दैनिक आहार में फलों को शामिल करना संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने का एक बेहद कारगर तरीका माना जाता है। ताजे फलों के भीतर भरपूर विटामिन्स, आवश्यक पोषक तत्व और स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक कंपाउंड्स मौजूद होते हैं। इसके बावजूद लोगों के बीच इस बात को लेकर हमेशा दुविधा बनी रहती है कि इन्हें अपनी दिनचर्या में किस पहर शामिल करना सबसे लाभकारी होता है। कई लोग सुबह के समय फलों के सेवन को सबसे अच्छा मानते हैं, जबकि कुछ लोग शाम के वक्त फल खाने को प्राथमिकता देते हैं। असल में फल खाने का सबसे सही तरीका क्या है और आपके शरीर की जरूरतें इस पर कैसे असर डालती हैं, इसे विस्तार से समझना जरूरी है।
नाश्ते के वक्त फल शामिल करने के फायदे और सावधानियां
सुबह के नाश्ते में फलों को प्राथमिकता देना शरीर को दिन की अच्छी शुरुआत देने का एक सरल उपाय है। फलों में पाए जाने वाले प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करते हैं। इसके साथ ही इनमें मौजूद प्रचुर फाइबर पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और लंबे समय तक तृप्ति का अहसास कराता है, जिससे अनावश्यक भूख नहीं लगती। सुबह के समय अपनी पसंद के अनुसार पपीता, केला, सेब, संतरा या अमरूद चुनना एक संतुलित चयन हो सकता है।
इसके बावजूद ऐसा कोई कड़ा वैज्ञानिक नियम नहीं है कि हर व्यक्ति को सुबह खाली पेट ही फल खाना चाहिए। कुछ संवेदनशील पाचन तंत्र वाले व्यक्तियों को खाली पेट फल खाने पर गैस, अत्यधिक एसिडिटी या बेचैनी और कमजोरी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यदि किसी को खाली पेट ऐसी परेशानी महसूस होती है, तो वे फलों को किसी अन्य हल्के भोजन के साथ मिलाकर या भोजन करने के कुछ देर बाद खा सकते हैं।
शाम के स्नैक्स में अस्वस्थ विकल्पों की जगह ताजे फल
शाम के समय जब हल्की भूख लगती है, तब अधिकांश लोग बिस्कुट, चिप्स, नमकीन या तले-भुने व मसालेदार खाद्य पदार्थों की ओर रुख करते हैं। इस तरह के प्रसंस्कृत स्नैक्स की तुलना में ताजे फल खाना सेहत के लिए कई गुना बेहतर विकल्प साबित होता है। शाम के समय सेब, पपीता, संतरा या अमरूद जैसे फलों का सेवन भूख को भी शांत करता है और शरीर को पोषण भी प्रदान करता है।
अक्सर एक आम धारणा यह भी देखने को मिलती है कि सूरज ढलने या शाम के समय फल खाने से शरीर का वजन बढ़ने लगता है। यह विचार पूरी तरह गलत है। वजन का घटना या बढ़ना दिनभर में ली जाने वाली कुल कैलोरी, भोजन की मात्रा, आपकी शारीरिक गतिविधि और व्यक्तिगत चयापचय दर पर निर्भर करता है, न कि केवल शाम को फल खाने से।
जूस के बजाय साबुत फल और भोजन के बाद सेवन का सच
दिन का कोई खास समय चुनने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण यह है कि आप अपनी नियमित दिनचर्या में फलों को स्थान दें। अलग-अलग रंगों और स्वादों वाले विभिन्न प्रकार के फलों का चयन करना चाहिए ताकि शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिल सकें। फलों का रस निकालकर पीने की तुलना में साबुत फल खाना हमेशा अधिक गुणकारी माना जाता है, क्योंकि साबुत फल में प्रचुर मात्रा में डाइटरी फाइबर बरकरार रहता है, जो जूस निकालने की प्रक्रिया में नष्ट हो जाता है।
भोजन करने के तुरंत बाद फल खाने को लेकर भी लोगों के अपने व्यक्तिगत अनुभव होते हैं। कुछ व्यक्तियों को भारी भोजन के एकदम बाद फल खाने पर पेट फूलने, गैस बनने या पेट में भारीपन की शिकायत हो सकती है। जिन लोगों को ऐसी समस्या होती है, उनके लिए बेहतर यही है कि वे भोजन और फल खाने के बीच थोड़ा अंतराल रखें। वहीं दूसरी तरफ, एक सामान्य और स्वस्थ पाचन तंत्र वाले व्यक्ति के लिए भोजन के बाद फल खाने से कोई बड़ा नुकसान नहीं होता है।
विशिष्ट स्वास्थ्य स्थितियों में जरूरी डॉक्टरी परामर्श
हालांकि फल आम तौर पर सभी के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। विशेष रूप से किडनी की बीमारी या अन्य गंभीर चिकित्सीय समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को यह ध्यान रखना पड़ता है कि वे कौन से फल और कितनी मात्रा में खा रहे हैं। ऐसे मरीजों में पोटैशियम या अन्य तत्वों का असंतुलन जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए किसी भी पुरानी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को अपनी डाइट में फलों का प्रकार और मात्रा तय करने से पहले अपने डॉक्टर या प्रमाणित डायटीशियन से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लेना चाहिए।


















