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नशे के खिलाफ 1500 किमी के सफर पर निकले 77 वर्षीय स्वामी नरेशानंद सैनाचार्य, अंबाला से होकर दिल्ली पहुंचेगा रथहरियाणा
4 अक्तू॰ 2026, 1:26 pm (1 घंटे पहले)· 0

नशे के खिलाफ 1500 किमी के सफर पर निकले 77 वर्षीय स्वामी नरेशानंद सैनाचार्य, अंबाला से होकर दिल्ली पहुंचेगा रथ

पानीपत से शुरू हुई नशा मुक्ति अभियान यात्रा अब अंबाला पहुंच चुकी है, जहां 77 वर्षीय स्वामी नरेशानंद सैनाचार्य युवाओं को नशे से बचाने के लिए 1500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर रहे हैं।

मादक पदार्थों के बढ़ते प्रभाव और युवाओं पर इसके गंभीर असर को रोकने के लिए आमतौर पर संगोष्ठियां और औपचारिक सभाएं आयोजित की जाती हैं, लेकिन हरियाणा की सड़कों पर इस समय एक बिल्कुल अनूठी जमीनी मुहिम देखने को मिल रही है। पानीपत की धरती से शुरू हुई एक विशेष यात्रा में संदेशों और श्लोकों से सजा हुआ एक भव्य रथ आगे बढ़ रहा है। इस अभियान की अगुवाई 77 वर्षीय स्वामी नरेशानंद सैनाचार्य कर रहे हैं, जो अपनी वृद्धावस्था की परवाह किए बिना गांव-गांव और कस्बों में सीधे युवाओं से संपर्क साध रहे हैं। उनका एकमात्र ध्येय आने वाली पीढ़ी को मादक पदार्थों के अंधकार से बाहर निकालना और उन्हें जीवन भर नशा न करने का संकल्प दिलाना है।

पानीपत से अंबाला तक सेवा संकल्प यात्रा का सफर

सनातन संस्कृति जागृति ट्रस्ट के मार्गदर्शन में संचालित ‘सेवा संकल्प-नशा मुक्ति अभियान यात्रा’ विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए अब अंबाला पहुंच चुकी है। स्वामी नरेशानंद के साथ उनके समर्पित साथियों का समूह लगातार बस्तियों और चौराहों पर आमजन को मादक पदार्थों के सामाजिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान से अवगत करा रहा है। स्वामी नरेशानंद सैनाचार्य का कहना है कि नशा केवल एक व्यक्ति के स्वास्थ्य को नष्ट नहीं करता, बल्कि यह पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से बर्बाद कर देता है। उनका मानना है कि यदि युवाओं को प्रारंभिक स्तर पर ही सही जानकारी और मार्गदर्शन मिले, तो वे किसी भी गलत आदत के शिकार होने से पहले उसके विनाशकारी परिणामों को भली-भांति समझ सकेंगे।

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युवाओं को बचाने का संकल्प और यात्रा का स्वरूप

इस पूरी मुहिम के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए स्वामी नरेशानंद सैनाचार्य ने बताया कि 77 वर्ष की अवस्था में उनका यह प्रयास किसी निजी प्रचार या स्वार्थ के लिए नहीं है। यह केवल युवाओं के भविष्य को बचाने की गहरी चिंता से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि यह यात्रा पानीपत से रवाना हुई है और अपने पूरे मार्ग में कुल 1500 किलोमीटर से अधिक का फासला तय करेगी। यात्रा के मार्ग में जितने भी ग्रामीण इलाके और शहरी केंद्र आ रहे हैं, वहां सीधे स्थानीय निवासियों और विशेष रूप से किशोरों व नौजवानों से मुलाकात की जा रही है।

इस अभियान दल में लगभग 10 से 12 लोगों की एक सक्रिय टोली शामिल है, जिनके साथ चार से पांच वाहन लगातार चल रहे हैं। इनमें से एक मुख्य वाहन को विशेष तौर पर एक आकर्षक रथ के ढांचे में तब्दील किया गया है। इस रथ की दीवारों पर नशे के दुष्प्रभावों और उससे मुक्ति के प्रेरक श्लोक तथा संदेश बड़े अक्षरों में अंकित किए गए हैं, जिससे सड़क किनारे खड़े लोग और राहगीर उन्हें आसानी से पढ़ सकें। जब भी यह काफिला किसी स्थान पर रुकता है, स्वामी नरेशानंद सीधे युवाओं से मुखातिब होते हैं और उन्हें नशे की बुराइयों से हमेशा दूर रहने की शपथ दिलाते हैं।

आश्रम से निकलकर सीधे जनता के बीच जाने का कारण

स्वामी नरेशानंद ने बताया कि उनके आश्रम में अक्सर ऐसे असहाय माता-पिता और परिजन पहुंचते हैं, जिनके घर के बच्चे मादक पदार्थों की लत का शिकार हो चुके होते हैं। ऐसे परिवारों का रुदन और उनकी गहरी चिंता देखकर उनका मन व्यथित हो जाता था। लगभग हर परेशान परिवार की सबसे बड़ी पीड़ा यही थी कि उनका होनहार बेटा नशे के चंगुल में फंसकर अपना जीवन तबाह कर रहा है। आश्रम की चारदीवारी के भीतर पीड़ित परिवारों की यह व्यथा सुनने के बाद उन्होंने महसूस किया कि केवल आश्रम में बैठकर उपदेश देने या पीड़ितों के आने की प्रतीक्षा करने से बदलाव नहीं आएगा। असल जरूरत इस बात की है कि संन्यासी स्वयं आश्रम छोड़कर बाहर निकलें और सीधे उन बस्तियों तक पहुंचे जहां युवा रहते हैं। इसी प्रेरणा से उन्होंने इस लंबी यात्रा पर निकलने का फैसला किया।

