प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा में शतावरी को औषधीय गुणों का भंडार माना गया है। विशेष रूप से स्त्रियों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए इसे किसी अमृत से कम नहीं माना जाता। शरीर में अंदरूनी संतुलन बनाने से लेकर विभिन्न बीमारियों से राहत दिलाने तक, इस प्राकृतिक बूटी का प्रयोग कई प्रकार की दवाएं तैयार करने में किया जा रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बढ़ती मांग के कारण अब बड़ी संख्या में लोग इसे अपने घर के बगीचे में उगा रहे हैं, वहीं किसान भी इसे अपनी आय बढ़ाने के एक टिकाऊ विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
महिला स्वास्थ्य के लिए वरदान और सेवन के विविध तरीके
रायबरेली जिले के राजकीय आयुष चिकित्सालय शिवगढ़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ स्मिता श्रीवास्तव (BAMS लखनऊ विश्वविद्यालय) के अनुसार, शतावरी महिलाओं की शारीरिक समस्याओं को दूर करने में बहुत प्रभावी है। यह शरीर में हार्मोनल संतुलन बनाए रखने और अनियमित मासिक धर्म की स्थिति में राहत पहुंचाने का कार्य करती है। इसके साथ ही यह महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में भी उपयोगी मानी गई है।
स्वास्थ्य संबंधी अन्य फायदों की बात करें तो शतावरी का नियमित उपयोग पेट में होने वाली जलन, एसिडिटी तथा अल्सर जैसी समस्याओं को शांत करता है। यह पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के साथ शरीर की इम्यूनिटी और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है। त्वचा और बालों की देखभाल में भी इसकी बड़ी भूमिका है। यह चेहरे की झुर्रियों को कम करने और त्वचा की अन्य समस्याओं से मुक्ति दिलाने में मदद करती है।
डॉ स्मिता श्रीवास्तव ने शतावरी के सेवन के कई व्यावहारिक तरीके बताए हैं। इसकी ताजा पत्तियों या जड़ों को पानी में अच्छी तरह उबालकर स्वास्थ्यवर्धक काढ़ा तैयार किया जा सकता है। भोजन में इसकी ताजा पत्तियों और जड़ों को मिलाकर सब्जी के रूप में भी खाया जा सकता है। इसके अलावा शतावरी के सूखे चूर्ण का सेवन दूध या गुनगुने पानी के साथ किया जा सकता है। जो लोग प्राकृतिक रूप में इसका उपयोग नहीं कर पाते, उनके लिए बाजार में इसके कैप्सूल भी आसानी से उपलब्ध हैं।
घर पर गमले में शतावरी उगाने की आसान तकनीक
अगर आप शतावरी को घर पर ही उगाना चाहते हैं, तो इसके लिए गार्डेनिंग एक्सपर्ट शिव कुमार सिंह ने बेहद सरल तरीका साझा किया है। पौधे की सही बढ़ोतरी के लिए सबसे पहले गमले में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी को एक पूरे दिन के लिए तेज धूप में सुखाना जरूरी है। ऐसा करने से मिट्टी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया समाप्त हो जाते हैं।
इसके बाद धूप में सुखाई गई मिट्टी में 1 से 2 कप जैविक खाद मिलाएं। खादयुक्त मिट्टी को गमले में भरकर सतह को समतल कर लें। फिर मिट्टी के बीच में लगभग 2 इंच गहरा गड्ढा बनाएं और उसमें शतावरी के बीज डालें। बीज डालने के बाद गड्ढे को मिट्टी से ढककर बराबर कर दें और ऊपर से थोड़ा सा पानी छिड़कें। पौधों के बेहतर पोषण के लिए वर्मीकंपोस्ट यानी केंचुआ खाद या फिर अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करना सबसे उत्तम रहता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पौधा तेजी से विकसित होता है।
व्यावसायिक खेती से किसानों के लिए लंबे समय का मुनाफा
शतावरी की उपयोगिता केवल घरेलू पौधों तक सीमित नहीं है, बल्कि खेतों में इसकी बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती की जा रही है। बाजार में औषधीय कंपनियों और आयुर्वेदिक उत्पाद निर्माताओं की ओर से इसकी भारी मांग है, जिससे किसानों को इसकी उपज का बेहतरीन मूल्य मिल रहा है।
इस फसल की खेती के लिए ऐसी भूमि उपयुक्त होती है जहां जल निकासी की उचित व्यवस्था हो। शतावरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार सही देखभाल के साथ पौधा लगाने पर इससे लगातार कई वर्षों तक उपज प्राप्त होती रहती है। यही कारण है कि यह किसानों के लिए एक दीर्घकालिक और सुरक्षित आर्थिक निवेश की तरह कार्य करती है। स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ इसका बढ़ता व्यापार लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है।



















