कैंसर मरीजों के लिए राहत, डीएससीआई में मुफ्त हुई तीन लाख की ब्रैकीथेरेपी सुविधास्वास्थ्य
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कैंसर मरीजों के लिए राहत, डीएससीआई में मुफ्त हुई तीन लाख की ब्रैकीथेरेपी सुविधा

दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) में कैंसर के इलाज के लिए ब्रैकीथेरेपी सेवा शुरू हो गई है, जिसका पहला सफल मामला 09 जुलाई 2026 को पूरा हुआ. यह इलाज प्राइवेट अस्पतालों में 3 लाख रुपये तक में होता है, जबकि यहां यह मुफ्त मिलेगा.

दिल्ली के सरकारी अस्पताल दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट यानी डीएससीआई में कैंसर मरीजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. यहां अब ब्रैकीथेरेपी नाम की एडवांस रेडिएशन तकनीक से मुफ्त इलाज शुरू हो गया है. इससे पहले यह सुविधा ज्यादातर प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध थी, जहां इसके लिए मरीजों को अपनी जेब से भारी रकम खर्च करनी पड़ती थी.

09 जुलाई को पूरा हुआ पहला केस

डीएससीआई में यह सुविधा शुरू करने की दिशा में 09 जुलाई 2026 को पहला ब्रैकीथेरेपी केस सफलतापूर्वक पूरा किया गया. इसके तुरंत बाद अस्पताल प्रशासन ने इस सेवा को नियमित रूप से मरीजों के लिए सुचारू कर दिया. अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि यह कदम कैंसर रोगियों को अत्याधुनिक, सटीक और गुणवत्तापूर्ण इलाज मुहैया कराने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगा.

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क्या होती है ब्रैकीथेरेपी

ब्रैकीथेरेपी असल में रेडिएशन थेरेपी की ही एक तकनीक है, लेकिन इसमें आम रेडिएशन थेरेपी से अलग तरीका अपनाया जाता है. इसमें विकिरण यानी रेडिएशन का स्रोत सीधे ट्यूमर के भीतर या उसके बिल्कुल पास रखा जाता है. इस वजह से कैंसर वाले टिशू पर ज्यादा असरदार तरीके से रेडिएशन पहुंचता है, जबकि आसपास मौजूद स्वस्थ टिशू को नुकसान बहुत कम होता है. डॉक्टरों के मुताबिक यह तकनीक खासतौर पर गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर, एंडोमेट्रियल कैंसर और कुछ अन्य चुनिंदा तरह के कैंसर के इलाज में बेहद कारगर साबित होती है.

डॉक्टरों ने बताया इसे बड़ी उपलब्धि

संस्थान की लिंक ऑफिसर टू डायरेक्टर डॉ. सविता अरोड़ा ने बताया कि ब्रैकीथेरेपी से इलाज में मिली सफलता के बाद ही इसे अस्पताल में शुरू करने का फैसला लिया गया और यह डीएससीआई के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. उनके मुताबिक इस सेवा के शुरू होने से कैंसर के मरीजों को सुरक्षित और तय समय पर इलाज मिल सकेगा. साथ ही मरीजों को कैंसर से जुड़ी पूरी देखभाल अब एक ही जगह पर मिल जाएगी, उन्हें अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ेगा.

अब नहीं भेजना पड़ेगा दूसरे अस्पताल

क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. प्रज्ञा शुक्ला के अनुसार ब्रैकीथेरेपी आजकल आधुनिक रेडिएशन ऑन्कोलॉजी का एक जरूरी हिस्सा बन चुकी है. उन्होंने बताया कि डीएससीआई में यह सुविधा दोबारा शुरू होने से अब कई मरीजों को यहीं पर बेहद सटीक और वैज्ञानिक आधार पर तैयार इलाज मिल सकेगा. पहले जिन मरीजों को इस थैरेपी के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था, अब उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

प्राइवेट में लगते हैं 3 लाख रुपये तक

डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने यह भी बताया कि डीएससीआई में यह मेडिकल सुविधा पूरी तरह मुफ्त है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में अगर कोई मरीज इसी थैरेपी से इलाज कराता है, तो कई सेशन के लिए उसे अधिकतम 3 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं. यही वजह है कि सरकारी अस्पताल में यह सेवा शुरू होना कैंसर के मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत की बात मानी जा रही है.

अनुभवी टीम करेगी मरीजों की देखभाल

अस्पताल में यह सुविधा अकेले किसी एक डॉक्टर के भरोसे नहीं, बल्कि एक पूरी समर्पित टीम मिलकर संभालेगी. इसमें अनुभवी रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, मेडिकल फिजिसिस्ट, रेडिएशन टेक्नोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और नर्सिंग स्टाफ शामिल हैं. इन सभी विशेषज्ञों के तालमेल से ही मरीजों को सुरक्षित और सटीक इलाज मिल सकेगा.

सवाल-जवाब

डीएससीआई में ब्रैकीथेरेपी सेवा कब शुरू हुई?
डीएससीआई में पहला ब्रैकीथेरेपी केस 09 जुलाई 2026 को सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसके बाद यह सेवा नियमित कर दी गई.
ब्रैकीथेरेपी क्या होती है?
यह एक रेडिएशन थेरेपी तकनीक है जिसमें रेडिएशन स्रोत को ट्यूमर के अंदर या बिल्कुल पास रखा जाता है, ताकि कैंसर टिशू पर असरदार असर हो और आसपास के स्वस्थ टिशू को कम नुकसान पहुंचे.
प्राइवेट अस्पताल में इस इलाज पर कितना खर्च आता है?
प्राइवेट अस्पतालों में ब्रैकीथेरेपी के कई सेशन कराने पर मरीजों को अधिकतम 3 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं.
डीएससीआई में यह इलाज किन मरीजों के लिए फायदेमंद है?
यह खासतौर पर सर्वाइकल कैंसर, एंडोमेट्रियल कैंसर और कुछ अन्य चुनिंदा तरह के कैंसर के मरीजों के लिए कारगर बताया गया है.
इस सेवा को कौन संचालित करेगा?
इसे अनुभवी रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, मेडिकल फिजिसिस्ट, रेडिएशन टेक्नोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और नर्सिंग स्टाफ की टीम संचालित करेगी.
क्या अब मरीजों को दूसरे अस्पताल रेफर किया जाएगा?
नहीं, डॉ. प्रज्ञा शुक्ला के अनुसार अब कई मरीजों को इस इलाज के लिए दूसरे केंद्रों में रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
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