दिनभर की भागदौड़ और कामकाज के बाद शरीर में थकान का अनुभव होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। हालांकि, समस्या तब गंभीर हो जाती है जब कोई खास शारीरिक परिश्रम न करने के बावजूद लगातार शरीर टूटा हुआ महसूस हो, कमजोरी घेरे रहे या बार-बार चक्कर आने लगें। कई बार लोग इसे केवल भागदौड़ या सामान्य तनाव मानकर टालने की भूल कर बैठते हैं। महिलाओं के मामले में यह स्थिति विशेष रूप से ध्यान देने योग्य होती है, क्योंकि इसके पीछे शरीर के आंतरिक संतुलन से जुड़ी कई शारीरिक वजहें और कमियां सक्रिय हो सकती हैं।
थकान और कमजोरी के पीछे छिपे प्रमुख कारण
आयुर्वेदिक फिजिशियन डॉक्टर पूजा बताती हैं कि बिना अधिक श्रम किए बनी रहने वाली थकान और सुस्ती के पीछे एनीमिया अथवा आयरन की कमी एक बेहद आम कारण हो सकती है। जब शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होने लगती है, तो ऊर्जा का स्तर तेजी से नीचे गिरता है। इसके अतिरिक्त, थायरॉइड के स्तर में असंतुलन, ब्लड शुगर में लगातार होने वाले उतार-चढ़ाव, विटामिन B12 या विटामिन D का निम्न स्तर और हार्मोनल बदलाव भी शरीर की कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। इन सभी स्थितियों में व्यक्ति का ऊर्जा स्तर बुरी तरह प्रभावित होता है, इसलिए यह बेहद आवश्यक है कि लगातार बनी रहने वाली थकान के वास्तविक कारण की पहचान की जाए।
पीरियड्स के दौरान भारी ब्लीडिंग को कतई न करें नजरअंदाज
डॉक्टर पूजा के अनुसार, महिलाओं को अपने मासिक धर्म चक्र में होने वाले परिवर्तनों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। यदि पीरियड्स के दिनों में सामान्य से अधिक या बहुत भारी ब्लीडिंग की स्थिति बनती है और उसके साथ-साथ लगातार चक्कर, सिर घूमना या अत्यधिक दुर्बलता का सामना करना पड़ता है, तो इसे बिल्कुल भी सामान्य समझकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से शरीर में आवश्यक आयरन तेजी से कम होने लगता है, जिससे एनीमिया विकसित होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। समय पर इस पर ध्यान न देने से यह समस्या लंबे समय तक रहने वाली कमजोरी का रूप ले सकती है।
बिना चिकित्सकीय परामर्श के सप्लीमेंट्स लेने से बचें
आमतौर पर कमजोरी या आलस महसूस होते ही कई लोग बिना किसी जांच के अपनी मर्जी से आयरन, विटामिन B12, विटामिन D या अन्य मल्टीविटामिन सप्लीमेंट्स खाना शुरू कर देते हैं। इस तरह की आदत फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है। हर व्यक्ति के शरीर की बनावट, जीवनशैली और कमजोरी के मूल कारण अलग-अलग होते हैं। बिना किसी उचित मेडिकल सलाह या जांच के किसी भी तरह का सप्लीमेंट या दवा खुद से शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि किसी भी तत्व की अनावश्यक खुराक शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
लक्षण बने रहने पर आवश्यक जांच और डॉक्टरी सलाह जरूरी
यदि थकान कई दिनों या हफ्तों से लगातार बनी हुई है और उसके साथ चक्कर, शारीरिक दुर्बलता या पीरियड्स में भारी ब्लीडिंग जैसी जटिलताएं दिखाई दे रही हैं, तो तुरंत योग्य चिकित्सक से संपर्क करना सबसे सुरक्षित कदम है। डॉक्टर आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा लक्षणों का विश्लेषण करने के बाद आवश्यकतानुसार जरूरी ब्लड टेस्ट करवाने का सुझाव देते हैं। इन टेस्ट्स की रिपोर्ट से यह स्पष्ट रूप से सामने आ जाता है कि शरीर में किस पोषक तत्व की कमी है या कौन सा हार्मोनल बदलाव इस परेशानी की जड़ है। शरीर द्वारा दिए जाने वाले इन संकेतों को केवल व्यस्त दिनचर्या की थकान समझकर नजरअंदाज करने के बजाय सही समय पर चिकित्सकीय राय लेना ही समझदारी है।


















