गुजरात के सूरत जिले में स्थित बारडोली तहसील के भेसुदला गांव में बीती रात एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है। यहां भोजन की तलाश में रिहायशी इलाके में घुसे एक खूंखार तेंदुए को कुत्तों के एक निडर झुंड ने उल्टे पांव भागने पर मजबूर कर दिया। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है और लोग रात के समय अपने घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं।
आंगन में सो रहे कुत्तों पर जानलेवा हमला
यह खौफनाक घटना गांव के निशाल फलिया इलाके की है। जानकारी के अनुसार, यहां रहने वाले दीप चौधरी के घर के आंगन में रात के समय कुछ कुत्ते आराम से बैठे हुए थे। तभी अंधेरे का फायदा उठाते हुए एक तेंदुआ वहां आ धमका। इस शिकारी जानवर ने बिना कोई मौका दिए तेजी से झपट्टा मारा और एक कुत्ते को उसकी गर्दन से बुरी तरह दबोच लिया। तेंदुए की पकड़ इतनी मजबूत थी कि शिकार बना कुत्ता खुद को छुड़ाने में पूरी तरह से असमर्थ नजर आ रहा था।
कुत्तों की एकजुटता के आगे पस्त हुआ शिकारी
हालांकि, तेंदुए का यह शिकार उस वक्त उसी पर भारी पड़ गया जब वहां मौजूद बाकी कुत्तों ने एक अभूतपूर्व एकजुटता दिखाई। अपने साथी को मौत के मुंह में जाता देख अन्य कुत्ते वहां से भागे नहीं, बल्कि उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना जोर-जोर से भौंकते हुए तेंदुए को चारों तरफ से घेर लिया। कुत्तों के इस आक्रामक तेवर और भारी शोर-शराबे के कारण घर के अंदर सो रहे सदस्य भी अचानक जाग गए। अंततः कुत्तों के भारी विरोध और लगातार भौंकने से घबराकर तेंदुए को अपना शिकार छोड़ना पड़ा और वह वहां से दुम दबाकर भाग खड़ा हुआ।
सीसीटीवी फुटेज और वन विभाग से गुहार
तेंदुए और कुत्तों के बीच हुई इस पूरी भिड़ंत का मंजर दीप चौधरी के घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है। इस रिकॉर्डिंग के सामने आने के बाद से भेसुदला गांव के निवासियों की रातों की नींद उड़ी हुई है। लगातार मंडरा रहे इस खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल प्रभाव से पिंजरा लगाकर इस जंगली जानवर को पकड़ने की पुरजोर मांग की है, ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी जानलेवा हादसे को टाला जा सके।
कितना खतरनाक होता है तेंदुआ?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार तेंदुआ एक बेहद फुर्तीला और जानलेवा जानवर माना जाता है। एक सामान्य तेंदुए का वजन 30 से 90 किलोग्राम के बीच या कई बार इससे भी अधिक हो सकता है। शारीरिक ताकत के साथ-साथ इसकी दौड़ने की क्षमता भी हैरान करने वाली होती है। यह आसानी से 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से दौड़ सकता है। इसके अलावा, ऊंची छलांग लगाने और घने पेड़ों पर तेजी से चढ़ने में भी इन्हें महारत हासिल होती है। शिकार करते समय इनकी रणनीति बहुत सटीक होती है; ये सीधे गले पर हमला करते हैं और अपने शिकार को तब तक नहीं छोड़ते जब तक कि उसकी जान न निकल जाए। इसके बाद ये अक्सर अपने भोजन को किसी सुरक्षित स्थान पर छिपा देते हैं।
इंसानों और मवेशियों के लिए बढ़ता खतरा
आमतौर पर तेंदुए हिरण, बंदर, सुअर और कुत्तों के साथ-साथ छोटे मवेशियों को अपना निवाला बनाना पसंद करते हैं। लेकिन इनका खतरा सिर्फ जानवरों तक सीमित नहीं है। भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग तेंदुओं के जानलेवा हमलों का शिकार होकर अपनी जान गंवाते हैं। विशेष रूप से जंगलों के किनारे बसे गांवों, चाय बागानों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले निवासियों के लिए ये हमेशा एक गंभीर खतरा बने रहते हैं। रिहायशी इलाकों में तेंदुओं के घुसने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि कुछ समय पहले IIT बॉम्बे का एक सीसीटीवी सामने आया था, जिसमें एक तेंदुआ सीधे हॉस्टल के अंदर घुस गया था और उसने वहां एक कुत्ते का शिकार कर लिया था।



















