बच्चों का ज्यादातर वक्त अब मोबाइल, टीवी और घर की चार दीवारी के बीच गुजरने लगा है, और यही आदत उनकी हड्डियों की मजबूती को सीधे नुकसान पहुंचा रही है। बहुत सारे मां-बाप यह सोचकर निश्चिंत हो जाते हैं कि बच्चे को कैल्शियम और विटामिन डी की दवा या सप्लीमेंट मिल रही है तो हड्डियां अपने आप मजबूत बन जाएंगी। लेकिन असलियत में ऐसा हर बार नहीं होता। कई बच्चे बार-बार गिर पड़ते हैं, थोड़ी देर खेलने में ही थक जाते हैं, या मामूली सी चोट लगने पर भी उन्हें ज्यादा तकलीफ होने लगती है। डॉक्टरों की मानें तो हड्डियों की मजबूती सिर्फ कैल्शियम और विटामिन डी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि रोजाना खेलना, धूप में वक्त बिताना, भरपूर नींद लेना और खानपान का संतुलित होना भी उतना ही जरूरी है। अगर इन आदतों की अनदेखी की जाए तो बच्चों की हड्डियां कमजोर पड़ सकती हैं।
सिर्फ सप्लीमेंट से नहीं, पूरे पोषण से बनती हैं मजबूत हड्डियां
अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद में बच्चों की हड्डियों के विशेषज्ञ डॉ. प्रितिश सिंह के मुताबिक, अकेले कैल्शियम और विटामिन डी से बच्चों की हड्डियां पूरी तरह मजबूत नहीं होतीं। ये दोनों तत्व जरूरी जरूर हैं, लेकिन शरीर को इनके अलावा भी कई और पोषक तत्वों की दरकार होती है। मैग्नीशियम, आयरन से लेकर विटामिन ए और विटामिन के तक, हर तत्व का अपना अलग रोल है। अगर बच्चे का रोजमर्रा का खानपान संतुलित नहीं है, तो सिर्फ सप्लीमेंट्स के दम पर अच्छी हड्डियां बनाना मुश्किल हो जाता है। यानी दवा की गोली पोषण की कमी की भरपाई पूरी तरह नहीं कर सकती, संतुलित थाली भी उतनी ही जरूरी है।
रोज खेलना-कूदना क्यों जरूरी है
डॉ. प्रितिश सिंह बताते हैं कि बच्चों के लिए रोजाना शारीरिक गतिविधि बेहद जरूरी है। दौड़ना, कूदना, साइकिल चलाना और बाहर के खेल खेलने से हड्डियों पर एक सही तरह का दबाव पड़ता है, जिससे वे धीरे-धीरे मजबूत होती जाती हैं। इसके उलट, अगर कोई बच्चा पूरे दिन घर में बैठा रहता है और उसकी शारीरिक गतिविधि ना के बराबर है, तो इसका सीधा असर उसकी हड्डियों की मजबूती पर पड़ता है। यानी सिर्फ खाना-पीना ठीक रखना काफी नहीं, शरीर को हिलाना-डुलाना भी उतना ही जरूरी है।
स्क्रीन टाइम बढ़ने से हड्डियों पर सीधा असर
डॉ. प्रितिश सिंह के मुताबिक ज्यादा स्क्रीन टाइम भी बच्चों की हड्डियों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। जब बच्चा मोबाइल, टीवी या टैबलेट के सामने ज्यादा वक्त बिताने लगता है, तो उसका खेलना-कूदना अपने आप कम हो जाता है, और इससे उसकी शारीरिक कसरत भी घट जाती है। जो बच्चा रोज खेलता है और जो बच्चा पूरे दिन स्क्रीन के सामने चिपका रहता है, दोनों की हड्डियों की मजबूती में साफ फर्क देखा जा सकता है।
धूप, अच्छी नींद और एक्सरसाइज का आपस में गहरा नाता
डॉ. प्रितिश सिंह समझाते हैं कि धूप, अच्छी नींद और नियमित एक्सरसाइज का हड्डियों की मजबूती से सीधा रिश्ता है। जब शरीर धूप के संपर्क में आता है, तो वह अपने आप विटामिन डी बनाने लगता है, और यही विटामिन डी कैल्शियम को शरीर में सही तरीके से इस्तेमाल होने में मदद करता है। इसके साथ ही रोजाना की शारीरिक गतिविधि से मांसपेशियां और हड्डियां, दोनों मजबूत बनती हैं। इस पूरे चक्र में अच्छी नींद की भूमिका भी कम नहीं है, क्योंकि बच्चों के सही शारीरिक विकास के लिए पर्याप्त और गहरी नींद जरूरी मानी जाती है।
ये संकेत दिखें तो डॉक्टर को दिखाना न भूलें
डॉ. प्रितिश सिंह के मुताबिक कुछ ऐसे लक्षण होते हैं, जिनसे मां-बाप समझ सकते हैं कि उनके बच्चे की हड्डियां कमजोर हो रही हैं। मसलन, अगर बच्चा खेलते समय जल्दी थकने लगे, बाहर खेलने में उसकी दिलचस्पी घट जाए, उसकी शारीरिक क्षमता पहले के मुकाबले कम महसूस हो, जोड़ों या हड्डियों में बार-बार दर्द बना रहे, या फिर उसे बार-बार फ्रैक्चर होने लगे, तो इन संकेतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में देर किए बिना डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कभी-कभी वजह कोई छिपी बीमारी भी होती है
डॉ. प्रितिश सिंह बताते हैं कि कई बार ऐसा भी होता है कि बच्चा अच्छा खाना खा रहा होता है और उसे सारे जरूरी पोषक तत्व भी मिल रहे होते हैं, फिर भी उसकी हड्डियां मजबूत नहीं बन पातीं। ऐसे मामलों में वजह शरीर के भीतर छिपी कोई बीमारी हो सकती है, जैसे लीवर या किडनी से जुड़ी दिक्कत, आंतों की कोई समस्या, या फिर पेट में कीड़े होना। इन हालात में शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से सोख नहीं पाता, चाहे खाने में कमी न हो। इसलिए ऐसी स्थिति में सिर्फ खुराक बढ़ा देने से समस्या हल नहीं होती, बल्कि सही जांच करवाकर सही इलाज कराना जरूरी होता है।
पेरेंट्स इन आदतों का रखें खास ध्यान
डॉ. प्रितिश सिंह की सलाह है कि मां-बाप को बच्चों की रोजमर्रा की आदतों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। बच्चे को रोज एक्सरसाइज के लिए प्रेरित करें, उसे बाहर के खेल खेलने का मौका दें, संतुलित भोजन दें, पर्याप्त धूप दिलाएं और स्क्रीन टाइम को सीमित रखें। इन छोटी-छोटी लेकिन अहम आदतों से न सिर्फ हड्डियां मजबूत होंगी, बल्कि बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास भी बेहतर होगा, और वह आगे चलकर ज्यादा स्वस्थ जिंदगी जी सकेगा।











