गुजरात के गांधीनगर जिले में स्थित प्रसिद्ध महुडी जैन तीर्थ में बुधवार की सुबह अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अपने परिजनों संग पहुंचकर विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान उनकी पत्नी डॉ. प्रीति अडानी, बड़े बेटे करण अडानी तथा पुत्रवधू परिधि अडानी भी उनके साथ मौजूद रहीं। जैन संप्रदाय के सबसे पवित्र पर्वों में शामिल पर्यूषण महापर्व के शुरू होने से ठीक पहले अडानी परिवार ने इस पावन स्थल पर माथा टेककर शांति, समृद्धि तथा लोक कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त किया।
पर्यूषण महापर्व की तिथियां और संवत्सरी का आध्यात्मिक महत्व
श्वेतांबर जैन मान्यता के अनुसार, इस वर्ष 8 सितंबर से 15 सितंबर के मध्य पर्यूषण पर्व श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पूरे आठ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में आध्यात्मिक शुद्धि, उपवास, आत्मसंयम और निरंतर प्रभु भक्ति पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस पावन पर्व का समापन 15 सितंबर को संवत्सरी यानी क्षमावाणी के रूप में होता है। संवत्सरी को आत्मा के आत्ममंथन और क्षमा याचना का सर्वोच्च अवसर माना गया है। इस दिन श्रद्धालु अपने पूरे वर्ष के आचरण का पुनरावलोकन करते हैं, जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए समस्त जीवों से क्षमा मांगते हैं और मन में पल रही पुरानी कड़वाहट या मतभेदों को भुलाकर परस्पर क्षमा करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में शांति, करुणा और सौहार्द का विस्तार करना है।
महुडी तीर्थ का इतिहास और श्री घंटाकर्ण महावीर की मान्यता
ऐतिहासिक दस्तावेजों में महुडी को पूर्व काल में मधुपुरी नाम से जाना जाता था। यह स्थान श्वेतांबर जैन संप्रदाय के अत्यंत पावन एवं प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है। इस पावन परिसर में जैन परंपरा के सभी 24 तीर्थंकरों को समर्पित भव्य मंदिर निर्मित हैं। इसके अतिरिक्त, महुडी धाम में श्री घंटाकर्ण महावीर का एक अलग और भव्य मंदिर स्थापित है। जैन धार्मिक परंपरा के अनुसार, श्री घंटाकर्ण महावीर को धर्म एवं श्रद्धालुओं का रक्षक देवता माना जाता है। तीर्थंकरों के वीतराग स्वरूप से इतर घंटाकर्ण महावीर की आराधना संकट निवारक देव के रूप में की जाती है। श्रद्धालु जीवन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने, आत्मबल पाने तथा कार्यों में आने वाली बाधाओं के निवारण हेतु यहां श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करते हैं।
सेवा ही साधना का विचार और सामाजिक सरोकार
गौतम अडानी का महुडी दौरा केवल एक धार्मिक औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन दर्शन को भी व्यक्त करता है, जिसके तहत निस्वार्थ जनसेवा को ही सर्वोपरि साधना माना गया है। यह दृष्टिकोण अडानी समूह के सामाजिक दायित्वों में स्पष्ट झलकता है। अडानी फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, जन स्वास्थ्य, रोजगार सृजन, आजीविका के साधन, ग्रामीण अंचलों के सर्वांगीण विकास, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सामुदायिक ढांचे के निर्माण जैसे अनेक क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया जा रहा है। फाउंडेशन की इन विविध कल्याणकारी योजनाओं से देश के कोने-कोने में लाखों जरूरतमंद लोगों को सीधे सहायता मिली है और उनके जीवन में प्रगति के नए अवसर पैदा हुए हैं।
अमेरिकी कानूनी मामले में मिली बड़ी राहत का संदर्भ
अडानी परिवार की यह तीर्थ यात्रा अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम के तुरंत बाद सामने आई है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा शुरू की गई कानूनी कार्यवाही में गौतम अडानी के साथ-साथ उनके भतीजे एवं अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) के कार्यकारी निदेशक सागर अडानी तथा अन्य अधिकारियों को नामित किया गया था। हालांकि, 10 अगस्त को इस मामले में एक बड़ा मोड़ आया जब अभियोग को 'with prejudice' के कानूनी प्रावधान के तहत पूरी तरह खारिज कर दिया गया। इस निर्णय का सीधा अर्थ यह है कि उसी आधार या उन्हीं आरोपों पर भविष्य में दोबारा कोई कानूनी मामला दर्ज नहीं किया जा सकता, जिससे कंपनी और उसके नेतृत्व को स्थाई कानूनी राहत प्राप्त हुई है।
तरंगा हिल्स की पूर्व यात्रा और निरंतर आध्यात्मिक जुड़ाव
महुडी दर्शन से पहले भी गौतम अडानी अपने परिवार के साथ गुजरात के प्रमुख जैन स्थलों की यात्रा करते रहे हैं। इसी वर्ष अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गौतम अडानी अपनी पत्नी डॉ. प्रीति अडानी के साथ उत्तरी गुजरात में स्थित तरंगा हिल्स गए थे। वहां उन्होंने ऐतिहासिक श्री अजितनाथ भगवान श्वेतांबर जैन देरासर में विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की थी। महुडी में अडानी परिवार ने एक साथ समय व्यतीत करते हुए प्रार्थना, कृतज्ञता और आत्मचिंतन की भावना को बल दिया। भक्ति, करुणा, क्षमा और लोक सेवा का यह संगम अडानी परिवार के आध्यात्मिक मूल्यों को दर्शाता है।



