चंडीगढ़ में ज्ञापन और दिल्ली के जंतर-मंतर तक की रूपरेखा

इस अभियान के माध्यम से स्वामी नरेशानंद युवाओं को आध्यात्मिक मूल्यों और नैतिक विचारों से जोड़ने पर भी विशेष बल दे रहे हैं। उनका स्पष्ट विचार है कि जब देश की युवा पीढ़ी अपनी ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाएगी, तभी वह अपने परिवार और पूरे समाज के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर पाएगी। इस यात्रा का शुभारंभ पानीपत में कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल के प्रतिनिधि द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया था।

अंबाला के बाद यह कारवां सीधे चंडीगढ़ पहुंचेगा। चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्यपाल को नशे की रोकथाम के संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन सौंपने की तैयारी की गई है। इसके पश्चात यह यात्रा वाघा बॉर्डर, अमृतसर, लुधियाना, बठिंडा, पटियाला, हिसार, कैथल और नारनौल जैसे प्रमुख शहरों और कस्बों से गुजरते हुए देश की राजधानी दिल्ली पहुंचेगी।

जंतर-मंतर पर केंद्र सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचकर इस अभियान दल द्वारा भारत सरकार के समक्ष एक औपचारिक निवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। इस ज्ञापन के जरिए मांग की जाएगी कि देश में नशा मुक्ति को व्यापक स्तर पर लागू करने और मादक पदार्थों की गैर-कानूनी तस्करी को जड़ से समाप्त करने के लिए अत्यधिक कठोर और प्रभावी कदम उठाए जाएं। दिल्ली में अपनी आवाज बुलंद करने के बाद यह यात्रा वापस अपने उद्गम स्थल पानीपत पहुंचेगी, जहां इसका औपचारिक समापन होगा।

स्वामी नरेशानंद सैनाचार्य का दृढ़ विश्वास है कि युवा शक्ति ही किसी भी राष्ट्र की असली नींव और रीढ़ होती है। यदि नींव कमजोर होगी, तो राष्ट्र की प्रगति बाधित हो जाएगी। इसलिए हर वर्ग और समाज को मिलकर नशे के इस जाल को तोड़ना होगा। उनका यह भी स्पष्ट संदेश है कि नशा विरोधी प्रचार सिर्फ सम्मेलनों और भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे हर उस गली और चौराहे तक पहुंचना चाहिए जहां युवाओं को सही दिशा और संबल की आवश्यकता है।

सवाल-जवाब

सेवा संकल्प-नशा मुक्ति अभियान यात्रा का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस यात्रा का नेतृत्व 77 वर्षीय स्वामी नरेशानंद सैनाचार्य कर रहे हैं।
यह यात्रा कहां से शुरू हुई और कुल कितनी दूरी तय करेगी?
यह यात्रा पानीपत से शुरू हुई है और 1500 किलोमीटर से अधिक का सफर तय करेगी।
पानीपत में इस यात्रा को किसने हरी झंडी दिखाई थी?
पानीपत में कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल के प्रतिनिधि ने हरी झंडी दिखाकर इस यात्रा को रवाना किया था।
इस यात्रा का संचालन किस संस्था के सहयोग से हो रहा है?
यह यात्रा सनातन संस्कृति जागृति ट्रस्ट के सौजन्य से आयोजित की जा रही है।
यात्रा के काफिले में कितने लोग और वाहन शामिल हैं?
काफिले में लगभग 10 से 12 लोगों की टोली, चार से पांच गाड़ियां और एक विशेष नशा विरोधी संदेशों से सजा रथ शामिल है।
चंडीगढ़ में यात्रा का क्या कार्यक्रम तय किया गया है?
चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्यपाल को नशे के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपने की योजना है।
यात्रा किन प्रमुख स्थानों से होकर दिल्ली पहुंचेगी?
यह यात्रा वाघा बॉर्डर, अमृतसर, लुधियाना, बठिंडा, पटियाला, हिसार, कैथल और नारनौल होते हुए दिल्ली पहुंचेगी।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर क्या मांग रखी जाएगी?
जंतर-मंतर पर भारत सरकार के समक्ष नशा मुक्ति और मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग का निवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·अभी

77 साल की उम्र में इतनी लंबी यात्रा करना और युवाओं से मिलना वाकई बड़ी बात है, लेकिन सिर्फ रथ और श्लोकों से ड्रग्स का यह जाल कितना टूटेगा, इस पर थोड़ा शक है।

Rohan Verma@rohan-verma·अभी

करण भाई, बात तो सही है आपकी, सिर्फ रथ से सब ठीक नहीं होगा। पर कम से कम बुढ़ापे में कोई सड़क पर तो उतरा युवाओं को बचाने!

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