भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में वर्तमान समय में 115 अरब डॉलर यानी लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की भारी सरप्लस नकदी मौजूद है। बैंकों के पास उनकी दैनिक आवश्यकताओं से काफी अधिक धन उपलब्ध होने के कारण वित्तीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इस स्थिति से निपटने और बैंकिंग प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने एक विशेष फॉरेन एक्सचेंज स्वैप ऑफर पेश किया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत केंद्रीय बैंक व्यावसायिक बैंकों से अतिरिक्त रुपया प्राप्त करके उन्हें अमेरिकी डॉलर प्रदान करेगा, और तय समयसीमा समाप्त होने पर डॉलर वापस लेकर रुपया लौटा देगा।
डॉलर-रुपया स्वैप प्रक्रिया और ब्याज की शर्तें
आरबीआई ने नकदी प्रबंधन के तहत तीन महीने की अवधि के लिए डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा जारी की है। इसमें 17 आधार अंकों की बढ़ोतरी के साथ 2.9 फीसदी का ऑफर शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, छह महीने की स्वैपिंग व्यवस्था पर 11 आधार अंक अधिक देने की घोषणा की गई है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों के पास जमा अतिरिक्त नकदी को अस्थायी रूप से वापस लेने के लिए एक महीने का विकल्प भी उपलब्ध कराया है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बैंकों को दी जाने वाली राशि पर ब्याज का भुगतान किया जाएगा, जिसके बाद निर्धारित अवधि बीतने पर आरबीआई फिर से डॉलर लेकर मूल रुपया बैंकों को हस्तांतरित कर देगा।
सरप्लस नकदी सोखना क्यों बना आवश्यक?
बैंकिंग प्रणाली से 11 लाख करोड़ रुपये की विशाल धनराशि को वापस निकालना कई आर्थिक कारणों से बेहद जरूरी हो गया था। यदि यह अतिरिक्त सरप्लस नकदी बैंकों के पास ही बनी रहती, तो बैंकों पर धन को किसी भी तरह बाजार में खपाने का अनुचित दबाव बढ़ता। ऐसी स्थिति में बैंक बिना समुचित जोखिम मूल्यांकन के बेहद सस्ती दरों पर कर्ज बांटने के लिए बाध्य हो सकते थे। अर्थव्यवस्था में अनियंत्रित तरीके से नकदी का प्रवाह बढ़ने से महंगाई दर में तेज उछाल आने का गंभीर खतरा पैदा हो जाता, जिसे रोकने के लिए आरबीआई को यह कदम उठाना पड़ा।
बैंकों की कमाई और आम नागरिकों पर असर
रिजर्व बैंक की इस पहल से व्यावसायिक बैंकों को दोहरे लाभ हासिल होंगे। एक तरफ जहां उनके बैलेंस शीट से अतिरिक्त नकदी का भारी दबाव समाप्त हो जाएगा, वहीं दूसरी तरफ आरबीआई से मिलने वाले ब्याज के माध्यम से बैंकों की अतिरिक्त कमाई भी होगी। आम जनता के नजरिए से देखें तो बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त तरलता रहने से कर्ज मिलने की शर्तें आसान होती हैं, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि को गति मिलती है। हालांकि, सरप्लस नकदी की अधिकता के कारण बैंकों द्वारा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में कटौती किए जाने की संभावना भी बढ़ जाती है।



















