स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परेशानी के सामने आते ही आज अधिकांश लोग सबसे पहले इंटरनेट का सहारा लेते हैं। बीमारी के शुरुआती लक्षणों की खोज से लेकर उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की तलाश तक, सब कुछ स्मार्टफोन पर कुछ ही पलों में खोजा जा रहा है। मरीज अक्सर अस्पताल जाने से पहले संबंधित चिकित्सक की योग्यता, उनके पुराने कार्य अनुभव और अन्य लोगों द्वारा दिए गए ऑनलाइन फीडबैक की जांच करते हैं। हालांकि, स्क्रीन पर दिखाई देने वाला हर आंकड़ा या तारीफ से भरा विवरण पूरी तरह सही हो, ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं होता। किसी भी चिकित्सक के प्रोफाइल पर नजर आने वाली शानदार पांच सितारा रेटिंग यह साबित नहीं करती कि वह हर पीड़ित के लिए सबसे उपयुक्त उपचारकर्ता ही साबित होंगे। इसी विषय पर डबल्स्योर.हेल्थ और पीपलऐप्स.एआई के संस्थापक शिवम दीक्षित ने स्पष्ट किया है कि केवल ऑनलाइन स्टार रेटिंग या इंटरनेट पर मौजूद प्रशंसा पत्रों के आधार पर स्वास्थ्य का फैसला लेना गंभीर चूक बन सकता है।
एक जैसी भाषा और घिसे-पिटे शब्दों वाले फर्जी रिव्यू से रहें सावधान
इंटरनेट पर अलग-अलग प्रोफाइल के नीचे दिखने वाली हर टिप्पणी वास्तविक मरीज की अपनी आपबीती हो, यह मान लेना गलत है। डिजिटल मंचों पर कृत्रिम तरीके से तैयार किए गए फर्जी विचार पोस्ट कराने का चलन भी देखा जाता है। जब किसी चिकित्सक के कमेंट बॉक्स में एक ही तरह के बयानों की भरमार दिखाई दे, जैसे कि उन्हें बार-बार सबसे बेहतरीन चिकित्सक, शहर का नंबर एक हृदय रोग विशेषज्ञ या सर्वश्रेष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ बताया जा रहा हो, तो मरीजों को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
समीक्षाओं की वास्तविकता जांचने के लिए केवल टेक्स्ट पढ़ने के बजाय टिप्पणी पोस्ट करने वाले यूजर की प्रोफाइल पर गौर करना समझदारी है। उस प्रोफाइल की पिछली गतिविधियों और उसके द्वारा अन्य सेवाओं पर दी गई राय को देखकर यह आसानी से समझा जा सकता है कि लिखने वाला व्यक्ति सचमुच कोई आम मरीज है या फिर वह केवल पैसे लेकर रेटिंग बढ़ाने वाली किसी एजेंसी का खाता है। एक ही ढर्रे पर लगातार लिखी गई तारीफें अक्सर प्रायोजित होती हैं।
शैक्षणिक योग्यता और अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच
जब भी किसी नए चिकित्सक से मिलने का मन बनाएं, तो सबसे पहले उनकी डिग्री, कॉलेज और कार्य अनुभव के वर्षों का ब्यौरा जुटाएं। यदि वह चिकित्सक किसी नामी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या स्वास्थ्य संस्थान से जुड़ा होने का दावा करते हैं, तो उस अस्पताल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उनके नाम की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।
इंटरनेट पर किसी सामान्य लिस्टिंग में दिखने वाली जानकारी की तुलना में संबंधित अस्पताल के डेटाबेस में दर्ज विवरण कहीं अधिक प्रामाणिक माना जाता है। किसी एक पोर्टल या अनौपचारिक वेबसाइट पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय अलग-अलग स्वतंत्र और आधिकारिक माध्यमों से जानकारी का मिलान करना मरीजों के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता है।
एआई के भ्रामक उत्तर और चिकित्सा खोज परिणामों का सच
आजकल तमाम लोग अपनी शारीरिक समस्याओं को समझने और डॉक्टरों के बारे में राय बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई टूल्स का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग मंचों पर अक्सर एक ही व्यक्ति या बीमारी के संबंध में परस्पर विरोधी अथवा भ्रामक विवरण सामने आ जाते हैं। कंप्यूटर प्रणाली द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली इस तरह की गलत, अधूरी या मनगढ़ंत जानकारियों को एआई भ्रम या हेलुसिनेशन कहा जाता है।
