उत्तर प्रदेश में कालीन उद्योग के प्रमुख केंद्र भदोही के प्रशासनिक पहचान में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। रविवार को जनपद के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसभा को संबोधित करते हुए ऐलान किया कि इस जिले को अब संत रविदास नगर भदोही के रूप में जाना जाएगा। इस प्रशासनिक घोषणा के साथ ही क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 1,340 करोड़ रुपये से अधिक लागत की कुल 112 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया।
जिले की नई पहचान और संत परंपरा का सम्मान
सार्वजनिक कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ''अब हमारा भदोही जिला संत रविदास नगर भदोही कहलाएगा।'' उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर ही इस बात का संकल्प लिया गया था कि कालीन नगरी के रूप में विख्यात इस जनपद को मध्यकालीन संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी महाराज की स्मृति से जोड़ा जाएगा। अपनी साधना, भक्ति और सामाजिक समरसता के संदेश से समाज को संगठित करने वाले संत रविदास के सम्मान में जिले के नामकरण की यह रूपरेखा तय की गई है।
1,340 करोड़ रुपये की 112 विकास परियोजनाओं की शुरुआत
दौरे के दौरान क्षेत्र के समग्र उत्थान के लिए बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की गई। कुल 1,340 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाली 112 परियोजनाओं में स्थानीय ढांचागत विकास, जनसुविधाओं के विस्तार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने से जुड़े कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जमीन पर उतरने से कालीन शिल्प से जुड़े कामगारों, स्थानीय उद्यमियों और आम जनता को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।
तीर्थ विकास और 2017 से पहले की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार
सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास बजट के इस्तेमाल पर पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आज सरकारी धन का सदुपयोग धार्मिक तीर्थ स्थलों के कायाकल्प, विरासत के संरक्षण और प्राचीन धरोहरों के सौंदर्यीकरण में हो रहा है। 2017 से पहले की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में इसी बजट का उपयोग तीर्थों के निर्माण के बजाय कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल की आड़ में जमीन कब्जाने के लिए किया जाता था। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि मौजूदा डबल इंजन प्रशासन ने इस कार्यशैली को पूरी तरह रोककर भ्रष्टाचार पर लगाम कसी है और प्रदेश को माफिया मुक्त व उपद्रव मुक्त बनाकर उत्सवों की सुरक्षित भूमि में परिवर्तित किया है।



















