्रदान कर रहा था। जांच में सामने आया है कि इस बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के तार सरहद पार तक फैले हुए हैं और आरोपी पिछले चार से पांच वर्षों से इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे थे। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल से दो संदिग्धों को धर दबोचा है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में भी सुराग तलाशने के लिए व्यापक स्तर पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

पश्चिम बंगाल से हुई दो आरोपियों की गिरफ्तारी

इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस के हाथ लगे दोनों मुख्य आरोपियों की पहचान इमरान अली पियाड़ा और इंजामुल के रूप में की गई है। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने इनके कब्जे से कुल सात मोबाइल फोन बरामद किए, जिनमें तीन स्मार्टफोन और चार साधारण कीपैड वाले मोबाइल फोन शामिल थे। इन सभी मोबाइलों में सिम कार्ड सक्रिय पाए गए। इसके अलावा तलाशी के दौरान पुलिस ने एक इंटरनेट राउटर भी अपने कब्जे में लिया है, जिसका इस्तेमाल इस अवैध नेटवर्क को संचालित करने के लिए किया जा रहा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

इस्लामाबाद से संचालित हो रहा था कॉल सेंटर

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि यह आपराधिक गिरोह चीन और पाकिस्तान में सक्रिय साइबर हमलावरों को तकनीकी बुनियादी ढांचा और सहायता दे रहा था। कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि ये लोग स्थानीय स्तर पर सिम कार्ड खरीदते थे और उन्हें विदेशी ऑपरेटरों तक पहुंचाते थे। इसके बाद चीनी मैलवेयर का इस्तेमाल करके इस्लामाबाद से चलाए जा रहे अवैध कॉल सेंटर्स को इन नंबरों से जोड़ा जाता था। यदि कोई पीड़ित अपराधी द्वारा भेजे गए किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर देता था, तो ये शातिर अपराधी गैर-कानूनी तरीके से रकम ट्रांसफर करने में सफल हो जाते थे। इस स्कैम का दायरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस एक ही ग्रुप के खिलाफ देश के 26 अलग-अलग राज्यों में कुल 251 शिकायतें पहले से ही दर्ज हैं। अपनी इन अवैध गतिविधियों के लिए इस सिंडिकेट ने कुल 4,500 सिम कार्ड खरीदे थे।

ओटीपी बेचने का चल रहा था बड़ा कारोबार

खुलासा हुआ है कि यह गिरोह साइबर अपराधियों को वन-टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी उपलब्ध कराने के काले कारोबार में भी गहराई से लिप्त था। कमिश्नर ने जानकारी दी कि इन लोगों ने अब तक लगभग 21,000 ओटीपी विभिन्न अपराधियों को मुहैया कराए हैं। सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने और खुद को बचाने के लिए इन लोगों ने टेलीग्राम ऐप का इस्तेमाल बंद कर दिया था और अपना पूरा नेटवर्क व्हाट्सएप ग्रुपों पर शिफ्ट कर लिया था। आरोपी प्रत्येक ओटीपी के एवज में सौ रुपए वसूलते थे। पुलिस की शुरुआती छानबीन से एक गहरे अंतरराष्ट्रीय संबंध और साजिश का पर्दाफाश हुआ है। जांच में यह भी पता चला कि इस गिरोह ने अपने डिजिटल नेटवर्क से लैपटॉप और मोबाइल फोन समेत कुल लगभग 10,000 उपकरणों को आपस में जोड़ रखा था।

किस तरह कॉरपोरेट कर्मचारियों को बनाया जाता था निशाना

इस तरह की धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए साइबर अपराधी बेहद शातिर तरीके अपनाते थे। वे खुद को भारतीय रिजर्व बैंक अथवा किसी अन्य बड़े सरकारी संस्थान का वरिष्ठ अधिकारी बताकर संपर्क करते थे। इसके बाद किसी कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, निदेशक या अन्य कर्मचारियों को व्हाट्सएप या ईमेल के जरिए एक जिप फाइल भेजी जाती थी। इस फाइल के अंदर एक्जीक्यूटेबल फाइल और सिस्टम लाइब्रेरी फाइल जैसी हानिकारक मैलवेयर फाइलें छिपी होती थीं। जैसे ही पीड़ित कर्मचारी व्हाट्सएप वेब के माध्यम से अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर इस फाइल को खोलता था, अपराधी उस व्हाट्सएप वेब सेशन का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते थे।

व्हाट्सएप प्रोफाइल क्लोन कर दिया जाता था झांसा

कंट्रोल मिलते ही अपराधी कंपनी के असली सीईओ या निदेशक के नाम से अपना मोबाइल नंबर सेव कर लेते थे और उनकी असली प्रोफाइल फोटो लगाकर हूबहू वैसी ही फर्जी प्रोफाइल बना लेते थे। इसके बाद कंपनी के खातों और वित्त विभाग के कर्मचारियों को तत्काल वित्तीय लेनदेन की आवश्यकता बताकर व्हाट्सएप संदेशों के जरिए भारी-भरकम रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए जाते थे। असली बॉस के नंबर को हटाकर ठग का नंबर उसी नाम से सेव कर लिया जाता था, जिससे कर्मचारियों के लिए यह पहचान करना असंभव हो जाता था कि संदेश असली है या फर्जी। इस तरह बिना किसी शक के कर्मचारी पैसे ट्रांसफर कर देते थे। इन कारनामों के लिए फर्जी और डमी सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था।

