खेलकूद के क्षेत्र में आगे बढ़ने की चाह रखने वाले विशेष बच्चों के लिए रोलर स्केटिंग एक बेहतरीन और उभरता हुआ करियर विकल्प साबित हो रहा है। अंबाला छावनी के सुभाष पार्क में स्थित स्केटिंग रिंक इन दिनों विशेष बच्चों की खेल यात्रा का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां दिव्यांग और विशेष जरूरतों वाले बच्चे अपनी खेल प्रतिभा को निखारने में पूरी शिद्दत से जुटे हुए हैं। खेल सिर्फ इन बच्चों के शारीरिक विकास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह उनके भीतर छिपे आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रहे हैं। इन प्रयासों के बलबूते ये बच्चे अब स्थानीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं।
वात्सल्य स्पेशल चाइल्ड स्कूल के कोच दे रहे हैं विशेष प्रशिक्षण
सुभाष पार्क में चल रहे इस विशेष प्रशिक्षण अभियान की कमान कोच चंद्रराज शर्मा के हाथों में है। वह वात्सल्य स्पेशल चाइल्ड स्कूल से जुड़े हुए हैं और बच्चों को नियमित रूप से स्केटिंग के गुर सिखाते हैं। उनका मुख्य फोकस बच्चों की शारीरिक क्षमता, संतुलन को बेहतर बनाने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने पर रहता है। कोच का मानना है कि विशेष बच्चों को किसी भी मामले में कम नहीं आंकना चाहिए। उन्हें समाज में सहानुभूति की नहीं, बल्कि सही अवसर और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है ताकि वे अपनी असली क्षमता को पहचान सकें।
प्रशिक्षण शुरू करने से पहले किन बातों का रखें ध्यान
अगर अभिभावक अपने विशेष बच्चे को स्केटिंग के क्षेत्र में उतारना चाहते हैं, तो उन्हें कुछ जरूरी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले बच्चे की व्यक्तिगत रुचि और उसकी शारीरिक क्षमता का आंकलन करना बहुत जरूरी है। इसके बाद किसी कुशल और अनुभवी कोच की देखरेख में ही अभ्यास की शुरुआत करवानी चाहिए। विशेष बच्चों के मामले में उनकी व्यक्तिगत जरूरतों, सुरक्षा मानकों और स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखना अनिवार्य हो जाता है। नियमित अभ्यास, सही तकनीक, कड़ा अनुशासन और परिवार का पूरा सहयोग ही बच्चे को सफलता के रास्ते पर आगे ले जाता है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही है बड़ी सफलता
कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन के दम पर इन बच्चों ने साबित कर दिया है कि वे किसी से पीछे नहीं हैं। कोच चंद्रराज शर्मा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाले एक विशेष बच्चे ने साल 2023 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल किया था। इस शानदार उपलब्धि के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा उस खिलाड़ी को 45 लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा तांशु ने साल 2025 में आयोजित आइस स्केटिंग की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो पदक अपने नाम किए, जिसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें 14 लाख रुपये प्रदान किए। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि सही दिशा और समर्थन मिलने पर ये बच्चे असाधारण सफलता हासिल कर सकते हैं।
अभिभावकों का अनुभव और संघर्ष की कहानी
विशेष बच्चों की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का त्याग और अटूट विश्वास भी शामिल है। स्पेशल चाइल्ड गुरुवंश की मां ज्योति साझा करती हैं कि उनका बेटा जन्म से ही विशेष जरूरतों वाला है और शुरुआती दौर में लोगों ने उसकी क्षमताओं पर कई तरह के सवाल उठाए थे। उन नकारात्मक बातों की वजह से परिवार को काफी मानसिक संघर्ष से गुजरना पड़ा था, लेकिन उन्होंने कभी अपने बेटे का हौसला नहीं टूटने दिया। स्केटिंग ने उनके बेटे को जीवन की एक नई दिशा दी है, जहां वह रोजाना कई घंटे अभ्यास करता है। वहीं, एक अन्य विशेष बच्चे माधव शर्मा की मां, जो खुद एक साइंस टीचर हैं, उनका कहना है कि ऐसे बच्चों को सही दिशा दिखाने और समझने के लिए अपार धैर्य, समय और समर्पण की जरूरत होती है। अभिभावक और कोच मिलकर इन बच्चों के सपनों को पंख देने में लगातार जुटे हुए हैं।





















