जेल में लंबे समय से बंद इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष तीन सदस्यीय पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्वास्थ्य सुरक्षा और मूलभूत मानवीय अधिकारों को ध्यान में रखते हुए इमरान खान को इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने का स्पष्ट निर्देश दिया है। इस न्यायिक आदेश के बाद फैसला देने वाली तीन सदस्यीय पीठ के अध्यक्ष जस्टिस शाहिद वाहीद एकाएक सुर्खियों में आ गए हैं। सात साल पहले लाहौर हाई कोर्ट में रहते हुए एक याचिका पर सुनवाई करने से खुद को अलग करने वाले जस्टिस वाहीद ने अब इस मामले में महत्वपूर्ण राहत दी है।
इलाज के निर्देश और परिवार से बातचीत की अनुमति
जस्टिस शाहिद वाहीद की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने आदेश जारी करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को 48 घंटों के भीतर इमरान खान को अस्पताल में शिफ्ट करने की समयसीमा निर्धारित की है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह कदम एक कैदी की सुरक्षा, स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है। इसके साथ ही उपचार की उचित देखरेख के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने का भी हुक्म दिया गया है, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों के अतिरिक्त इमरान खान के व्यक्तिगत चिकित्सक को भी शामिल करने की छूट प्रदान की गई है। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान इमरान खान को हर सप्ताह अपने पारिवारिक सदस्यों से मुलाकात करने तथा अपने बेटों से टेलीफोन पर बातचीत करने की मंजूरी दी गई है। राजनीतिक दल पीटीआई ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है।
जस्टिस शाहिद वाहीद का न्यायिक करियर और अनुभव
जस्टिस शाहिद वाहीद पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के एक अनुभवी और वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति से पूर्व उन्होंने लाहौर हाई कोर्ट में एक लंबी अवधि तक अपनी सेवाएं दी हैं। उनका न्यायिक करियर मुख्य रूप से सिविल कानून, सेवा मामलों और संवैधानिक व्याख्याओं से जुड़े विषयों पर केंद्रित रहा है। उन्होंने 27 मार्च 2012 को लाहौर हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। इसके पश्चात उनकी न्यायिक दक्षता को देखते हुए 11 नवंबर 2022 को उन्हें पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था।
2019 का अयोग्यता मामला और सुनवाई से हटने की वजह
वर्ष 2019 में जब जस्टिस शाहिद वाहीद लाहौर हाई कोर्ट में कार्यरत थे, तब इमरान खान से जुड़ा एक विवादित मामला उनकी अदालत के समक्ष आया था। उस समय दायर याचिका में 2018 के चुनावी नामांकन पत्रों में अपनी कथित पुत्री टाइरियन व्हाइट से संबंधित जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए इमरान खान को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी। उस दौरान सुनवाई करते हुए जस्टिस शाहिद वाहीद ने व्यक्तिगत व न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से स्वयं को उस मुकदमे की सुनवाई से पृथक कर लिया था। इसके बाद उन्होंने मामले की फाइल को नए सिरे से बेंच गठित करने हेतु मुख्य न्यायाधीश के पास स्थानांतरित कर दिया था। अब सात वर्षों के अंतराल के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ के प्रमुख के रूप में उनके द्वारा दिए गए राहत आदेश ने इमरान खान के इलाज की दिशा में नई राह खोली है।


















