कैंसर के बढ़ते मामलों ने चिकित्सा जगत और आम लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, जिसके कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को अपनी जीवनशैली के प्रति बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल ने आगाह किया है कि गुटका, तंबाकू, सिगरेट और शराब जैसी आदतें इस जानलेवा बीमारी के खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दैनिक आदतों में सुधार और शरीर में होने वाले बदलावों के प्रति जागरूकता ही इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
नशीले पदार्थों का सेवन और कैंसर का सीधा संबंध
डॉ. आशीष मित्तल के अनुसार, तंबाकू और नशीले पदार्थों में पाए जाने वाले हानिकारक तत्व शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को धीरे-धीरे नष्ट कर देते हैं। इन पदार्थों का लगातार सेवन मुख्य रूप से मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर को बुलावा देता है। चिकित्सक ने आजकल के युवाओं और किशोरों में तेजी से पैर पसार रही तंबाकू और नशे की आदतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अक्सर कम उम्र के बच्चे गलत संगत में पड़कर या केवल दिखावे और शौक के लिए इन हानिकारक चीजों का सेवन शुरू कर देते हैं।
शुरुआत में जिस आदत को केवल एक मनोरंजन या फैशन समझा जाता है, वह समय के साथ एक गंभीर शारीरिक निर्भरता में बदल जाती है। कम उम्र में नशे की इस शुरुआत का प्रभाव भविष्य में उनके संपूर्ण स्वास्थ्य को नष्ट कर देता है। डॉ. मित्तल ने युवा वर्ग से पुरजोर अपील की है कि वे इस जाल से दूर रहें, किसी भी प्रकार के नशे को न कहें और एक गरिमामय व स्वस्थ जीवनशैली का चुनाव करें।
कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना है अत्यंत आवश्यक
कैंसर जैसी बीमारी के इलाज में सबसे बड़ी बाधा यह है कि लोग इसके शुरुआती संकेतों को बहुत ही सामान्य समझकर टाल देते हैं। डॉ. मित्तल ने स्पष्ट किया कि शरीर में लंबे समय तक रहने वाले किसी भी बदलाव को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। उन्होंने कैंसर के कुछ प्रमुख शुरुआती लक्षणों के बारे में बताया, जिनमें मुंह के भीतर लंबे समय तक ठीक न होने वाले घाव, जीभ या मसूड़ों पर सफेद या लाल रंग के धब्बों का दिखाई देना, लगातार बनी रहने वाली खांसी, आवाज में अचानक आया भारीपन और भोजन या पानी निगलने में होने वाली तकलीफ शामिल हैं।
इसके अलावा, शरीर के किसी भी हिस्से में अचानक बिना दर्द वाली गांठ का उभरना, बिना किसी ठोस कारण के तेजी से वजन का कम होना, शरीर में लगातार कमजोरी महसूस होना और बिना किसी स्पष्ट वजह के दर्द रहना भी इसके लक्षणों में गिने जाते हैं। हालांकि ये लक्षण अन्य सामान्य बीमारियों के भी हो सकते हैं, लेकिन डॉ. मित्तल का कहना है कि जोखिम से बचने के लिए तुरंत डॉक्टर से मिलकर आवश्यक जांच कराना ही एकमात्र सुरक्षित उपाय है।
बचाव के मुख्य तरीके और पौष्टिक आहार की भूमिका
कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए सतर्कता और सेहतमंद आदतों को अपनाना सबसे जरूरी है। इस घातक बीमारी से सुरक्षित रहने के लिए गुटका, तंबाकू, धूम्रपान और शराब के सेवन को पूरी तरह से अलविदा कहना होगा। इसके साथ ही, चिकित्सक ने खानपान की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने बताया कि बाहर मिलने वाले अस्वच्छ भोजन और पैकेट में बंद अत्यधिक संसाधित खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। शरीर को भीतर से मजबूत रखने के लिए घर पर तैयार ताजा और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन ही सर्वोत्तम है।
खानपान में सुधार के साथ-साथ दैनिक दिनचर्या में नियमित शारीरिक व्यायाम और योगाभ्यास को शामिल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। यदि कैंसर की पहचान इसके पहले या दूसरे चरण में ही हो जाती है, तो चिकित्सा तकनीकों की मदद से इसका पूरी तरह से इलाज संभव है। डॉ. मित्तल के अनुसार, लोगों को अपने स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिए और हर संदिग्ध लक्षण पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
नियमित स्वास्थ्य जांच और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ
चिकित्सक ने इस बात पर जोर दिया कि चाहे बीमारी कैंसर हो या कोई अन्य गंभीर समस्या, समय पर निदान होने से मरीज को सही और बेहतर इलाज मिल सकता है। लक्षणों की लंबे समय तक अनदेखी करना स्थिति को अनियंत्रित और गंभीर बना देता है। उन्होंने जनता से अनुरोध किया कि वे अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर साल में कम से कम एक बार अपनी सामान्य स्वास्थ्य जांच जरूर करवाएं ताकि शरीर के भीतर पनप रही किसी भी बीमारी को समय रहते पकड़ा जा सके।
आम नागरिकों की सुविधा के लिए आगरा के जिला अस्पताल में कई महत्वपूर्ण और आवश्यक स्वास्थ्य जांचें पूरी तरह से निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। डॉ. मित्तल ने लोगों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनें, सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध इन सुविधाओं का लाभ उठाएं और किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण दिखने पर बिना समय गंवाए विशेषज्ञ डॉक्टरों से उचित चिकित्सकीय परामर्श लें।



















