हरियाणा के पलवल जिले में स्थित जनौली गांव के बाशिंदे बुनियादी ढांचे की बदहाली से जूझ रहे हैं। गांव के बीच से गुजरने वाला मुख्य संपर्क मार्ग पिछले कई वर्षों से पूरी तरह क्षतिग्रस्त है, जिससे स्थानीय निवासियों को रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह मार्ग केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास की कई ग्रामीण बस्तियों को आपस में जोड़ते हुए फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और देश की राजधानी दिल्ली की तरफ जाने वाले मुसाफिरों के लिए भी बेहद अहम कड़ी माना जाता है। वर्षों से सरकारी स्तर पर कोई ठोस सुनवाई न होने के कारण लोगों का धैर्य जवाब दे गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने अपने घरों से मुख्य मार्ग तक आवागमन सुनिश्चित करने के लिए अपनी जेब से पैसे जुटाकर एक अस्थायी रास्ता तैयार किया है।
चुनावों में मतदान के बावजूद जमीनी विकास से वंचित नागरिक
स्थानीय निवासी बबलू हुड्डा का कहना है कि देश में भले ही चांद और मंगल पर पहुंचने की चर्चाएं चल रही हों, लेकिन धरातल की वास्तविक स्थिति बेहद निराशाजनक है। उनका कहना है कि यहां के लोगों के जीवन स्तर को देखकर प्रशासनिक उपेक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। गांव के लोग भारतीय नागरिक होने के नाते हर चुनाव में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। ग्रामीण लोकसभा, विधानसभा, जिला परिषद, ब्लॉक समिति और ग्राम पंचायत स्तर तक मतदान करते रहे हैं। इसके बावजूद सवाल यह खड़ा होता है कि इन मतों का लाभ जनता को क्यों नहीं मिल पा रहा, क्योंकि जमीनी हकीकत में किसी प्रकार का बुनियादी विकास नजर नहीं आता।
बरसात में जलभराव और स्कूली बच्चों की मुश्किलें
सड़क के अभाव और खस्ताहाली का सबसे बुरा असर पढ़ने वाले बच्चों पर पड़ रहा है। गांव के निवासी मनोज डागर ने बताया कि वैज्ञानिक तरक्की के इस दौर में भी उनके गांव का रास्ता कई वर्षों से इसी जर्जर हालत में पड़ा हुआ है। उनका कहना है कि जब भी निर्माण कार्य की कोई सुगबुगाहट होती है, तो संबंधित काम पर किसी न किसी पक्ष द्वारा रोक लगवा दी जाती है। बड़ी संख्या में दैनिक यात्री इस मार्ग से गुजरते हैं और परेशान होते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि इस महत्वपूर्ण रास्ते का निर्माण जल्द से जल्द कराया जाए क्योंकि यह दिल्ली तक की राह सुगम बनाता है।
स्थानीय निवासी रवि ने बताया कि मार्ग की दुर्दशा के कारण गांव की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। बारिश के दिनों में रास्ते पर जलभराव हो जाता है, जिससे स्कूली बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना भारी जोखिम भरा हो जाता है। लंबे समय से न तो यहां कोई निर्माण कार्य शुरू कराया गया और न ही प्रशासनिक चौखट पर ग्रामीणों की गुहार सुनी जा रही है।
जमीन हस्तांतरण की प्रशासनिक अड़चनों में बीता डेढ़ दशक
गांव के बुजुर्ग हरदेव डागर के अनुसार यह मार्ग लगभग 15 साल से बंद पड़ा है, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की भारी लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से कई दफा जमीन उपलब्ध कराने की बात कही गई, मगर खंड विकास अधिकारी यानी बीडीओ और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। हर बार किसी न किसी कारण से आधिकारिक आपत्ति लगा दी जाती है, जिसकी वजह से पिछले 15 सालों से सड़क का निर्माण अटका हुआ है। यहां तक कि चुनावी दौर में भी इस जरूरी रास्ते के निर्माण को प्राथमिकता में शामिल नहीं किया गया।
वहीं 70 वर्षीय नवल ने बताया कि उम्र के इस पड़ाव पर खराब रास्ते से आवाजाही करना बेहद कष्टकारी साबित होता है। अपने आवास तक सुरक्षित पहुंचने के लिए ग्रामीणों को आपसी सहयोग और कड़ी मेहनत से खुद ही रास्ता बनाना पड़ा है। शासन और प्रशासन की बेरुखी से गांव के लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।





















