राजस्थान के पश्चिमी अंचल में सूखे और जल संकट की गंभीर परिस्थितियों के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिव विधानसभा क्षेत्र के विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में अकाल से जूझ रहे ग्रामीणों और पशुपालकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सत्तापक्ष के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बाड़मेर जिले के बाछड़ाऊ आगमन के बाद विधायक ने इस दौरे के नतीजों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंचायती राज चुनाव से ठीक पहले आयोजित इस सरकारी कार्यक्रम में करोड़ों रुपये का भारी-भरकम खर्च किया गया, लेकिन संकट झेल रहे आम लोगों और पशुपालकों के हाथ पूरी तरह खाली रहे। जनता को इस यात्रा से ठोस आर्थिक और प्रशासनिक मदद की आस थी, परंतु जमीनी स्तर पर राहत देने के लिए कोई प्रभावी कदम सामने नहीं आए।
राहत घोषणाओं पर सवाल और 10 अक्टूबर का कड़ा अल्टीमेटम
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने साफ किया कि बाड़मेर और जैसलमेर के ग्रामीण इलाके इस वक्त भीषण अकाल के दौर से गुजर रहे हैं। बारिश की कमी से किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों के भरण-पोषण की विकट चुनौती पैदा हो गई है। ऐसे विकट समय में मुख्यमंत्री से व्यापक सूखा राहत पैकेज की उम्मीद की जा रही थी। इसके विपरीत, पूरे आयोजन पर करोड़ों खर्च करने के बावजूद राहत कार्य के नाम पर केवल एक करोड़ रुपये की मामूली राशि की घोषणा की गई, जिसे उन्होंने नाकाफी और ऊंट के मुंह में जीरा करार दिया। विधायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल कागजी घोषणाओं और आश्वासनों से लोगों का ध्यान भटका रहा है, जबकि धरातल पर किसी भी मदद की मौजूदगी नजर नहीं आ रही है।
पशुधन को बचाने के लिए शुरू की जाने वाली व्यवस्थाओं पर बात करते हुए विधायक ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने पशु शिविरों के संचालन को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना या रूपरेखा अब तक सार्वजनिक नहीं की है। भाटी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने 10 अक्टूबर तक बाड़मेर जिले के भीतर पशु शिविर और चारा डिपो विधिवत रूप से शुरू नहीं किए, तो वे जनता के साथ मिलकर जिला कलेक्ट्रेट का विशाल घेराव करेंगे। उन्होंने मांग रखी कि बाड़मेर के साथ-साथ जैसलमेर में भी बिना समय गंवाए चारा डिपो चालू किए जाएं, ताकि भुखमरी की कगार पर खड़े बेजुबान पशुओं की जान बचाई जा सके।
पेयजल आपूर्ति और चारागाह भूमि के आवंटन पर उठाए सवाल
जल संकट के मुद्दे पर चर्चा करते हुए शिव विधायक ने पानी की टंकियों की समय सीमा को 31 दिसंबर तक आगे बढ़ाने के प्रशासनिक निर्णय को सवालों के घेरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि बाड़मेर के कई ग्रामीण इलाकों में बनी पानी की टंकियों से अब तक नियमित जलापूर्ति की बुनियादी शुरुआत ही नहीं हो सकी है। ऐसे हालात में जलापूर्ति की समय सीमा बढ़ाने के दावे केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास हैं, क्योंकि जब पाइपलाइन और टंकियां सूखी पड़ी हैं, तब कागजों पर तारीखें बढ़ाने से प्यास नहीं बुझ सकती।
इसके साथ ही रविंद्र सिंह भाटी ने मवेशियों के लिए परंपरागत गोचर और चारागाह भूमि के उपयोग पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान की पहचान यहां के लाखों पशुधन से है, लेकिन उनके चरने के लिए सुरक्षित रखी गई चारागाह जमीन का एक बड़ा हिस्सा पहले ही बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा कंपनियों को सौंप दिया गया है। जब चारागाह ही छिन गए हैं, तो संकट के समय पशुओं को चराने की जगह तक नहीं बची है।
पशुधन संरक्षण के दावों पर तीखा तंज
सत्ताधारी दल की नीतियों पर निशाना साधते हुए शिव विधायक ने कहा कि जो दल गाय और सनातन परंपराओं के नाम पर समर्थन जुटाकर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचा है, वही आज मवेशियों पर आए सबसे बड़े संकट के समय खामोश खड़ा है। उन्होंने कहा कि जब गायों और अन्य पशुओं को भूख और प्यास से बचाने के लिए सीधी सरकारी सहायता की सबसे अधिक जरूरत है, तब शासन की ओर से कोई संजीदा पहल नहीं की जा रही है। भाटी ने आग्रह किया कि बाड़मेर और जैसलमेर के गंभीर अकाल को देखते हुए राज्य प्रशासन तत्काल पर्याप्त बजट जारी करे, चारा डिपो और पशु शिविर तुरंत स्थापित करे तथा ग्रामीण इलाकों में टैंकरों और टंकियों के जरिए सुचारु पेयजल उपलब्ध कराए।


