मुख्य आरोपी इमरान अली पियाड़ा की भूमिका

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक इमरान अली पियाड़ा ने बीए तक की शिक्षा हासिल की है और वह वर्तमान में एयरटेल, जियो, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल जैसी प्रमुख टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के लिए पॉइंट ऑफ सेल के रूप में काम कर रहा था। आरोपी ग्राहकों के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट और संबंधित टेलीकॉम कंपनियों के एप्लीकेशन का दुरुपयोग करके ग्राहकों की जानकारी के बिना उनके नाम पर नए सिम कार्ड हासिल कर लेता था। इसके बाद आर्थिक मुनाफे के लिए वह इन नंबरों को डमी सिम कार्ड के रूप में सक्रिय करवा लेता था। इन डमी सिम कार्डों को अलग-अलग मोबाइलों में डालकर वह साइबर ठगों को डिजिटल संचार व्यवस्था और व्हाट्सएप अकाउंट एक्टिवेट करने के लिए ओटीपी उपलब्ध कराता था।

ओटीपी बेचकर की गई लाखों की कमाई

जांच में पता चला कि आरोपी इमरान केवल साइबर धोखाधड़ी ही नहीं, बल्कि अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स एप्लीकेशन और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के लिए भी डमी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहा था और उनके जरिए मिलने वाले ओटीपी को बेच रहा था। शुरुआती जांच के अनुसार पिछले पांच वर्षों के दौरान उसने ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग के लिए लगभग 21,000 ओटीपी औसतन सौ रुपए प्रति ओटीपी की दर से बेचे, जिससे उसे इक्कीस लाख रुपए से अधिक की अवैध कमाई हुई। इसके अलावा, व्हाट्सएप अकाउंट सक्रिय करने के लिए उसने लगभग 900 ओटीपी औसतन ढाई सौ रुपए प्रति ओटीपी की दर से बेचे, जिससे उसे सवा दो लाख रुपए से ज्यादा की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।

दूसरे आरोपी इंजामुल की संलिप्तता

इस मामले में पकड़े गए दूसरे आरोपी इंजामुल ने भी बीए तक की पढ़ाई की है। पुलिस जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वह सीधे तौर पर साइबर धोखाधड़ी में शामिल अन्य अपराधियों के संपर्क में था और उनके साथ लगातार तालमेल बिठाकर काम कर रहा था। आरोपी ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबरों, डमी सिम कार्डों और व्हाट्सएप आधारित संचार प्रणालियों का नेटवर्क चलाने में सक्रिय सहायता प्रदान की थी। पुलिस का कहना है कि उसने इन अवैध नंबरों के जरिए होने वाली गतिविधियों में अपराधियों का पूरा साथ दिया और इस संगठित अपराध को फैलाने में अहम भूमिका निभाई।

पुलिस की चेतावनी और जनता से अपील

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि पुलिस ने इन सभी संदिग्ध उपकरणों को तकनीकी रूप से निष्क्रिय कर दिया है, जो इस अवैध नेटवर्क के बुनियादी ढांचे के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। आम जनता को आगाह करते हुए उन्होंने नागरिकों से पूरी तरह सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि बिना उचित जांच-पड़ताल किए किसी भी अनजान फाइल को बिल्कुल न खोलें और न ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करें। इस तरह के लिंक ही गैर-कानूनी तरीके से पैसे हड़पने और खातों से रकम ट्रांसफर करने का मुख्य जरिया बनते हैं। इस अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल और इसमें संलिप्त अन्य स्थानीय चेहरों का पता लगाने के लिए आगे की गहन जांच अभी भी जारी है।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

बॉस स्कैम क्या है और यह कैसे काम करता है?
बॉस स्कैम एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध है जिसमें ठग कंपनी के सीईओ या निदेशक की फर्जी प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों से व्हाट्सएप के जरिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
इस मामले में पुलिस ने कितने लोगों को गिरफ्तार किया है?
अहमदाबाद पुलिस ने पश्चिम बंगाल से इस मामले में इमरान अली पियाड़ा और इंजामुल नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
साइबर ठग किस देश से अपना कॉल सेंटर चला रहे थे?
जांच में पता चला है कि इस स्कैम का मुख्य कॉल सेंटर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से संचालित किया जा रहा था।
आरोपी साइबर ठगों को क्या सुविधाएं मुहैया कराते थे?
आरोपी फर्जी और डमी सिम कार्ड के जरिए मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप अकाउंट एक्टिवेशन के लिए ओटीपी और चीनी मैलवेयर आधारित संचार इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराते थे।
आरोपी हर ओटीपी के लिए कितने रुपये वसूलते थे?
आरोपी व्हाट्सएप अकाउंट एक्टिवेट करने के लिए हर ओटीपी के औसतन सौ रुपये से लेकर ढाई सौ रुपये तक वसूलते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR