एरी वव्वाल मछली में छिपा है सेहत का खजाना, बच्चे-बुजुर्ग भी बिना डर के खा सकते हैंस्वास्थ्य
3 घंटे पहले· 1

एरी वव्वाल मछली में छिपा है सेहत का खजाना, बच्चे-बुजुर्ग भी बिना डर के खा सकते हैं

तमिलनाडु में एरी वव्वाल के नाम से मशहूर यह मीठे पानी की मछली कांटे कम होने की वजह से बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी आसान है, और इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन B12 व ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

अगर आप ऐसी मछली की तलाश में हैं जो खाने में स्वादिष्ट भी हो और जिसे खाते वक्त कांटे चुभने का डर भी ना हो, तो तमिलनाडु के कई इलाकों में मशहूर एरी वव्वाल मछली आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। यह मीठे पानी की मछली सिर्फ जायके के लिए नहीं, बल्कि अपने पोषक तत्वों के लिए भी जानी जाती है, और यही वजह है कि इसे रोजाना के खाने में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी आसान

ज्यादातर मछलियों में कांटे इतने होते हैं कि उन्हें खाते समय खासी सावधानी बरतनी पड़ती है, लेकिन एरी वव्वाल मछली में कांटे बेहद कम होते हैं। यही वजह है कि छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी इसे बिना किसी परेशानी के आसानी से खा सकते हैं। इसके अलावा इसकी कीमत भी बाजार में मिलने वाली कई दूसरी मछलियों की तुलना में काफी कम होती है, जिससे यह हर घर के बजट में आसानी से फिट बैठती है और आम परिवार भी इसे नियमित रूप से अपनी थाली में शामिल कर सकते हैं।

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पोषक तत्वों का पावरहाउस

एरी वव्वाल मछली में कैल्शियम की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके साथ ही इसमें विटामिन A, विटामिन D, विटामिन E और विटामिन B12 जैसे जरूरी पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं। यह मछली हाई क्वालिटी प्रोटीन का भी बेहतरीन स्रोत मानी जाती है। इतना ही नहीं, इसमें सेलेनियम जैसा एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा-3 फैटी एसिड भी पाया जाता है, जो मिलकर इसे संपूर्ण सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बनाते हैं।

हड्डियों को मिलती है मजबूती

चूंकि इस मछली में कैल्शियम की मात्रा भरपूर होती है, इसलिए यह हड्डियों को मजबूत बनाने में सीधी मदद करती है। जिन लोगों की हड्डियां पहले से कमजोर हैं या जो बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों से जुड़ी दिक्कतों से बचना चाहते हैं, उनके लिए इस मछली को डाइट में शामिल करना फायदेमंद साबित हो सकता है।

त्वचा, बाल और मांसपेशियों के लिए भी फायदेमंद

इस मछली में मौजूद विटामिन दांतों, त्वचा और बालों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। साथ ही चूंकि यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, इसलिए इसका सेवन मांसपेशियों के विकास और उनकी मरम्मत के लिए भी काफी उपयोगी माना जाता है।

खून की कमी दूर करने में मददगार

एरी वव्वाल मछली में विटामिन B12 अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर में नई लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। इससे एनीमिया यानी खून की कमी का खतरा कम हो सकता है। इसके साथ ही विटामिन B12 तंत्रिका तंत्र को भी बेहतर तरीके से काम करने में सहायता करता है।

आंखों की रोशनी और बढ़ती उम्र के असर पर लगाम

इस मछली में मौजूद पोषक तत्व आंखों की रोशनी को बनाए रखने में मदद करते हैं। साथ ही यह कोशिकाओं को नुकसान से बचाकर बढ़ती उम्र के असर को धीमा करने में भी सहायक हो सकते हैं।

दिल और दिमाग के लिए ओमेगा-3 का तोहफा

हालांकि एरी वव्वाल एक मीठे पानी की मछली है, फिर भी इसमें DHA और EPA जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड मौजूद होते हैं। ये तत्व दिल को स्वस्थ रखने के साथ-साथ दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाने और याददाश्त को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

डाइट में कैसे करें शामिल

इस मछली को हफ्ते में एक या दो बार भोजन में शामिल किया जा सकता है। इसका पूरा फायदा उठाने के लिए बेहतर यही होगा कि इसे ज्यादा तेल में तलने के बजाय मछली की करी बनाकर खाया जाए, या फिर हल्का मसाला लगाकर तवे पर सेंककर परोसा जाए। इस तरह पकाने से इसके पोषक तत्व बरकरार रहते हैं और सेहत को ज्यादा फायदा मिलता है।

सवाल-जवाब

एरी वव्वाल मछली क्या है और यह कहां मशहूर है?
यह एक मीठे पानी की मछली है जिसे तमिलनाडु के कई इलाकों में एरी वव्वाल के नाम से जाना जाता है।
इस मछली में कांटे कम होना क्यों खास बात है?
कांटे कम होने की वजह से बच्चे और बुजुर्ग भी इसे बिना परेशानी के आसानी से खा सकते हैं।
इस मछली में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
इसमें कैल्शियम, विटामिन A, D, E और B12, हाई क्वालिटी प्रोटीन, सेलेनियम जैसा एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं।
यह मछली हड्डियों के लिए कैसे फायदेमंद है?
इसमें मौजूद भरपूर कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी हड्डियां कमजोर हैं।
क्या यह मछली खून की कमी दूर करने में मदद करती है?
हां, इसमें मौजूद विटामिन B12 नई लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है, जिससे एनीमिया का खतरा कम हो सकता है।
इसे हफ्ते में कितनी बार खाना चाहिए और किस तरह पकाना बेहतर है?
इसे हफ्ते में एक या दो बार खाया जा सकता है और ज्यादा तेल में तलने के बजाय करी बनाकर या हल्का मसाला लगाकर तवे पर सेंककर खाना बेहतर रहता है।

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