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आयुर्वेद और पोषण से भरपूर मुनगा दूर करेगा खून की कमी, छत्तीसगढ़ में 7.88 लाख परिवारों तक पौधे पहुंचाने की बड़ी तैयारीस्वास्थ्य
4 अक्तू॰ 2026, 5:24 pm (32 मिनट पहले)· 0

आयुर्वेद और पोषण से भरपूर मुनगा दूर करेगा खून की कमी, छत्तीसगढ़ में 7.88 लाख परिवारों तक पौधे पहुंचाने की बड़ी तैयारी

मुनगा यानी सहजन में मौजूद आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स एनीमिया तथा हड्डियों की कमजोरी से निपटने में मददगार हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने कुपोषण मिटाने के लिए 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए बड़े स्तर पर पौधे बांटने की मुहिम शुरू की है।

पारंपरिक खानपान में शामिल मुनगा केवल स्वाद बढ़ाने वाली सब्जी नहीं है, बल्कि पोषण और पारंपरिक चिकित्सा दोनों के लिहाज से एक संपूर्ण आहार माना जाता है। शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की भरपाई करने के साथ यह कई शारीरिक व्याधियों को नियंत्रित रखने में सहायक साबित होता है। पोषण विशेषज्ञ और चिकित्सक इसे रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने की सलाह देते हैं, क्योंकि इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स और मिनरल्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।

पोषण तत्वों का प्राकृतिक भंडार और एनीमिया में उपयोगिता

डॉ. आस्था मिश्रा के अनुसार, मुनगा विटामिन्स और खनिजों का एक बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत है। इसमें प्रचुर मात्रा में आयरन, फोलेट, विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम और मैग्नीशियम मौजूद होते हैं। नियमित भोजन में इसे जगह देने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है। खासकर महिलाओं और बच्चों में दिखने वाली खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या में मुनगे में मौजूद आयरन और फोलेट अत्यंत लाभकारी भूमिका निभाते हैं। यह तत्व शरीर में हीमोग्लोबिन स्तर को सुधारने में मदद करते हैं। हालांकि, खून की गंभीर कमी होने पर केवल मुनगा खाने पर निर्भर नहीं रहा जा सकता, ऐसी स्थिति में चिकित्सीय परामर्श और उचित चिकित्सीय जांच करवाना अनिवार्य होता है।

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हड्डियों की मजबूती और जोड़ों के दर्द में राहत

मुनगे में शामिल कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों के घनत्व और ढांचे को बनाए रखने के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। डॉ. आस्था मिश्रा ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद में हड्डियों की कमजोरी और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी व्याधियों के प्रबंधन में मुनगे के नियमित उपयोग की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, आयुर्वेदिक सिद्धांतों के तहत मुनगे को शूलहर और शोथहर प्रभाव वाला माना गया है। शूल का सीधा संबंध दर्द से होता है, जबकि शोथ सूजन को दर्शाता है। जोड़ों में दर्द, जकड़न या शरीर के किसी हिस्से में सूजन की शिकायत होने पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से मुनगा का सेवन काफी गुणकारी माना जाता है।

पाचन तंत्र में सुधार और वात-कफ का संतुलन

पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में भी मुनगे के औषधीय गुण सहायक सिद्ध होते हैं। डॉ. आस्था मिश्रा के मुताबिक, इसमें दीपन और पाचन गुण होते हैं, जो मंद पड़ी जठराग्नि को सक्रिय कर भोजन पचाने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं। जिन व्यक्तियों को अक्सर पेट संबंधी दिक्कतें या अपच की शिकायत रहती है, उनके लिए इसका आहार में होना फायदेमंद है। आयुर्वेद के अनुसार, मुनगे का रस कटु-तिक्त और इसका वीर्य उष्ण यानी तासीर गर्म होती है। यह शरीर में असंतुलित वात और कफ दोष को शांत करने का काम करता है। वात और कफ के असंतुलन से उत्पन्न होने वाली कई समस्याओं में उचित सलाह के साथ मुनगे का उपयोग किया जाता है। साथ ही, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और हानिकारक फ्री रेडिकल्स के असर को घटाते हैं।

छत्तीसगढ़ में कुपोषण के खिलाफ व्यापक अभियान

मुनगे के इन्हीं बहुमूल्य औषधीय और पोषण गुणों को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य से कुपोषण और एनीमिया को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत नागरिकों को मुनगा के पौधे निशुल्क वितरित किए जा रहे हैं और सार्वजनिक स्तर पर सघन पौधरोपण किया जा रहा है। शासन ने प्रदेश के 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए लगभग 7.88 लाख परिवारों को इस महत्वाकांक्षी पोषण अभियान से सीधे जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

डिजिटल डैशबोर्ड से निगरानी और रोपण का रिकॉर्ड

इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र बिंदु महिलाओं, किशोरियों और नन्हे बच्चों तक पौष्टिक आहार की सुलभता सुनिश्चित करना है, जिसके लिए हर आंगनबाड़ी कार्यक्षेत्र में मुनगे के पौधे लगाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। राजधानी रायपुर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रशासनिक तत्परता दिखाते हुए मात्र एक ही दिन में 50000 मुनगा पौधे लगाने का वृहद महाअभियान चलाया गया। केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और विकास को ट्रैक करने के लिए प्रशासन ने एक विशेष डिजिटल डैशबोर्ड भी तैयार किया है, जिससे पौधों के संरक्षण की निरंतर निगरानी की जा सके।

सवाल-जवाब

मुनगे में कौन-कौन से मुख्य पोषक तत्व पाए जाते हैं?
मुनगा आयरन, फोलेट, विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मौजूद होते हैं।
क्या मुनगा खून की कमी यानी एनीमिया को ठीक कर सकता है?
मुनगे में मौजूद आयरन और फोलेट खून की कमी में मददगार होते हैं, लेकिन गंभीर एनीमिया के लिए डॉक्टरी जांच और चिकित्सीय इलाज जरूरी है।
आयुर्वेद में मुनगे के कौन से गुण बताए गए हैं?
आयुर्वेद के अनुसार मुनगा शूलहर (दर्दनाशक), शोथहर (सूजन घटाने वाला) और दीपन-पाचन गुणों वाला है, जो वात और कफ दोष को शांत करता है।
छत्तीसगढ़ सरकार का 'हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा' अभियान क्या है?
यह कुपोषण और एनीमिया को दूर करने की एक योजना है, जिसके तहत 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए करीब 7.88 लाख परिवारों को मुफ्त मुनगा पौधे दिए जा रहे हैं।
रायपुर जिले में पौधरोपण को लेकर क्या विशेष कदम उठाया गया?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायपुर में एक ही दिन में 50000 मुनगा पौधे लगाए गए और इनकी देखरेख के लिए डिजिटल डैशबोर्ड बनाया गया है।
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