एआई द्वारा प्रस्तुत किसी भी निष्कर्ष को अंतिम सत्य स्वीकार करने के बजाय हमेशा आधिकारिक दस्तावेजों और संस्थागत स्रोतों से उसका सत्यापन करना चाहिए। चिकित्सक का अपना पंजीकृत वेब पेज या फिर वह चिकित्सालय जहां वे अपनी सेवाएं दे रहे हैं, इन मामलों में सबसे सटीक दस्तावेज मुहैया करा सकते हैं।
इसके साथ ही, गूगल सर्च रिजल्ट में किसी का नाम सबसे ऊपर आने का अर्थ कतई यह नहीं होता कि वह चिकित्सा विज्ञान में भी सबसे आगे हैं। सर्च इंजन पर शीर्ष स्थान हासिल करना केवल मजबूत डिजिटल उपस्थिति, कीवर्ड प्रबंधन और सर्च इंजन तकनीकों का परिणाम होता है। कई बार दशकों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ और बेहद कुशल डॉक्टर डिजिटल दुनिया में सक्रिय नहीं रहते, जिसके चलते वे इंटरनेट सर्च में पीछे छूट जाते हैं। सर्च रैंकिंग से किसी की चिकित्सीय निपुणता या सर्जिकल कुशलता को मापना पूरी तरह भ्रामक है।
चिकित्सक के चयन के दौरान ध्यान रखने योग्य मूल सिद्धांत
बीमारी के समय सही विशेषज्ञ तक पहुंचने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। सबसे पहले चिकित्सक की मेडिकल काउंसिल में मान्यता, उनकी मूल डिग्रियां और पूर्व अनुभव की पड़ताल करें। इसके पश्चात यह देखें कि वे किन मान्यता प्राप्त चिकित्सालयों या स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थानों में कार्यरत रहे हैं।
अन्य मरीजों की राय का विश्लेषण करते समय केवल सितारों की संख्या देखकर प्रभावित न हों, बल्कि लिखे गए अनुभव की गुणवत्ता और प्रोफाइल की प्रामाणिकता को समझें। इसके अतिरिक्त, अलग-अलग आधिकारिक स्वास्थ्य पोर्टलों पर दी गई उनकी जानकारी में कोई विरोधाभास तो नहीं है, यह जांचना भी जरूरी है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की भूमिका और सीमाएं
चिकित्सा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक और एआई मरीजों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। आम लोगों को कई बार यह समझ नहीं आता कि उनके विशिष्ट लक्षणों के लिए न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट के पास या सामान्य फिजिशियन के पास। ऐसी उलझन की स्थिति में एआई यह स्पष्ट करने में उपयोगी सिद्ध हो सकता है कि किस प्रकार के विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।
लेकिन एआई के सुझावों के आधार पर स्वयं अपनी बीमारी का फैसला कर लेना या मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदकर खाना जानलेवा साबित हो सकता है। यह तकनीक केवल सही विशेषज्ञ तक पहुंचने का एक प्रारंभिक साधन भर है। किसी भी रोग के सही परीक्षण, प्रयोगशाला जांच और सटीक दवाओं के निर्धारण के लिए योग्य चिकित्सक की प्रत्यक्ष सलाह का कोई विकल्प नहीं हो सकता।
आने वाले समय में रोगों के त्वरित परीक्षण, चिकित्सीय अनुसंधान और रोगियों तक आवश्यक स्वास्थ्य सूचनाएं पहुंचाने में एआई की भागीदारी और व्यापक होगी। शिवम दीक्षित के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में मरीज और डॉक्टर के बीच जानकारी के फासले को पाटने में उल्लेखनीय भूमिका निभाएगी। फिर भी, तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत हो जाए, स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े अंतिम निर्णय अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टरों के क्लिनिकल विवेक पर ही निर्भर रहेंगे।


















