राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार के लिए इस समय सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा राज्य के नगरीय निकाय चुनाव बने हुए हैं। प्रदेश के सभी 309 नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव संपन्न कराने के लिए दो चरणों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है। इस चुनावी महासमर को 'वन नेशन-वन इलेक्शन' की तर्ज पर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री खुद शहर-दर-शहर घूमकर रोड शो कर रहे हैं और प्रचार की कमान संभाले हुए हैं।
309 निकायों का विस्तृत गणित और चुनाव कार्यक्रम
राज्य निर्वाचन प्रक्रिया के तहत पहले चरण का मतदान आज 162 नगरीय निकायों में चल रहा है, जिसके बाद दूसरे चरण में शेष 147 निकायों में 11 सितंबर को वोट डाले जाएंगे। दोनों चरणों की मतगणना 14 सितंबर को होगी, जिसके बाद नतीजों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। भजनलाल सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार प्रदेश की सभी 309 शहरी निकायों के चुनाव एक साथ कराए जा रहे हैं। इन चुनावों के जरिए राज्य के स्थानीय शहरी प्रशासन का नया ढांचा तैयार होगा।
इन 309 नगरीय निकायों के नतीजों से प्रदेश के 10 प्रमुख नगर निगमों में मेयर का चुनाव किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 47 नगर परिषदों में सभापति और 252 नगर पालिकायों में अध्यक्ष चुने जाएंगे। इस विशाल चुनावी प्रक्रिया का सीधा असर राज्य की भावी राजनीति पर पड़ेगा, क्योंकि निकाय चुनावों के तुरंत बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव आयोजित किए जाने हैं। यही कारण है कि सत्तारूढ़ बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ही शहरी क्षेत्रों में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं ताकि आगामी ग्रामीण चुनावों में इसका रणनीतिक लाभ उठाया जा सके।
जयपुर का परकोटा, रोड शो और ध्रुवीकरण की राजनीति
चुनाव प्रचार के अंतिम क्षणों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक परकोटा इलाके में एक विशाल रोड शो का नेतृत्व किया। जयपुर शहर के 149 वार्डों में चुनाव लड़ रहे बीजेपी के पार्षद प्रत्याशियों के समर्थन में मुख्यमंत्री ने खुद जनता से वोट देने की अपील की। जयपुर का परकोटा क्षेत्र और जोधपुर जैसे अन्य बड़े शहर अपनी मिश्रित आबादी के लिए जाने जाते हैं, जहां सामाजिक और राजनीतिक संवेदनशीलता हमेशा बनी रहती है।
प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ने ध्रुवीकरण के मुद्दों को खुले तौर पर उठाया। उन्होंने अपनी सरकार द्वारा लाए गए डिस्टर्ब एरिया एक्ट बिल का प्रमुखता से जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून के जरिए जयपुर और अन्य प्रमुख शहरों में जबरन पलायन को सख्ती से रोका जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग नागरिकों को पलायन के लिए मजबूर करेंगे, उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी मौजूदा सरकार ने इस पर कड़ा अंकुश लगाया है और इसे अपनी एक बड़ी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने रखा है।
बीजेपी हाईकमान की सीधी नजर और संगठन की रणनीति
ढाई साल के शासनकाल के बाद हो रहे इन शहरी निकाय चुनावों पर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व भी बेहद बारीक नजर बनाए हुए है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी एल संतोष ने खुद जयपुर में डेरा डालकर वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें की हैं। संगठन ने चुनावों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए केंद्रीय प्रभारियों और विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CHP) के हालिया आंदोलन और निकट भविष्य में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी हाईकमान इन निकाय चुनावों को पार्टी की जनप्रियता के लिटमस टेस्ट के रूप में देख रहा है।
पार्टी के भीतर और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह आम सहमति है कि ये चुनाव सिर्फ शहरी निकायों के प्रतिनिधि चुनने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की व्यक्तिगत साख और उनकी सरकार के ढाई साल के विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड भी हैं। चुनाव परिणाम न केवल मुख्यमंत्री की राजनीतिक स्थिति को तय करेंगे, बल्कि राज्य सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ बीजेपी नेताओं के जनाधार और साख पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।



















