हरियाणा के अंबाला में मानसून और बदलते मौसम के बीच मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप अचानक बढ़ता दिखाई दे रहा है। पिछले चार वर्षों से मलेरिया मुक्त बनने की दिशा में लगातार प्रगति कर रहे इस जिले में अब तक मलेरिया के 8 नए मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसके साथ ही डेंगू का भी 1 मरीज सामने आया है। इन मामलों की पुष्टि होते ही स्थानीय स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गया है और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य दल तैनात कर दिए गए हैं। विभाग की टीम घर-घर जाकर नागरिकों की सेहत की जांच कर रही है और लोगों को जलभराव से बचने के प्रति जागरूक कर रही है।
बाहरी यात्राओं से जुड़े मलेरिया के अधिकांश मामले
स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए व्यापक सर्वेक्षण और आंकड़ों के विश्लेषण से यह तथ्य उजागर हुआ है कि अंबाला में सामने आए मलेरिया के 8 मरीजों में से 7 मरीजों का हालिया यात्रा इतिहास रहा है। यह देखा गया है कि संक्रमण की चपेट में आए ये लोग हाल ही में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों अथवा कांवड़ यात्रा से वापस लौटे थे। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं, मुरादाबाद और सीतापुर जैसे क्षेत्रों का दौरा करके लौटे लोगों में मलेरिया का संक्रमण पाया गया है। इसके अतिरिक्त कुछ मरीज ऐसे भी हैं जो कांवड़ यात्रा संपन्न करके वापस घर पहुंचे थे। इस प्रकार जिले में फैले मलेरिया के मामलों का मुख्य स्रोत बाहरी राज्यों और यात्राओं से जुड़ा हुआ पाया गया है।
नयागांव में बिना यात्रा इतिहास वाले मरीज के घर मिला मच्छरों का लार्वा
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के सामने 1 मामला ऐसा भी आया है जिसमें मरीज ने हाल के दिनों में किसी भी स्थान की कोई यात्रा नहीं की थी। यह मरीज अंबाला के नयागांव इलाके का निवासी है। जब स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीम जांच के सिलसिले में मरीज के आवास पर पहुंची, तो वहां का दृश्य चौंकाने वाला था। घर के भीतर रखी एक बाल्टी में बारिश का पानी कई दिनों से जमा पड़ा था, जिसमें भारी मात्रा में मच्छरों के लार्वा पनप रहे थे। लंबे समय तक पानी खड़ा रहने के कारण मच्छरों को प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण मिल गया। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग के लिए लोगों को घरों में साफ-सफाई और जलभराव रोकने के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित कर दिया है।
नगर निगम को फॉगिंग और निगरानी तेज करने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव सिंगला ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष तेज गर्मी पड़ने और अपेक्षाकृत कम वर्षा होने के कारण डेंगू के प्रसार पर काफी हद तक अंकुश लगा हुआ है और वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बनी हुई है। इसके बावजूद प्रशासन किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं है। मलेरिया और डेंगू के संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए नगर निगम को शहर के विभिन्न इलाकों में नियमित फॉगिंग करवाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें संभावित संवेदनशील इलाकों में जाकर हर बुखार पीड़ित व्यक्ति की थर्मल एवं रक्त जांच कर रही हैं। इसके साथ ही पानी के बर्तनों, कूलरों, गमलों और छतों पर बनी पानी की टंकियों की सघन जांच के लिए लार्वा चेकिंग अभियान भी जोर-शोर से चलाया जा रहा है।
लापरवाही बन सकती है जानलेवा, महत्वपूर्ण अंगों को हो सकता है नुकसान
डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव सिंगला के अनुसार, मलेरिया को एक सामान्य बीमारी मानकर नजरअंदाज करना गंभीर भूल साबित हो सकता है। मलेरिया से पीड़ित मरीज में आमतौर पर काफी तेज बुखार आना, सिर में असहनीय दर्द होना, उल्टी की शिकायत होना और शरीर में तेज कंपकंपी छूटने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यदि समय पर इसका उपचार न कराया जाए, तो यह स्थिति शरीर के प्रमुख आंतरिक अंगों को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। मलेरिया का परजीवी मनुष्य के शरीर में प्रवेश करके सीधे लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है और उन्हें नष्ट कर देता है। कोशिकाओं के नष्ट होने से शरीर में खून की अत्यधिक कमी हो जाती है, जिसके कारण मरीज को हर समय भारी थकान महसूस होती है, मांसपेशियों में ऐंठन आती है और कई बार बेहोशी की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है।
मस्तिष्क और गर्भावस्था पर मलेरिया का गंभीर प्रभाव
चिकित्सकों का कहना है कि यदि रक्त में मौजूद यह परजीवी समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो यह खून के बहाव के साथ मस्तिष्क और शरीर के अन्य संवेदनशील हिस्सों तक पहुंच जाता है। मस्तिष्क तक संक्रमण पहुंचने पर स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो सकती है। इसके अतिरिक्त, गर्भवती महिलाओं के लिए मलेरिया का संक्रमण दोगुना खतरनाक माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान मलेरिया होने पर न केवल मां की जान जोखिम में पड़ जाती है, बल्कि गर्भस्थ भ्रूण और जन्म लेने वाले नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर भी बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है। डॉक्टर सिंगला ने नागरिकों से अपील की है कि बुखार का कोई भी लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार के भरोसे न बैठें और तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जाकर अपनी जांच करवाएं।





















